बीरभूम गैंगरेप : सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में युवा आदिवासी लड़की से 13 ग्रामीणों द्वारा सामूहिक बलात्कार किये जाने की वारदात में पुलिस की कार्रवाई के बारे में राज्य के मुख्य सचिव को रिपोर्ट पेश करने का आज निर्देश दिया. प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम ने बीरभूम के जिला न्यायाधीश की रिपोर्ट […]
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में युवा आदिवासी लड़की से 13 ग्रामीणों द्वारा सामूहिक बलात्कार किये जाने की वारदात में पुलिस की कार्रवाई के बारे में राज्य के मुख्य सचिव को रिपोर्ट पेश करने का आज निर्देश दिया.
प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम ने बीरभूम के जिला न्यायाधीश की रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कहा कि इसमें पुलिस की कार्रवाई का कोई जिक्र नहीं है. न्यायाधीशों ने मुख्य सचिव को इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
न्यायालय ने 24 जनवरी को इस घटना पर स्वत: ही संज्ञान लिया था और जिला न्यायाधीश को घटनास्थल का दौरा करके रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था.
आरोप है कि गांव की पंचायत ने कथित रुप से अपने समुदाय से बाहर के व्यक्ति से प्रेम करने वाली 20 वर्षीय युवती से बलात्कार का आदेश दिया था.
पीडि़त युवती और उसके परिवार के सदस्यों ने पुलिस में दर्ज करायी शिकायत में कहा है कि उसका यौन उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति उसके पिता की उम्र के थे.
इस वारदात के सिलसिले में गांव के मुखिया सहित सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. कथित बलात्कार की वारदात गांव के मुखिया के घर में हुई थी.
कोर्ट के आदेश की प्रति मिली
कोर्ट के आदेश की प्रति राज्य मुख्यालय से होकर बीरभूम के जिलाशासक जगदीश प्रसाद मीणा के कार्यालय को प्राप्त हो गया है. जिलाशासक को पूर्ण पारदर्शिता बरतते हुए जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है. कोर्ट 31 जनवरी को इस रिपोर्ट की सुनवाई करेगी. यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी हुई, तो अदालत मामले की जांच सीबीआइ को भी सौंप सकता है. बीरभूम जिला कोर्ट के जिला जज को भी घटनास्थल पर जाकर जांच करने को कहा गया है. सहायक सरकारी अभियोजक फिरोज पाल ने कहा कि पुलिस ने उनकी हिरासत की मांग की थी, क्योंकि जिस रस्सी से युवती और उसके प्रेमी को पेड़ से बांधकर पीटा गया था, वह रस्सी और 21 जनवरी को घटना के वक्त उनके पहने हुए कपड़े नहीं मिले हैं. पाल ने कहा कि अन्य सबूत जुटाने के लिए भी रिमांड की मांग की गयी है. 13 आरोपियों में एक गैर-आदिवासी शख्स देवराज मंडल भी है. मामले में जब लड़की ने 50,000 रुपये का जुर्माना अदा करने में असमर्थता जतायी, तो एक खाप पंचायत ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म का आदेश दे दिया था.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 13 आरोपियों की पुलिस हिरासत की मांग नहीं किये जाने पर कल बीरभूम के पुलिस अधीक्षक सी सुधाकर को हटा दिया था. पुलिस ने नये सिरे से मामले में कार्रवाई शुरू की है.
क्या है घटना : 20 वर्षीय युवती से सामूहिक दुष्कर्म की घटना लाभपुर गांव में आयोजित पंचायत में ग्राम प्रधान के कथित आदेश पर हुई. पंचायत ने दूसरी बिरादरी के युवक से उसके प्रेम संबंधों के दंडस्वरूप यह कथित फरमान सुनाया. ‘सालिशी सभा’ (पंचायत) के बाद 21 जनवरी को लड़की से 13 लोगों ने दुष्कर्म किया. मामले में ग्राम प्रधान (जिसे क्षेत्र में ‘मोरोल’ के नाम से जाना जाता है) सहित सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. दुष्कर्म कथित तौर पर मोरोल के घर में हुआ.
जुर्माना न चुकाने की सजा
यह आदिवासी युवती सूरी के एक अस्पताल में है. पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों ने पुलिस को दी अपनी तहरीर में कहा कि बर्बरता करनेवालों में उसके पिता जितनी उम्र के भी लोग थे. पीड़िता और उसके प्रेमी को पकड़ लिया गया. उन्हें एक पेड़ से बांधकर मारा-पीटा गया. इसके बाद उनसे 50 हजार रुपये का जुर्माना भरने को कहा गया. जुर्माना भरने में पीड़िता के असमर्थता जताने पर उससे सामूहिक दुष्कर्म किया गया.
सीबीआइ जांच की मांग
स्थानीय माकपा सांसद डॉ रामचंद्र डोम पीड़िता के परिजनों से मिले. पीड़िता के स्वास्थ्य संबंधित जानकारी ली. उन्होंने कहा कि इस तरह की शर्मनाक घटना दूसरी और कुछ नहीं हो सकती. उन्होंने घटना के लि राज्य सरकार को दोषी ठहराया. उन्होंने सीबीआइ से पूरे मामले की जांच कराने को कहा. उन्होंने लाभपुर थाना के चौहद्दी गांव में जाकर घटनास्थल का भी मुआयना किया.
डीएम व चेयरमैन पीड़िता से मिले
जिलाशासक श्री मीणा तथा राज्य नारी व शिशु विभाग के चेयरमैन चित्रलेखा मुखर्जी शुक्रवार की सुबह सूरी सदर अस्पताल पहुंचे. दोनों ने पीड़िता की मां से उसके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की. चेयरमैन ने कहा कि पीड़िता की हालत में सुधार आया है. पीड़िता के परिजन चाहेंगे, तो उन्हें पूरी सुरक्षा में गांव भेजा जायेगा.
रायपाड़ा दुष्कर्म पीड़ित परिवार लापता बिहार जाने की पुलिस ने जतायी संभावना
आसनसोल: आसनसोल नॉर्थ थाना अंतर्गत काख्या रायपाड़ा में नवादा (बिहार) निवासी ताड़ी विक्रेता की आठ वर्षीया बेटी के साथ हुए दुष्कर्म के बाद से पिता व पीड़िता दोनों लापता हैं. प्रतिवादी फोरम से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारियों की मदद से उन्हें गायब किया गया है. इससे इस मामले की जांच प्रभावित होगी. वहीं, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल) सुरेश कुमार चडिवे ने कहा कि संभवत: परिवार बिहार लौट गया है.
इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं है. फोरम के नेता डॉ अरुण पांडेय, पार्षद विनोद सिंह, नंदबिहारी यादव व प्रताप सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि रायपाड़ा में दुष्कर्म की शिकार हुई बच्ची के पिता बिहार के निवासी हैं और यहां रोजी-रोटी कमाने आये थे. पीड़ित परिवार को सहायता देने के लिए वह शुक्रवार को रायपाड़ा गये थे. वहां पीड़िता के पिता की झोपड़ी खाली थी.स्थानीय निवासियों ने बताया कि घटना के दो दिन बाद से ही पिता व पुत्री दोनों गायब हैं. उनके बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है. इसके बाद नेताओं की टीम आसनसोल नॉर्थ थाना पहुंची. इस संबंध में पुलिस अधिकारियों से भी जानकारी ली गयी, लेकिन उन्होंने भी कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया.
नियमानुसार जब तक मामले में आरोप पत्र दाखिल नहीं हो जाता, पीड़िता व शिकायतकत्र्ता का रहना आवश्यक माना जाता है. इस मामले में ऐसा नहीं होना पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि हिंदीभाषी के प्रति पुलिस व सरकार का रवैया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण रहा है. इसके पहले, बर्नपुर में सात वर्षीया स्कूली छात्र के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गयी. मध्यमग्राम में पीड़िता के शव के साथ परिजनों को बिहार भेजे जाने की धमकी दी गयी. रायपाड़ा में परिवार ही गायब हो गया. इसके बाद भी तृणमूल के किसी भी हिंदी भाषी नेता ने इन घटनाओं की कोई निंदा नहीं की और न ही विरोध जताया. उन्होंने कहा कि रायपाड़ा में फोरम की ओर से प्रतिवाद सभा आयोजित की जायेगी. इसके बाद आगे की रणनीति तय की जायेगी.
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल) श्री चडिवे ने कहा कि उक्त परिवार के बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं है. परिवार बिहार से जुड़ा है. संभवत: घटना के बाद बिहार लौट गया होगा. इस मामले में पुलिस की कोई भूमिका नहीं है. इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. आरोप साबित होने पर उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जायेगी.
आरोपियों को 13 दिनों की पुलिस हिरासत
इधर, शुक्रवार को पुलिस ने गिरफ्तार सभी 13 आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया. गौरतलब है कि रिमांड पर नहीं लेने पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरक्षी अधीक्षक सी सुधाकर का तत्काल तबादला कर दिया था. आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की जायेगी. इससे अपराध का पूरा ब्योरा प्राप्त होगा व आरोप पत्र दाखिल करने में मदद मिलेगी. आरोपियों को क ड़ी सजा दिलाने में मदद मिलेगी. लोक अभियोजक रंजीत कुमार ने बताया कि बोलपुर कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पीयूष घोष की अदालत में जिला पुलिस ने पुलिस रिमांड का आवेदन दिया. मजिस्ट्रेट ने पूछा कि पुलिस ने गुरुवार को रिमांड की मांग क्यों नहीं की. पुलिस का तर्क था कि पीड़िता की चिकित्सा को लेकर हुई व्यस्तता के कारण आवेदन नहीं दिया गया. इसके लिए दंडाधिकारी के समक्ष खेद भी जताया गया. अभियुक्तों के वकील दीपंकर ने दंडाधिकारी से आग्रह किया कि उनके मुवक्किलों पर शारीरिक अत्याचार न हो. आरोपियों की अगली पेशी पांच फरवरी को होगी.
उप संभागीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीयूष घोष ने मोरेल (समुदाय के प्रमुख) बलाई मुरदी समेत 13 आरोपियों को 13 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया जिसकी पुलिस ने मांग की थी.
उत्तर दिनाजपुर में भी गैंग रेप
बीरभूम के लाभपुर के बाद अब उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया में भी सामूहिक दुष्कर्म की घटना घटी. गोदाशिमूल गांव की रहनेवाली एक युवती ने आरोप लगाया कि गुरुवार की रात को इलाके के एक कार्यक्रम से वह लौट रही थी. सड़क से सटे एक मैदान में छह लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. युवती ने घटना की लिखित शिकायत दर्ज करायी है. पुलिस ने आरोप में कालू मोहम्मद नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया है. युवती की मेडिकल जांच भी की गयी.
पुलिस विभाग छोड़ें ममता : मानस
कोलकाता: वीरभूम में आदिवासी युवती से सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठाये गये हैं. शुक्रवार को पूर्व मंत्री व प्रदेश कांग्रेस के आला नेता डॉ मानस भुइंया ने कहा कि वीरभूम की घटना ने बर्बरता की सारी सीमाएं लांघ दी. कथित तौर पर अन्य समुदाय के युवक से शादी करने को लेकर युवती को एक दिन तक बांधे रखा गया. उसके बाद जुर्माना मांगा गया. जुर्माना की राशि नहीं देने पर उससे सामूहिक दुष्कर्म की सजा सुनायी जाती है. उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी पुलिस को भनक क्यों नहीं लगी? आरोप के मुताबिक जनता के साथ होने का दावा करने वाले तृणमूल नेता कहां गये? राज्य में दुष्कर्म की घटनाएं रोज ही सामने आ रही हैं. ऐसे में पुलिस विभाग को ममता बनर्जी को छोड़ देना चाहिए.
पुलिस पर हावी तृणमूल
प्रदेश कांग्रेस के आला नेताओं ने आरोप लगाया कि तृणमूल के नेता व कार्यकर्ता पुलिस पर हावी हो रहे हैं. वीरभूम में जनसभा के दौरान पुलिस पर हमले की बात कही जाती है इसके बावजूद किसी भी प्रकार का ठोस कदम नहीं उठाया जाता. कांग्रेसी नेता मानस भुइंया ने मांग की है कि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी पार्टी में अनुशासन लायें. साथ ही दुष्कर्म व महिलाओं पर होने अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाएं.
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