विधानसभा में पारित हुआ जमीन सुधार संशोधन विधेयक उद्योगपतियों को राहत

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कोलकाता: टाउनशिप, पोल्ट्री फार्म, डेयरी, फिशरीज, ट्रांसपोर्टेशन, टर्मिनल, लॉजिस्टिक हब, इंडस्ट्रियल पार्क, इंडस्ट्रियल हब, इंडस्ट्रियल इस्टेट, फाइनेंशियल हब, वेयर हाउसिंग, चाय बागान, शैक्षणिक व चिकित्सा संस्थान, तेल व गैस उत्पाद पाइप्ड ट्रांसपोर्टेशन, खान आदि क्षेत्र में जमीन की सीलिंग की ऊपरी सीमा बढ़ाने को लेकर विधानसभा में जमीन सुधार संशोधन (विधेयक), 2014 बुधवार को ध्वनिमत […]

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कोलकाता: टाउनशिप, पोल्ट्री फार्म, डेयरी, फिशरीज, ट्रांसपोर्टेशन, टर्मिनल, लॉजिस्टिक हब, इंडस्ट्रियल पार्क, इंडस्ट्रियल हब, इंडस्ट्रियल इस्टेट, फाइनेंशियल हब, वेयर हाउसिंग, चाय बागान, शैक्षणिक व चिकित्सा संस्थान, तेल व गैस उत्पाद पाइप्ड ट्रांसपोर्टेशन, खान आदि क्षेत्र में जमीन की सीलिंग की ऊपरी सीमा बढ़ाने को लेकर विधानसभा में जमीन सुधार संशोधन (विधेयक), 2014 बुधवार को ध्वनिमत से पारित हो गया.

हालांकि वाम मोरचा व एसयूसीआइ के विधायक ने इस विधेयक का विरोध किया. शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति में एक जवाब में यह जानकारी दी. भूमि एवं भूमि सुधार विभाग सुश्री बनर्जी के पास है.

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में सीलिंग की ऊपरी सीमा 24.7 एकड़ है. इससे अधिक जमीन नहीं रखी जा सकती है, लेकिन इस संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद इन क्षेत्रों में सीलिंग की सीमा बढ़ गयी है. संशोधन विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि राज्य में निवेश की अपार संभावनाएं हैं. निवेश भी हो रहा है. इससे पहले सीलिंग की अधिकतम सीमा में संशोधन किया गया था. अब इसकी सीमा और बढ़ा दी गयी है. पहले केवल तीन वर्ष तक ही परियोजना पूरी करने का समय था, लेकिन अब इसकी सीमा पांच वर्ष हो गयी है. उन्होंने कहा कि यह ऊपरी सीमा सभी वर्गो के लिए लागू नहीं होगी, बल्कि मामलों पर निर्भर करेगा. इस संबंध में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिसमूह की बैठक में निर्णय किया जायेगा. फिर छूट दी जायेगी.

विपक्ष के नेता डॉ सूर्यकांत मिश्र ने कहा कि इससे प्रमोटर राज को बढ़ावा मिलेगा. एसयूसीआइ के विधायक डॉ तरुण नस्कर ने कहा कि राज्य में निवेश नहीं हो रहा. अब केवल कृषि क्षेत्र के लिए ही सीलिंग रह गयी है.

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