ओड़िशा-झारखंड भेजा जायेगा आलू
कोलकाता: आलू व्यवसायियों के आंदोलन के चलते आलू के मुद्दे पर राज्य सरकार के रुख में नरमी आयी है. सरकार ने आलू राज्य से बाहर भेजने पर लगी रोक में आंशिक छूट दी है. रविवार से एक सप्ताह के अंदर ओड़िशा व झारखंड को 5000 मीट्रिक टन आलू भेजा जायेगा. बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी […]
कोलकाता: आलू व्यवसायियों के आंदोलन के चलते आलू के मुद्दे पर राज्य सरकार के रुख में नरमी आयी है. सरकार ने आलू राज्य से बाहर भेजने पर लगी रोक में आंशिक छूट दी है. रविवार से एक सप्ताह के अंदर ओड़िशा व झारखंड को 5000 मीट्रिक टन आलू भेजा जायेगा. बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुई टास्क फोर्स की बैठक में यह फैसला लिया गया.
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वह नहीं चाहती हैं कि कोई भी आलू से वंचित रहे, लेकिन जिस प्रकार से आलू की कीमत राज्य में बढ़ी थी, उससे कड़े कदम उठाने जरूरी थे.
कृषि मंत्री पुर्णेदू बसु ने बताया कि 17 से 23 अगस्त के बीच राज्य से 5000 मीट्रिक टन आलू ओड़िशा व झारखंड भेजने की मंजूरी दी गयी है. 4500 मीट्रिक टन आलू पश्चिम मेदिनीपुर के दांतन सीमा से ओड़िशा भेजा जायेगा और 500 मीट्रिक टन आलू आसनसोल से झारखंड भेजा जायेगा. ओड़िशा राज्य बाढ़ की चपेट में है, इसलिए वहां अधिक मात्र में आलू भेजा जा रहा है. उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न कोल्ड स्टोरेज में अभी भी करीब 30 लाख मीट्रिक टन आलू का स्टॉक है. बैठक के बाद फोरम फॉर ट्रेडर्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ वेस्ट बंगाल के महासचिव रवींद्र नाथ कोले ने बताया कि 14 रुपये प्रति किलो आलू बेचने के लिए मुख्यमंत्री ने व्यवसायी समितियों को भी पहल करने का आह्वान किया है. उन्होंने कहा कि जहां थोक बाजार में आलू की कीमत 12 रुपये प्रति किलो है तो खुदरा बाजार में इसकी कीमत अधिक क्यों है.
इस ओर मुख्यमंत्री ने व्यवसायी समितियों को ध्यान देने की बात कही. 25 अगस्त के बाद आलू बाहर भेजा जायेगा कि नहीं, इस बारे में सीएम ने फिलहाल कुछ नहीं कहा है. राज्य सरकार के फैसले से व्यवसायी समितियों ने राहत की सांस ली है. पश्चिम बंग प्रगतिशील आलू व्यवसायी समिति के महासचिव बरेन मंडल ने बताया कि आलू व्यवसायियों के प्रतिनिधि गुरुवार को मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार प्रदीप मजूमदार से मिलेंगे और उनके समक्ष अपनी समस्याओं को रखेंगे. पिछले कुछ दिनों में व्यवसायियों को जो नुकसान हुआ है, इसके लिए भी क्षतिपूर्ति की मांग की जायेगी. 19 से 21 अगस्त तक व्यवसायियों द्वारा बुलाये गये बंद के संबंध में उन्होंने कहा कि गुरुवार को वह पहले कृषि सलाहकार के साथ बैठक करेंगे और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जायेगा. उधर, बर्दवान के बेचारहाट इलाके में प्रगतिशील आलू व्यवसायी समिति की बैठक हुई जिसमें में दूसरे राज्यों को आलू भेजने की अनुमति देने, व्यवसायियों को सरकारी सहायता देने तथा 14 रुपये प्रति किलो आलू बेचने के निर्णय को वापस लेने की मांग राज्य सरकार से की गयी. गौरतलब है कि राज्य से आलू बाहर भेजने के विरोध में उत्तर बंगाल के सात जिलों के आलू व्यवसायियों ने बुधवार को एक दिनी हड़ताल का एलान किया था.
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