रेल में एफडीआइ देश बेचने की कोशिश : ममता

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कोलकाता/हुगली: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रेल बजट में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की आलोचना करते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि यह देश को बेचने का एक प्रयास है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली राजग सरकार द्वारा पेश किये रेल बजट में बंगाल की उपेक्षा और अपमान किया गया है. रेल मंत्री […]

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कोलकाता/हुगली: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रेल बजट में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की आलोचना करते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि यह देश को बेचने का एक प्रयास है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली राजग सरकार द्वारा पेश किये रेल बजट में बंगाल की उपेक्षा और अपमान किया गया है. रेल मंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी हुगली जिला के चंडीतल्ला स्थित जनाई ट्रेनिंग स्कूल मैदान में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में शरीक हुई थीं.

उन्होंने भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव से पहले लोगों को बहुत सारे झांसे दिये गये थे. रक्षा और रेलवे में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने के बारे में पहले क्यों नहीं लोगों को बताया गया? चुनाव के बाद अब क्यों? चुनाव से पहले उन्होंने ढेर सारी चीजें करने का वादा किया था, लेकिन एक महीने के अंदर उनका असली चेहरा उजागर हो गया. ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर पश्चिम बंगाल के प्रति प्रतिशोध का रुख बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि नयी सरकार ने बंगाल को नजरअंदाज करने के साथ अपमानित भी किया है. बजट में सिर्फ एक साप्ताहिक ट्रेन बंगाल के लिए दी गयी है. तृणमूल कांग्रेस इस बजट को वापस लेने की मांग करती है. बंगाल के लोगों को भीख नहीं चाहिए. बंगाल के लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं और इसके लिए किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करते हैं. मुख्यमंत्री ने मांग की है कि बिहार और ओड़िशा समेत अन्य राज्यों को फायदे मिलने चाहिए लेकिन फायदे बराबरी से बांटें जायें. उन्होंने सवाल किया कि क्यों पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज और वंचित किया जा रहा है?

क्या किसी ने कभी इस तरह नजरअंदाज और अपमानित किया जाना देखा है? अगर पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज किया जायेगा तो तृणमूल कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी. ममता ने दावा किया कि जब वे रेल मंत्री थी तो उन्होंने बंगाल में 16 रेल परियोजनाएं मंजूर की थीं और 300 नयी ट्रेनें प्रस्तावित की थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पेश किये रेल बजट के बाद उन्हें बेहद तकलीफ हुई है. यह खुशकिस्मत हैं कि ना तो वे राज्यसभा में हैं और ना ही लोकसभा में. वे जानती हैं कि अगर मैं वहां होती तो क्या करती.

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