सरकारी एक्ट के कारण नहीं हो रही पत्थर खदानों की नीलामी

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जिलाशासक ने मांगा संयुक्त सचिव से दिशा निर्देश खनिज की नीलामी का अधिकार, पत्थर के लिए अलग से कुछ नहीं खदानों, क्रेशरों के बंद होने से इनसे जुड़े 35 हजार श्रमिक हुए बेरोजगार आसनसोल : राज्य सरकार के वाणिज्य और उद्योग (सीएंडआई) विभाग की माईन्स शाखा द्वारा बीते 29 जुलाई, 2016 को जारी माईनर मिनिरल्स […]

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जिलाशासक ने मांगा संयुक्त सचिव से दिशा निर्देश

खनिज की नीलामी का अधिकार, पत्थर के लिए अलग से कुछ नहीं
खदानों, क्रेशरों के बंद होने से इनसे जुड़े 35 हजार श्रमिक हुए बेरोजगार
आसनसोल : राज्य सरकार के वाणिज्य और उद्योग (सीएंडआई) विभाग की माईन्स शाखा द्वारा बीते 29 जुलाई, 2016 को जारी माईनर मिनिरल्स कन्सेशन रूल 2016 अधिसूचना में पत्थर खदानों को लेकर सटीक दिशा-निर्देश न होने के कारण पश्चिम बर्दवान जिले में पत्थर खदानों के बंद होने से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 35 हजार लोग बेरोजगार हो गये है. वर्ष 2018 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले पत्थर उद्योग पर आये इस संकट का असर चुनाव पर भी पड़ने की आशंका को लेकर जिले के सभी तृणमूल नेता चिंतित है. प्रशासन पर पत्थर खदानों को जल्द आरंभ कराने का लगातार दबाव है.
जिलाशासक शशांक सेठी ने बताया कि कन्सेशन रूल, 2016 में कुछ तकनीकी खामियां है, जिसके कारण पत्थर खदानों की नीलामी में विलंब हो रहा है. नये सिरे से दिशा-निर्देश जारी करने के लिए सीएंडआई विभाग के संयुक्त सचिव को पत्न भेजा गया है.
क्या है पूरा मामला
पश्चिम बर्दवान जिला में आधिकारिक तौर पर शॉॅर्ट टर्म क्वायरी परिमट (एसटीक्यूपी) के आधार पर 23 और लांग टर्म क्वायरी परमिट (एलटीक्यूपी) के आधार पर पांच कुल 28 पत्थर खदाने थी. खनित पत्थरों को क्र ेशर मशीन में पीसकर विभिन्न आकारों में किया जाता था. जिसका उपयोग सड़क व अन्य निर्माण कार्यों में होता था. प्रतिदिन 35 हजार क्यूबिक फुट पत्थर की खपत जिले में होती है. अनेकों जगह इन पत्थर के बोल्डरों से नदी और नाले के किनारे की मिट्टी क्षरण रोकने मंउपयोग होता है. 29 जुलाई 2016 को कन्सेशन रूल 2016 की अधिसूचना जारी होने के बाद जिले की सभी पत्थर खदाने बंद हो गयी. इसके पहले प्रशासन ने नियमों के पालन के लिए नियमित छापेमारी की. इन खदानों पर आश्रित 87 क्र ेशर मशीन भी बंद हो गयी. प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े 35 हजार कर्मी बेरोजगार हो गये.
पांच पत्थर खदानों को मंजूरी
जिले में तीन एलटीक्यूपी अब लांग टर्म माईनिंग लीज (एलटीएमएल) से खनन की मंजूरी मिली है. दो की मंजूरी प्रक्रिया में है. यह खदानें बाराबनी में दीपक माजी, उज्ज्वल दास और सालानपुर में अरूप मंडल की है. बाराबनी में सपन कुमार और सुब्रत भारद्वाज की खदानों की मंजूरी एनवायरमेंट क्लीयरेंस (ईसी) के लिए लंबित है. ये खदाने अधिसूचना जारी होने के पहले से चल रही थी. एलटीएमएल की समय सीमा समाप्त होने तक खनन चलता रहेगा. इन्हें ईसी नहीं होने के कारण बंद किया गया था. जो खदाने एसटीक्यूपी के आधार पर चल रही थी, उनकी समय सीमा तीन माह की थी. जिसके कारण सारी खदाने बंद हो गयी. नये सिरे से इन्हें अनुमति नहीं मिली. इनके साथ ही इन पांच खदानों का भी भविष्य भी कन्सेशन रूल 2016 के नियम के दायरे में फंसा है. क्योंकि पांच खदानों के खनन का समय सीमा जैसे ही समाप्त होगी, उन्हें इस नियम का पालन करना होगा.
क्या है कन्सेशन रूल 2016
रूल में पत्थर खदानों की नीलामी का दायित्व जिलाशासक को है. निर्धारित प्रावधान पर हर चीज की नीलामी करने का अधिकार दिया गया है. पत्थर खदान की नीलामी को लेकर सही दिशा निर्देश नहीं होने के कारण मार्ग निर्देशन मांगा गया है. राज्य में कहीं भी पत्थर खदानों की नीलामी नहीं हो पा रही है.
मंत्री,मेयर से मिले एसोसिएसन के सदस्य
आसनसोल स्टोन माईन्स एंड क्र ेशर वेलफेयर एसोसिएसन के अध्यक्ष दीपक माझी ने बताया कि रूल 2016 लागू होने से पत्थर उद्योग बेहाल है. उद्योग से जुड़े 35 हजार लोग बेकार है. मंत्री मलय घटक, मेयर जितेंद्र तिवारी, जिलाशासक शशांक सेठी, स्थानीय सभी विधायक, पंचायत समितियों के अध्यक्ष से जाकर इस समस्या के समाधान का आग्रह किया गया है. सभी ने सकारात्मक आश्वासन दिया है.
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