रिजवान मामले में आइपीएस ज्ञानवंत सिंह को क्लीनचिट

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कोलकाता: राज्य सरकार ने आइपीएस अधिकारी ज्ञानवंत सिंह को रिजवान मामले में क्लीनचिट दे दी है. राज्य के गृह विभाग ने ज्ञानवंत सिंह पर लगे सभी आरोप वापस ले लिये हैं. यही नहीं, उन्हें मुर्शिदाबाद रेंज का डीआइजी बनाया गया है. गौरतलब है कि रिजवान मामले में ज्ञानवंत सिंह के खिलाफ विभागीय जांच चल रही […]

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कोलकाता: राज्य सरकार ने आइपीएस अधिकारी ज्ञानवंत सिंह को रिजवान मामले में क्लीनचिट दे दी है. राज्य के गृह विभाग ने ज्ञानवंत सिंह पर लगे सभी आरोप वापस ले लिये हैं.

यही नहीं, उन्हें मुर्शिदाबाद रेंज का डीआइजी बनाया गया है. गौरतलब है कि रिजवान मामले में ज्ञानवंत सिंह के खिलाफ विभागीय जांच चल रही थी. ज्ञात रहे कि कोलकाता पुलिस के तत्कालीन डीसी (हेडक्वार्टर) ज्ञानवंत सिंह रिजवान मामले में चर्चा में आये थे. उन पर रिजवान एवं प्रियंका टोडी की शादी में रोड़ा अटकाने एवं रिजवान को लालबाजार पुलिस मुख्यालय बुला कर कई बार धमकी देने का आरोप लगा था. इस मामले को तब विपक्ष में रही तृणमूल कांग्रेस ने खूब उछाला था.

तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर प्रसून मुखर्जी एवं डीसी (हेटक्र्वाटर) ज्ञानवंत सिंह पर जम कर निशाना साधा था. दो अलग-अलग धर्म के युवाओं की इस दुखद प्रेम कहानी मामले से तृणमूल कांग्रेस को जबरदस्त राजनीतिक फायदा मिला था. मामले के तूल पकड़ने पर तत्कालीन वाममोरचा सरकार ने ज्ञानवंत सिंह समेत कुल पांच पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया था. तब से ही ज्ञानवंत सिंह पुलिस महकमे में खो से गये थे. उनके खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही थी. अब राज्य के गृह विभाग ने ज्ञानवंत सिंह के ऊपर लगे सभी आरोप वापस ले लिये हैं. केवल उन्हें यह चेतावनी दी गयी है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कदम न रखें. कभी माकपा के करीबी रहे ज्ञानवंत सिंह को तत्कालीन वाममोरचा सरकार ने मुर्शिदाबाद जिले में कांग्रेस के दबंग नेता अधीर रंजन चौधरी की बढ़ती ताकत पर लगाम लगाने एवं माकपा के पांव जमाने में मदद के लिए वहां का एसपी बना कर भेजा था. श्री सिंह के समय ही अधीर चौधरी पर हत्या के कई मामले दर्ज हुए थे. लगता है कि वर्तमान तृणमूल सरकार भी उसी रास्ते पर चल रही है. माना जा रहा है कि अधीर चौधरी पर शिकंजा कसने के लिए फिर से ज्ञानवंत सिंह का इस्तेमाल किया जा रहा है.

क्या था रिजवान मामला: रिजवान-उर-रहमान मध्यम वर्गीय परिवार में पले पेशे से कंप्यूटर ग्राफिक्स डिजाइनर था. कोलकाता के एक उद्योगपति की बेटी को वह कंप्यूटर का प्रशिक्षण देता था. इसी दौरान दोनों में मित्रता हो गयी. 18 अगस्त 2007 को दोनों ने गुपचुप कोर्ट मैरिज कर ली. 31 अगस्त को रिजवान अपनी पत्नी को घर ले आया. इधर, बेटी के इस कदम से पिता खासे नाराज हुए. पिता को व्यापार में अपना इमेज खराब होने की चिंता होने लगी. काफी समझाया गया, लेकिन दोनों एक-दूसरे का साथ छोड़ने के लिए राजी नहीं हुए. जिसके बाद एक दिन रिजवान का शव रेलवे लाइन के पास पाया गया. यह 21 सितंबर 2007 की तारीख थी. बताया जाता है कि रसूख का फायदा उठाते हुए रिजवान की प्रेमिका के पिता लालबाजार के पुलिस अफसरों का प्रभाव दिखाते हुए रिजवान के घरवालों को धमकाने लगे. आइपीएस अधिकारी अजय कुमार व ज्ञानवंत सिंह का धमकी मामले में शामिल होने का आरोप लगा. जिसके बाद दोनों को पद से हटा दिया गया था.

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