तृणमूल विधायक स्वपन कांति घोष पार्टी से निलंबित
-अजय विद्यार्थी-कोलकाताः विधानसभा में पार्टी द्वारा फंड में गड़बड़ी का आरोप लगाने और विधानसभा के गेट पर विरोध करने वाले बीरभूम जिले के सूरी से तृणमूल कांग्रेस के विधायक स्वपन कांति घोष को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है. बुधवार की सुबह से दोपहर तक विधानसभा में चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस […]
-अजय विद्यार्थी-
कोलकाताः विधानसभा में पार्टी द्वारा फंड में गड़बड़ी का आरोप लगाने और विधानसभा के गेट पर विरोध करने वाले बीरभूम जिले के सूरी से तृणमूल कांग्रेस के विधायक स्वपन कांति घोष को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है. बुधवार की सुबह से दोपहर तक विधानसभा में चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी की अनुशासन रक्षा कमेटी ने एकमत से पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण स्वपन कांति घोष को निलंबित करने का निर्णय किया है.
इसके साथ ही उनके खिलाफ जांच लंबित रखा गया है. उक्त विधायक ने दूसरे राजनीतिक दल की सह व राजनीतिक साजिश के तहत अपनी पार्टी के खिलाफ ही आरोप लगाये हैं, जबकि श्री घोष के खिलाफ ही कई आरोप हैं, जिसकी पार्टी जांच करेगी. उन लोगों ने उनके खिलाफ जांच शुरू किया है.
बुधवार की सुबह विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद बीरभूम जिले के सूरी के विधायक विधानसभा परिसर पहुंचे. उनके हाथों में तृणमूल शासित सूरी नगरपालिका के चेयरमैन पर फंड पर हेरफेर करने का आरोप लगाते हुए प्लेकार्ड थे तथा कई लीफलेट थे. जिसे अपने ड्राइवर की मदद से वितरित करने की कोशिश किया, लेकिन मार्शल ने लीफलेट वितरित करने से रोक दिया. बाद में श्री घोष विधानसभा के गेट पर प्लेकार्ड लेकर धरना पर बैठ गये.
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा के अध्यक्ष बिमान बनर्जी की सह पर मार्शल ने उनके ड्राइवर के साथ धक्का मुक्की की, जो उनका अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि सुरी नगरपालिका के चेयरमैन ने केंद्रीय योजना की 10.36 करोड़ रुपये में घपला किया है. उन्होंने दावा किया कि जेएनएनयूएमआर परियोजना के तहत नगरपालिका ने पेय जल परियोजना के बाबत 5.28 करोड़ रुपये तथा स्लम विकास के बाबत 5.28 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दे पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने शहरी विकास मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम को पांच बार तथा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र भी लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने श्री हकीम से मिलने का भी समय मांगा, लेकिन वे उनसे नहीं मिले. वे पिछले ढ़ाई वर्षो से पार्टी में आवाज उठा रहे हैं, लेकिन कोई उनकी आवाज नहीं सुन रहा था. उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में वह केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू से मिलेंगे. उन्होंने कहा कि श्री नायडू ने उन्हें मिलने का समय दिया है. वह उनसे अगले सप्ताह मिलेंगे. यदि समस्या का समाधान नहीं निकला,तो वे उच्च न्यायालय में मुकदमा करेंगे.
विधानसभा के गेट पर विरोध प्रदर्शन कर रहे श्री घोष से मिलने व उनसे सहमति जनाने विरोधी दल के नेता डॉ. सूर्यकांत मिश्र, कांग्रेस दल के नेता मोहम्मद सोहराब व भाजपा विधायक शमिक भट्टाचार्य पहुंचे और उनके पक्ष का समर्थन करते हुए सरकार पर भ्रष्टाचार का प्रश्रय देने का आरोप लगाया. बाद में श्री घोष से मिलने शहरी विकास मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम भी पहुंचे और श्री घोष को मनाने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहें. अतत: विधानसभा में श्री चटर्जी के नेतृत्व में अनुशासन रक्षा कमेटी की बैठक हुई और बैठक के बाद श्री घोष को निलंबित करने की घोषणा की गयी.
अपने निलंबन पर प्रतिक्रिया जताते हुए श्री घोष ने कहा कि यदि उन्हें पार्टी से बहिष्कृत कर दिया जाता तो ज्यादा खुशी होती. यह पूछे जाने पर क्या वह अन्य पार्टी में शामिल हो रहे हैं, श्री घोष ने कोई सटीक जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य का निर्णय भविष्य में ही होगा.
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