मुआवजे को लेकर मारा-मारी

Updated:
विज्ञापन

सफेद हाथी साबित हो रहा है सूअर पक अभियान सिलीगुडी : दिमागी बुखार इंसेफलाइटिस की बीमारी फैलने के बाद प्रभावित क्षेत्रों से सुअरों को हटाने का काम जारी है. सुअरों को पकड़ने के लिए प्राणी संपदा विभाग ने सिलीगुडी नगर निगम के सहयोग से विभिन्न स्थानों पर सुअर पक अभियान की शुरूआत की है. प्राप्त […]

विज्ञापन

सफेद हाथी साबित हो रहा है सूअर पक अभियान

सिलीगुडी : दिमागी बुखार इंसेफलाइटिस की बीमारी फैलने के बाद प्रभावित क्षेत्रों से सुअरों को हटाने का काम जारी है. सुअरों को पकड़ने के लिए प्राणी संपदा विभाग ने सिलीगुडी नगर निगम के सहयोग से विभिन्न स्थानों पर सुअर पक अभियान की शुरूआत की है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार इंसेफलाइटिस की बीमारी के फैलने के लिए मच्छरों तथा सुअरों को जिम्मेदार ठहराया गया है. उसके बाद से ही सिलीगुडी तथा इसके आस-पास के इलाकों में मच्छरों को मारने के साथ-साथ सूअरों को पकड़ने का काम बडी तेजी से चल रहा है.

प्राणी संपदा विभाग ने जलपाईगुडी जिले के मयनागुडी के रामसाई में सुअरों के लिए पुनर्वास केन्द्र बनाया है, जहां विभिन्न इलाकों से सुअरों को पकड़ कर उस पुनर्वास केन्द्र में भेजने का काम जारी है.

प्राणी संपदा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार अभी सुअरों को पकड़ने का काम उन्हीं इलाकों में हो रहा है जहां इस बीमारी के मामले पाये गये हैं. सुअरों को पकड़ने का निर्देश मिलने के बाद से ही सबसे पहले सुअरों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया.

सिलीगुडी तथा इसके आस-पास के इलाकों में इंसेफ्लाइटिस प्रभावित इलाके में 122 सुअरों की सूची बनाई गई. इस सूची में सुअरों के मालिक के नाम के साथ सुअरों की संख्या शामिल की गई. सुअरों को पकड़ने के काम में इतनी कागजी कार्रवाई करनी पड़ रही है कि प्राणी संपदा विभाग के कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं.

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 122 सुअरों को पकड़ने में अब तक पांच लाख रुपये से भी अधिक खर्च हो गये हैं. इनमें सुअर पालकों को मुआवजा देने से लेकर सिलीगुडी से रामसाई तक इनको पहुंचाने का खर्च भी शामिल है.

विभागीय सूत्रों ने आगे बताया कि सुअरों को पकड़ने के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ रहा है. कागजी कार्रवाई किये जाने के साथ ही सुअरों को पकड़ने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकार्डिग भी करायी जा रही है. इसके अलावा इस काम में कई कर्मचारी और अधिकारी लगे हुए हैं.

आधिकारिक सूत्रों ने आगे बताया कि सुअरों को पकड़ने के काम में स्थानीय लोगों को भी लगाया गया है. इस काम के लिए प्राणी संपदा विभाग ने एक अलग सेल का ही गठन कर दिया है. इसके अलावा सुअरों को पकड़ने के लिए कुछ कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित भी किया गया है. इस संबंध में एक विभागीय अधिकारी ने बताया है कि सुअरों को पकड़ने का काम इतना आसान नहीं है.

पहले तो इस काम में काफी परेशानी होगी और कई कर्मचारी इस चक्कर में घायल भी हो गये. बाद में कुछ कर्मचारियों को सुअरों को पकड़ने का प्रशिक्षण दिया गया. उक्त अधिकारी ने आगे बताया कि सुअर पक अभियान अभी थमा नहीं है.

नये स्थानों से इंसेफ्लाइटिस के मामले सामने आने के बाद उन स्थानों पर इस अभियान की शुरूआत की जायेगी. इस बीच, सुअरों के मुआवजे को लेकर मारा-मारी जारी है. स्थानीय मिलन मोड़ इलाके के कुछ सुअर पालकों ने प्राणी संपदा विभाग पर मुआवजे में हेरा-फेरी का आरोप लगाया है.

इन लोगों का कहना था कि सुअरों का वजन कम कर मुआवजे की पेशकश की जा रही है. हालांकि प्राणी संपदा विभाग के अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है. इनका कहना है कि सरकार ने मुआवजे की रकम निर्धारित कर दी है.

सुअर पालकों को सुअर के वजन के हिसाब से मुआवजे दिये जा रहे हैं. प्रति किलो 100 रुपये की दर से मुआवजा देने का प्रावधान है. इसी दर को ध्यान में रखते हुए सुअर पालकों को मुआवजे की रकम दी जा रही है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola