सारधा चिटफंड घोटाला, ममता-मुकुल का नाम नहीं लूंगा : रजत

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कोलकाता: सारधा चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार पूर्व डीजीपी रजत मजूमदार ने गुरुवार को अपने बयान से अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए परेशानी खड़ी कर दी. उन्होंने घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ को चुनौती दे दी कि सात दिन क्या 70 दिनों की हिरासत में भी जांच एजेंसी उनसे मुख्यमंत्री […]

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कोलकाता: सारधा चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार पूर्व डीजीपी रजत मजूमदार ने गुरुवार को अपने बयान से अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए परेशानी खड़ी कर दी.

उन्होंने घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ को चुनौती दे दी कि सात दिन क्या 70 दिनों की हिरासत में भी जांच एजेंसी उनसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस महासचिव मुकुल राय के संबंध में कोई बात नहीं उगलवा सकेगी. अलीपुर कोर्ट में मजूमदार ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक मकसद से हिरासत में लिया गया है.

गौरतलब है कि गुरुवार को सीबीआइ ने मजूमदार को अलीपुर कोर्ट में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) हाराधन मुखर्जी के समक्ष पेश किया. जांच एजेंसी का कहना था कि पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रजत मजूमदार सारधा प्रमुख सुदीप्त सेन के साथ चिटफंड घोटाले में सक्रिय रूप से षडयंत्र में शामिल थे.

सीबीआइ ने अदालत से आगे की जांच के लिए मजूमदार की सात दिनों की हिरासत मांगी. सीबीआइ ने कहा कि घोटाले की साजिश का पता लगाने के लिए उनसे (रजत से) पूछताछ की जरूरत है. इस दौरान अदालत में मौजूद सुदीप्त सेन की ओर मुखातिब होकर रजत मजूमदार ने कहा कि उन्होंने (सुदीप्त ने) यह कह कर ठीक नहीं किया कि वह (रजत मजूमदार) उनसे (सुदीप्त से) पैसे लेकर ममता और मुकुल तक पहुंचाते थे. इसी दौरान मजूमदार ने अदालत से कहा कि वह कुछ कहना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि सीबीआइ ने उन्हें गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार किया है.

उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था. उन्हें फोन कर बुलाया गया. उसके बाद मामले में गिरफ्तार सांसद कुणाल घोष से उनका सामना कराया गया. पूर्व डीजीपी ने कहा कि सीबीआइ की पूछताछ के दौरान घोष ने कहा कि सुदीप्त सेन ने उन्हें (कुणाल को) बताया है कि वह (रजत मजूमदार) सेन से पैसा लेकर ममता व मुकुल तक पहुंचाते थे. उन्होंने सीबीआइ को चुनौती देते हुए कहा कि सात दिन या 70 दिनों की हिरासत में भी उनसे यह नहीं कहलवा पायेगी कि वह ममता व मुकुल को पैसा पहुंचाते थे. मजूमदार ने कहा कि उन्होंने 13 माह तक सारधा कंपनी के सलाहकार के रूप में काम किया था. सारधा से मिलने वाले वेतन का सर्विस टैक्स आदि चुकाया है. सुनवाई के बाद कोर्ट ने रजत मजूमदार को 16 सितंबर तक सीबीआइ हिरासत में भेजने का निर्देश दिया. उधर, न्यू टाउन थाने से सीजीओ कॉम्पेक्स स्थित सीबीआइ दफ्तर ले जाते समय मजूमदार ने कहा कि अदालत में उन्होंने जो कुछ कहा है वह जांच के हित में है.

समीर चक्रवर्ती से फिर पूछताछ

सीबीआइ ने विधाननगर नगरपालिका की चेयरमैन कृष्णा चक्रवर्ती के पति समीर चक्रवर्ती से गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी पूछताछ की. बुधवार को उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ की गयी थी.

सीबीआइ के खिलाफ धरना

करोड़ों रुपये के सारधा घोटाले की जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं ने सॉल्टलेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित सीबीआइ कार्यालय के बाहर गुरुवार को धरना दिया. सारधा घोटाले की जांच सीबीआइ कर रही है. राज्य की कानून मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं ने सीबीआइ के कार्यालय के समक्ष हाथों में तख्तियां ले कर न केवल धरना दिया, बल्कि उसके विरोध में नारे भी लगाये. चंद्रिमा भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा : सीबीआइ केंद्र की नरेंद्र मोदी नीत भाजपा सरकार के प्रभाव में राजनीति से प्रेरित हो कर जानबूझकर जांच की दिशा बदलने का प्रयास कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआइ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है. इस मामले की जिस तरह जांच की जा रही है वह कानूनी तौर पर उचित नहीं है.

निकाला जुलूस

चिटफंड कंपनियों की धोखाधड़ी के शिकार निवेशकों ने गुरुवार को जुलूस निकाला. जुलूस कॉलेज स्क्वायर से शुरू होकर रानी रासमणि रोड पर समाप्त हुआ. इसमें रोजवैली, सारधा, आइकोर सहित तमाम चिटफंड कंपनियों के निवेशक शामिल हुए. उन्होंने अपनी मेहनत की कमायी वापस दिलाने की मांग की.

मेडिकल बोर्ड ने मजूमदार को स्वस्थ पाया

सीबीआइ ने मंगलवार को सारधा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में पूर्व डीजीपी मजूमदार को गिरफ्तार किया था. अपनी गिरफ्तारी के तत्काल बाद उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की. उन्हें एनआरएस मेडिकल कॉलेज में भरती कराया गया. उनकी चिकित्सा के लिए आठ सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था. विभिन्न जांच के बाद मेडिकल बोर्ड ने उन्हें पूरी तरह से स्वस्थ करार दिया. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सीबीआइ ने उन्हें कोर्ट में पेश किया.

पूर्व डीजीपी से पल्ला झाड़ने की कसरत

कोलकाता. सियासी हलके में चर्चा है कि सारधा मामले में पूर्व डीजीपी रजत मजूमदार की गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस उनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है. समझा जा रहा है कि पार्टी की इस कोशिश से नाराज मजूमदार ने अदालत में विवादित बयान देकर अपनी खीझ निकाली है. जानकारी के अनुसार, तृणमूल में मजूमदार को खास मुकाम हासिल था. पंचायत चुनाव में उन्हें बीरभूम जिले की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने हालांकि विपक्षी दलों के इन आरोपों को गुरुवार को खारिज करने का प्रयास किया कि तृणमूल के कई नेता सारधा चिटफंड घोटाले में शामिल हैं.

तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा : विपक्षी दल साथ मिलकर मुख्य गुनहगारों को परदे के पीछे रखने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं. उनहोंने कहा: ममता बनर्जी ही थीं जिन्होंने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कराया था और उनकी सरकार निवेशकों को उनका पैसा लौटाने का प्रयास कर रही है. यह पूछे जाने पर कि सारधा समूह की ओर से वित्तपोषित 50 एंबुलेंस सरकार ने क्यों लीं, उन्होंने कहा : जब एंबुलेंस लिये गये थे तब घोटाला सामने नहीं आया था. चटर्जी ने पार्टी से निलंबित राज्यसभा सदस्य कुणाल घोष की ओर इशारा करते हुए कहा : हम किसी व्यक्ति को एक पत्रकार के तौर पर जानते थे लेकिन यदि उसने बाद में कुछ और किया जिसके चलते वह अब जेल में है तो कोई क्या कर सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार विपक्ष की ओर से झूठी अफवाह फैलाने और झूठे आरोपों के बावजूद अविचलित है. उन्होंने कहा : भाजपा का बंगाल में कोई भविष्य नहीं है. जो लोग उन्हें यहां लाने का प्रयास कर रहे हैं उनका ना कोई अतीत है और ना ही कोई भविष्य.

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