गारूई नदी के बढ़ते जल से बेलडांगा में पहली बार घरों में घुसा पानी

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निवासियों को अपने-अपने घर छोड़ कर परिचितों के घर लेनी पड़ी थी शरण निगम, जिला प्रशासन करे स्थायी समाधान, अन्यथा हर वर्ष होगी यही स्थिति आसनसोल : गारूई नदी के जल स्तर से वृद्धि होने से रेलपार के जिन इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी, उनमें डिपोपाड़ा बेलडांगा भी शामिल है. सौ से ज्यादा घरों […]

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निवासियों को अपने-अपने घर छोड़ कर परिचितों के घर लेनी पड़ी थी शरण
निगम, जिला प्रशासन करे स्थायी समाधान, अन्यथा हर वर्ष होगी यही स्थिति
आसनसोल : गारूई नदी के जल स्तर से वृद्धि होने से रेलपार के जिन इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी, उनमें डिपोपाड़ा बेलडांगा भी शामिल है. सौ से ज्यादा घरों में पानी प्रवेश करने से लाखों रूपये की संपत्ति का नुकसान हुआ. असहाय पीड़ितों ने छोटे छोटे बच्चों के साथ आसपास के इलाकों मेंबसे परिचितों के यहां शरण ली. वे चाहते हैं कि इस स्थिति का स्थायी समाधान हो.
बेलडांगा निवासी बबीता देवी ने कहा कि वे पिछले 20 साल से यहां रह रही है. इस साल बारिश में दो बार उनके घर में पानी घुसा. रात में नदी का जल स्तर बढ़ने लगा और सुबह होते-होते उनके घर में घुटनों तक पानी भर गया.
कुछ समय बाद कमर तक पानी भरा और बिस्तर, पलंग, चौकी, टीवी सेट, घर में रखा राशन सब जलमगA हो गये. छोटे बच्चों को लेकर रिश्तेदार के यहां शरण लेनी पडी. 30 हजार रूपये का सामान और राशन नष्ट हो गया. घटना के दिन स्थानीय पार्षद दिलीप मुमरू और नगर निगम अधिकारी आये थे. आश्वासन के बाद भी कोई मुआवजा नहीं मिला. उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन तथा जिला प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए. हर वर्ष इतना नुकसान सहना संभव नहीं है.
बेलडांगा निवासी बसंत प्रसाद ने कहा कि गारूई नदी मेंआये पानी के कारण दो बार उनके घर में पानी प्रवेश कर गया. घर में चार फुट तक पानी था.
घर में रखा टीवी, फ्रिज, मोटर, इंवर्टर, यूपीएस, गददा बिस्तर, पलंग आदि खराब हो गये.अफरा-तफरी का माहौल था. सामान बचाये या जान बचाये. 60 से 70 हजार रूपये की क्षति हुई. उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों तथा नगर निगम प्रशासन को इस संबंध में उचित पहल करनी चाहिए. ताकि इस तरह की घटनाएं न हो. इलाके में हाई ड्रेन बनाने तथा गारूई नदी की सफाई करने से इस घटना से निजात पाया जा सकता है.
बेलडांगा निवासी सुनीता देवी ने कहा कि लगातार तीन सालों से बारिश के मौसम में उनके घर में पानी प्रवेश कर रहा है. इस बार एक ही महीने में दो बार पानी घुसा. घर में रखा कपड़ा, बिस्तर, राशन, गददा सब डूब गये. 15 हजार रूपये की क्षति उठानी पड़ी. मुआवजा तो मिला नहीं.
लेकिन इस समस्या से निजात दिलाना चाहिए. गारूई नदी की सफाई होने से पानी निकल सकेगा. पार्षद दिलीप मुमरू को पहल करनी चाहिए. आबादी के अनुरूप इलाके में जल निकासी की व्यवस्था करनी होगी.
बेलडांगा निवासी अल्पना प्रमाणिक ने कहा कि पूरा इलाका जलमग्न हो गया था. मुख्य प्रवेश द्वार के निकट के कमरे में रखे गये कई सामान, गाड़ी के कलपूज्रे, साइकिल डूब गयी थी. दस हजार रूपये का नुकसान हुआ.
उन्होंने बताया कि नगर निगम अधिकारियों ने मुआयना किया था. लेकिन नगर निगम प्रशासन को इसके कारणों को तलाशना चाहिए. जल निकासी की बेहतर व्यवस्था हो. इसके लिए मुख्य जस स्त्रोत को मजबूत करना होगा.
बेलडांगा निवासी रामकरन सिंह ने कहा कि 60 साल में पहली बार बाढ़ के हालात दिखे.बेलडांगा में पानी भर गया था. घर के कई सामान, टीवी, कपडा, गद्दा, आलमीरा, अनाज आदि सहित कुल 16 हजार से ज्यादा रूपयों का नुकसान हो गया. परिजनों के सलाथ कम्यूनिटी हॉल में शरण लेनी पड़ी. उन्होंने कहा कि गारूई नदी में पानी बढ़ने से यह स्थिति बनी. नगर निगम प्रशासन तथा जिला प्रशासन को इसका स्थायी समाधान करना चाहिए. अन्यथा यह समस्या स्थायी बन जायेगी.
मोहल्ले के निवासी उपेंद्र राय ने कहा कि वे 17 साल से यहां रह रहे हैं. गारूई नदी से पानी न निकलने के कारण पहली बार इलाके में पानी भरा. सामान, बिस्तर, पलंग, चौकी, कपडा, टीवी, बर्तन, सोफा सेट, इलेक्ट्रोनिक सामान नष्ट हो गये. 40 हजार रूपये की क्षति हुयी. परिचित के यहां आश्रय लिया. गारूई नदी में जल स्तर न बढ़े तथा इलाके में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था के लिए सार्थक पहल हो.
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