भारतीय राजनीति पर हावी हो गये हैं छोटे दल
कोलकाता: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर विमल जालान वर्तमान आर्थिक स्थिति से खुश नहीं है. उनका कहना है कि वर्तमान में सरकारें सामूहिक जिम्मेदारी लेने से बचती हैं. एमसीसी चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए श्री जालान ने कहा कि 1989 से आज तक देश में नौ सरकारें […]
कोलकाता: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर विमल जालान वर्तमान आर्थिक स्थिति से खुश नहीं है. उनका कहना है कि वर्तमान में सरकारें सामूहिक जिम्मेदारी लेने से बचती हैं.
एमसीसी चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए श्री जालान ने कहा कि 1989 से आज तक देश में नौ सरकारें बनी हैं, जिनमें से कुछ ने ही अपना कार्यकाल पूरा किया. उन्होंने कहा कि राजनीति में स्वच्छता लाने के लिए जो दल-बदल विरोधी कानून बनाया गया है, वह सुनने में तो अच्छा लगता है, पर वर्तमान राजनीतिक स्थिति के लिए यही कानून अधिक जिम्मेदार है. देश में इतनी बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों के उदय के लिए यह कानून ही जिम्मेदार है. इस कानून के बनने के बाद से जिममेदारी लेने का एहसास कम हुआ है. छह-छह महीने के लिए सरकारें बनने लगी हैं. छोटे दल भारतीय राजनीति पर हावी हो गये हैं.
उन्होंने कहा कि आज सरकारों का किरदार बदल गया है. वह सामूहिक जिम्मेदारी लेने से बचने लगी हैं. यही कारण है कि अलग-अलग मंत्री अलग-अलग बातें करते हैं. हालांकि संविधान ने साफ तौर पर सामूहिक जिम्मेदारी की बात कही है. पहले मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य अहम फैसले लेते थे, पार्टी में इस पर पहले चर्चा हो जाती थी. वर्तमान स्थिति के कारण लोकतंत्र कमजोर हो गया है. उन्होंने कहा कि बड़े राजनीतिक सुधारों एवं एक मजबूत दल-बदल विरोधी कानून तैयार करने का वक्त आ गया है. इसके साथ ही राज्यों को अधिक अधिकार देने होंगे एवं राजनीतिक दलों व मंत्रियों को जिम्मेदार बनाना होगा. राज्य में हुए सारधा घोटाले के बारे में पूछे जाने पर श्री जालान ने कहा कि इस घोटाले ने तो देश में हुए बड़े-बड़े घोटालों को पीछे छोड़ दिया है. चुनाव के बाद जो भी नयी सरकार आये, उसे चाहिए कि तीन महीने के बाद इस घोटाले की सच्चई दुनिया के सामने लाये और प्रभावित लोगों को उनकी रकम वापस मिले.
संकट या समस्या के दौरान ब्याज भुगतान दर पर रोक संभव
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर विमल जालान का कहना है कि अगर किसी राज्य को संकट या समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो ब्याज भुगतान पर रोक संभव है. एमसीसी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान श्री जालान ने कहा कि सूखा या सुरक्षा जैसे मामलों या अन्य किसी प्रकार के संकट की स्थिति में ब्याज भुगतान पर रोक की सुविधा दी जाती रही है.
हालांकि उन्होंने इस बात पर टिप्पणी नहीं कि क्या विकास के आधार पर ब्याज भुगतान पर रोक लगाने की मांग करने के मामले में पश्चिम बंगाल सही है. गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार जब से सत्ता में आयी है तब से तीन साल के लिये ब्याज भुगतान पर रोक की मांग करती रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह कहती रही हैं कि राज्य को केंद्र को ब्याज के रुप में करीब 25,000 करोड़ रुपये सालाना देना पड़ता जिससे राज्य के विकास कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं और वेतन भुगतान में समस्या हो रही है.
इस बारे में पूछे जाने पर श्री जालान ने कहा कि मैं पश्चिम बंगाल के लिये और धन तथा केंद्रीय सहायता चाहता हूं लेकिन राज्यों के बीच संसाधनों के वितरण के मामले में निष्पक्षता और जवाबदेह का मुद्दा है. सिद्धांतों का निर्धारण योजना आयोग करता है. श्री जालान ने इस बात पर सहमति जतायी कि राज्यों में जुटाये जाने वाले करों का केंद्र के साथ साझा करने के नियमों पर फिर से गौर किये जाने की जरुरत है. बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित राशि अथवा फंसे कर्ज के बारे में पूछे जाने पर श्री जालान ने कहा कि यह समस्या आंशिक तौर पर सुस्ती की वजह से है.
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