यूनियन, प्रबंधन के बीच टकराव घातक

Updated at : 06 Jul 2018 3:31 AM (IST)
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यूनियन, प्रबंधन के बीच टकराव घातक

आसनसोल : कोल इंडिया प्रबंधन और यूनियनों के बीच उत्पन्न गतिरोध खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. कोल इंडिया चेयरमैन एके झा ने गतिरोध समाप्त करने की पहल करते हुए सात जून को चार यूनियनों के चार नेताओं को डिनर पर बुलाया. पर बात नहीं बनी. इस डिनर में बीएमएस तथा एचएमएस […]

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आसनसोल : कोल इंडिया प्रबंधन और यूनियनों के बीच उत्पन्न गतिरोध खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. कोल इंडिया चेयरमैन एके झा ने गतिरोध समाप्त करने की पहल करते हुए सात जून को चार यूनियनों के चार नेताओं को डिनर पर बुलाया. पर बात नहीं बनी. इस डिनर में बीएमएस तथा एचएमएस के नेता नहीं पहुंचे.
इस गतिरोध से प्रबंधन या यूनियन नेताओं के सेहत पर भले ही कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा हो, पर कोयला मजदूर तथा रिटायर कोयला कर्मी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं. इसी बीच खबर है कि दो बार स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की बैठक स्थगित होने के बाद पांच जुलाई को प्रबंधन ने बैठक आहुत करने के लिए यूनियन नेताओं से संपर्क किया पर सहमति नहीं बन सकी. प्रबंधन का कहना है कि बहुत जल्द बैठक होगी. कमेटी की बैठक नहीं होने के कारण दसवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लटके हुए हैं. इस तथ्य को प्रबंधन भी स्वीकार कर रहा है.
क्या है पूरा मामला
इंटक और एचएमएस के विरोध के बाद भी लेफ्ट तथा राइट यानी बीएमएस, एटक तथा सीटू ने दसवें वेतन समझौते पर 10 अक्तूबर, 2017 को हस्ताक्षर किया. इसके विरोध में इंटक तथा एचएमएस ने आंदोलन किया. नेताओं के बीच तल्खियां इतनी बढ़ गयी कि निजी हमले होने लगे. स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी में एचएमएस को रखने, न रखने के सवाल पर कमेटी के गठन में बिलंब हुआ. अंतत: चार मार्च, 2018 को एपेक्स कमेटी की बैठक में कमेटी के गठन पर सहमति बनी.
यह भी तय हुआ कि चार यूनियनों से चार प्रतिनिधि होंगे. इसकी सूचना 11 अप्रैल को जारी कर दी गयी. इसी बीच 13 अप्रैल को कोयला सचिव के साथ वार्ता में व्यावसायिक खनन के विरोध में 16 अप्रैल को आहुत हड़ताल वापस ले ली गयी. हड़ताल वापसी के समझौते पर एटक तथा सीटू ने हस्ताक्षर नहीं किया. इसके बाद बीएमएस, एचएमएस तथा एटक व सीटू आमने-सामने आ गये. 16 अप्रैल को कोल इंडिया ने एक पत्र जारी किया.
जिसके मुताबिक नवगठित स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की बैठक 21 अप्रैल को होना तय हुआ. अचानक 18 अप्रैल को इस बैठक के स्थगित होने की सूचना जारी कर दी गयी. तीन मई को कोल इंडिया ने स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी को पुनर्गठित करते हुए एक पत्र जारी किया. जिसमें बीएमएस, एचएमएस को दो-दो और एटक व सीटू को एक-एक प्रतिनिधित्व दिया गया.
एटक तथा सीटू ने इसका लिखित विरोध किया. 26 मई को कोल इंडिया ने स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की तीन जून को बैठक आहुत होने की सूचना दी. इन सबके बीच 30 मई को कोल इंडिया ने 70 फासदी एरियर भुगतान का आदेश जारी कर दिया. इसके बाद भी तीन जून को भी कमेटी की बैठक नहीं हो सकी. यूनियन नेताओं ने इसके बहिष्कार की घोषणा कर दी थी.
मुद्दे जो लटके हैं
कमेटी की बैठक नहीं होने के कारण एक जुलाई, 2016 के बाद रिटायर कोल कर्मियों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है. क्योंकि मेडिकेयर स्कीम अभी भी मंजूर नहीं हुयी है. घर भाड़ा, ओटी सीलिंग, भारत भ्रमण, फीमेल वीआरएस, आश्रित नियोजन समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दे लटके हुए हैं.
क्या कह रहे हैं यूनियन नेता
एटक नेता तथा जेबीसीसीआइ सदस्य आरसी सिंह ने कहा कि कोल इंडिया प्रबंधन लापरवाह हो गया है. कुछ अधिकारी औद्योगिक शांति को बिगाड़ने में लगे हैं. इसका खामियाजा प्रबंधन को भुगतना पड़ेगा. मजदूरों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. कोल इंडिया चेयरमैन को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. एचएमएस नेता और जेबीसीसीआइ सदस्य एसके पांडेय ने कहा कि परिस्थिति गंभीर है. कोल इंडिया प्रबंधन यूनियनों के मतभेद का मजा ले रहा है. यूनियनों की उपेक्षा कर रहा है. यूनियनों के आपसी मतभेदों का खामियाजा कोल कर्मी भुगत रहे हैं. अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो ट्रेड यूनियनों के अस्तित्व पर भी संकट है.
बीएसएस नेता तथा जेबीसीसीआइ सदस्य बीके राय ने कहा कि प्रबंधन चाल चल रहा है. मनमानी कर रहा है. जेबीसीसीआइ के निर्णय पर सर्कुलर जारी करने से पहले स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी में चर्चा जरूरी है. सभी यूनियनों को सोचना होगा कि मजदूर हित में क्या कर सकते हैं. जेबीसीसीआइ में हुए निर्णय के बारे में जो गड़बड़ी हो रही है, उसमें सुधार हो ताकि कोल इंडिया में औद्योगिक शांति बरकरार रहे.
सीटू नेता और जेबीसीसीआइ सदस्य डीडी रामानंदन ने कहा कि प्रबंधन एपेक्स कमेटी की बैठक बुलाये. स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी में फेरबदल क्यों और किसके आदेश से किया गया, जबकि एपेक्स कमेटी में निर्णय हुआ था. प्रबंधन संवाद नहीं कर रहा है. इससे असंतोष बढ़ता जा रहा है. कोल इंडिया की स्थिति अच्छी नहीं है.
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