गोरखधंधा : अंधविश्वास के दम पर कमा रहे दाम

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Feb 2017 7:50 AM

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कोलकाता: 21वीं सदी में भी लोगों के मन में अंधविश्वास कायम है. इसकी एक बानगी नीमतल्ला श्मशान घाट पर देखने को मिल रही है. यहां सड़क पर डाला लगा कर कर बैठने वाले कुछ लोग दावा करते हैं कि उनके पास एक ऐसा मैजिकल धुआं है, जिससे दांत के कीड़े निकल जाते हैं, जबकि मेडिकल […]

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कोलकाता: 21वीं सदी में भी लोगों के मन में अंधविश्वास कायम है. इसकी एक बानगी नीमतल्ला श्मशान घाट पर देखने को मिल रही है. यहां सड़क पर डाला लगा कर कर बैठने वाले कुछ लोग दावा करते हैं कि उनके पास एक ऐसा मैजिकल धुआं है, जिससे दांत के कीड़े निकल जाते हैं, जबकि मेडिकल साइंस कहता है कि दांत में कीड़े होते ही नहीं हैं, लेकिन लोग मेडिकल साइंस के तथ्यों को दरकिनार कर इन ठगों के पास इलाज कराने पहुंच रहे हैं.
नार्थ कोलकाता के नीमतल्ला शमशान घाट के अहिरी टोला घाट के निकट खुले आसमान के नीचे डेंटल क्लिनिक चलाया जाता है या यू कहें अंधविश्वास के नाम पर कुछ लोग अपनी रोजी रोटी तलाशते हैं. डेंटल क्लिनिक चलाने वाले ये दांतों के झोला छाप डॉक्टर एक्सट्रेक्टिंग फॉर्सेप्स (दांत उखाड़नेवाला चिमटा), रिट्रैक्टर, आईना जैसी उपकरणो‍ं को रखते हैं.
धुआं से निकलते हैं कीड़े
इलाज के विषय में ज्यादा जानने के लिए शंभु नाथ साव से बात किया. शंभु ने बताया कि वह डॉक्टर नहीं बन सका, लेकिन गत 20 सालों से लोगों के दांतों का इलाज कर रहा है. उसने बताया कि दांत के लिए उपयोग में आने वाले उपकरण वह केवल दिखावे के लिए रखा है, ताकि लोग इलाज के लिए उसके डाला तक पहुंच सके. उसने बताया कि असल में इलाज इन चिकित्सकीय उपकरणों से नहीं, बल्कि मैजिकल धुंआ से किया जाता है. एक विशेष प्रकार के कांटा को सुखा कर उसका चुरन बनाया जाता है. फिर इसे एक चीलम में जला कर कीड़े लगे दांत के नीचे धुंआ किया जाता है.

उनका दावा है कि धुंआ करते ही दांत में लगे कीड़े नीचे गिरने लगते हैं. उस कीड़े को मरीज को भी दिखाया जाता है. कीड़ा निकालने के बाद करीब पांच दिन के भीतर मरीज स्वस्थ हो जाता है. इन पांच दिनों में मरीज को मीठा भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है. शंभु के अनुसार धुंआ से दांत झाड़ने के लिए 30 से 40 रुपये मरीज को खर्च करने पड़ते हैं. वहीं झाड़ने के बाद मरीज को अलग से दवा के लिए 40 रुपये खर्च करने पड़ते हैं. शंभु का दावा है कि आयुर्वेदिक दवा मरीज को दी जाती है. उसने कहा कि दांत दर्द के लिए झाड़ फूंक किया जाता है.

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