इंसेफलाइटिस पर राज्य सरकार का कड़ा रुख, नौ चिकित्सकों का तबादला

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सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में इंसेफलाइटिस की बीमारी के गंभीर रूप धारण करने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों पर राज्य सरकार का कोप जारी है. खासकर उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और अन्य अधिकारी राज्य सरकार के निशाने पर हैं. जब से इस बीमारी ने उत्तर बंगाल में पांव पसारा है तभी से […]

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सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में इंसेफलाइटिस की बीमारी के गंभीर रूप धारण करने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों पर राज्य सरकार का कोप जारी है. खासकर उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और अन्य अधिकारी राज्य सरकार के निशाने पर हैं.

जब से इस बीमारी ने उत्तर बंगाल में पांव पसारा है तभी से ही उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इस बीमारी से रोगियों की मौत जारी है. तमाम प्रयासों के बावजूद इस पर काबू पाना संभव नहीं हो सका है. इसी वजह से एक पर एक अधिकारियों पर गाज गिर रही है. सबसे पहले दाजिर्लिंग तथा जलपाईगुड़ी जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी एवं उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के अस्पताल अधीक्षक को निलंबित किया गया. इसके कुछ ही दिनों बाद उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एवं एक अन्य अधिकारी की बलि ले ली गयी. मामला यही पर शांत नहीं हुआ. प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के 9 चिकित्सकों का रातों-रात तबादला कर दिया गया है. इसमें वामपंथी चिकित्सक संगठन के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अध्यक्ष डॉक्टर शंकर कविराज भी शामिल हैं.

इन तबादलों का निर्देश राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया है. इस निर्देश के शनिवार की शाम को मेडिकल कॉलेज में पहुंचने के बाद ही डॉक्टरों के बीच हड़कंप मच गया. सिर्फ इतना ही नहीं, राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज परिसर में जुनियर डॉक्टरों तथा छात्र-छात्रओं द्वारा किये जाने वाले किसी भी आंदोलन पर रोक लगा दी है. यहां उल्लेखनीय है कि एक पर एक स्वास्थ्य अधिकारियों के निलंबन के बाद यहां के डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच खौफ का माहौल है. इस बीच, हाल ही में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के निलंबन के बाद छात्र-छात्रओं एवं जूनियर डॉक्टरों का गुस्सा फूट पड़ा था. जूनियर डॉक्टरों ने पिछले दिनों हड़ताल भी की थी और उसके बाद से उनका विरोध प्रदर्शन राज्य सरकार के खिलाफ जारी है. जूनियर डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. संभवत: इसी वजह से अस्पताल परिसर में किसी भी प्रकार के आंदोलन पर रोक लगा दी गयी है. डॉक्टर शंकर कविराज शुरू से ही राज्य सरकार के निशाने पर थे. वह डॉक्टरों तथा स्वास्थ्य अधिकारियों के निलंबन को लेकर राज्य सरकार की आलोचना में लगे हुए थे. सिर्फ वही नहीं, जिन 9 चिकित्सकों का तबादला हुआ है उनमें से अधिकांश ही वामपंथी चिकित्सक संगठन से जुड़े हुए थे. इसलिए इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है.

राज्य सरकार ने जिन चिकित्सकों का तबादला किया है उनमें डॉक्टर शंकर कविराज के अलावा डॉक्टर पार्थ सारथी घोष एवं डॉक्टर भाष्कर राय का नाम भी शामिल है. यहां उल्लेखनीय है कि पार्थ सारथी घोष वामपंथी चिकित्सक संगठन के महासचिव हैं. उन्हें एसएसकेएम अस्पताल भेज दिया गया है. इसी तरह से वामपंथी चिकित्सक संगठन के संयुक्त सचिव डॉक्टर भाष्कर राय आरजीकर अस्पताल भेजे गये हैं. इस संबंध में डॉक्टर शंकर कविराज का कहना है कि राज्य सरकार ने वामपंथी चिकित्सक संगठन को कमजोर करने के लिए ही इस प्रकार का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भले ही इस तबादले को रूटीन तबादले का नाम दे, लेकिन वास्तविक स्थिति ऐसी नहीं है. कई डॉक्टर ऐसे हैं जिनका एक से डेढ़ वर्ष के अंदर ही तबादला कर दिया गया है. दूसरी तरफ पूर्व मंत्री तथा माकपा नेता अशोक भट्टाचार्य ने भी राज्य सरकार के इस कदम की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि इंसेफलाइटिस की बीमारी से मुकाबला करने में राज्य सरकार पूरी तरह से विफल रही है. राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी विफलता को छिपाने के लिए एक-एक कर स्वास्थ्य अधिकारियों का अपना निशाना बना रही है.

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