आदिवासियों ने किया बैठक का बहिष्कार, गांव में आकर विचार-विमर्श करने की रखी शर्त्त
Updated at : 03 Aug 2018 3:47 AM (IST)
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रूपनारायणपुर : सालानपुर प्रखण्ड के नामोकेशिया इलाके में प्रस्तावित रानीगंज कोलफील्ड एरिया पुनर्वास परियोजना के कार्य को सुचारु रूप से जारी रखने के मुद्दे को लेकर सदर आसनसोल के महकमा शासक प्रलय रायचौधरी ने गुरुवार को प्रखण्ड कार्यालय में बैठक की. सालानपुर पंचायत समिति के अध्यक्ष श्यामल मजूमदार, बीडीओ तपन सरकार, एसीपी (वेस्ट) सुबीर कुमार […]
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रूपनारायणपुर : सालानपुर प्रखण्ड के नामोकेशिया इलाके में प्रस्तावित रानीगंज कोलफील्ड एरिया पुनर्वास परियोजना के कार्य को सुचारु रूप से जारी रखने के मुद्दे को लेकर सदर आसनसोल के महकमा शासक प्रलय रायचौधरी ने गुरुवार को प्रखण्ड कार्यालय में बैठक की.
सालानपुर पंचायत समिति के अध्यक्ष श्यामल मजूमदार, बीडीओ तपन सरकार, एसीपी (वेस्ट) सुबीर कुमार चौधरी, राज्य सरकार की हाउसिंग निदेशालय के प्रोजेक्ट अभियंता प्रभारी परेश विश्वास, अभियंता एके सिंह, टेका कंपनी ब्रिज एंड रूफ कंपनी के साईट इंचार्ज कौशिक घोष, सालानपुर प्रखण्ड तृणमूल अध्यक्ष मोहम्मद अरमान, जीतपुर उत्तररामपुर पंचायत की प्रधान अपर्णा राय, उप प्रधान तापस चौधरी आदि उपस्थित थे. प्रोजेक्ट को लेकर विरोध कर रहे आदिवासियों की समस्याओं को लेकर बैठक करनी थी, लेकिन बैठक में वे लोग नहीं आये. उनलोगों ने प्रशासन को उनके गांव में आकर बैठक करने को कहा.
महकमाशासक श्री राय ने कहा कि प्रोजेक्ट को लेकर आदिवासियों की समस्याओं पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गयी थी, लेकिन वे नहीं आये. वे गांव में बैठक करना चाहते है. उनके साथ जल्द ही गांव में जाकर ही बैठक की जायेगी.
सनद रहे कि रानीगंज कोलफील्ड एरिया पुनर्वास परियोजना के तहत 146 बस्तियों के 40 हजार परिवारों को पुनर्वासित करना है. सभी परिवार भूमिगत आग और धंसान प्रभावित इलाके के हैं. परियोजना के पहले चरण में जमीन के आधार पर चार प्रखण्ड सालानपुर, बाराबनी, जमुड़िया और अंडाल में कुल 12,712 आवास बनाने को लेकर राज्य हाउसिंग विभाग ने निविदा जारी की. सभी जगह वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया है. जिसमे सालानपुर प्रखण्ड नामोकेशिया इलाके में 26 एकड़ सरकारी खास जमीन पर कुल 1904 आवास बनने है.
यहां चार मंजिला कुल 119 ब्लॉक बनेंगे. प्रत्येक ब्लाक में 16 आवास होंगे. इसके अलावा इस आवासीय नगरी में स्कूल, बाजार, खेल का मैदान, धार्मिक स्थल आदि सभी बनाने का प्रावधान है. 14 मार्च को इस परियोजना का कार्य यहां आरम्भ होते ही स्थानीय आदिवासियों ने इसका विरोध किया और 16 मार्च को कार्य स्थल पर धावा बोल दिया. कार्य कर रहे कर्मचारी, श्रमिकों की जमकर पिटायी की. जिसके उपरान्त कार्य कर रही कंपनी यहां कार्य बंद कर अपने कर्मियों और मशीन लेकर चली गयी.
25 जुलाई को इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच जमीन घेराबंदी का कार्य आरंभ हुआ. कार्य कर रही ठेका कम्पनी के उपमहाप्रबंधक आर शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने पुनः यहां कार्य करने के लिए बुलाया. 27 जुलाई को स्थानीय बीडीओ ने साईट प्रभारी को बुलाकर कहा कि आदिवासियों के साथ बैठक चल रही है. तब तक के लिए कार्य को बंद कर दिया जाये. जिसके कारण तीन दिन ही कार्य होने के बाद कार्य बंद कर दिया गया. जो अबतक बंद है.
महकमा शासक श्री रायचौधरी ने कहा कि पुनः यहां हंगामा होने की आशंका के कारण कार्य कुछ दिनों के लिए स्थगित रखा गया है. आदिवासियों से बैठक कर उनकी समस्यायों को लेकर ठोस निर्णय के बाद कार्य आरंभ किया जायेगा. स्थानीय कुछ ईंट भट्ठा, चिमनी भट्ठा, बालू के कारोबार करने वाले भड़का रहे है और इस कार्य को रोकने के लिए उन्हें फंडिंग कर रहे है. जिनकी सूची तैयार की गयी है. जल्द ही उनपर भी कार्यवाई की जायेगी.
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