दुर्लभ बीमारी SMA से जूझ रहा गोरखपुर का मासूम, इलाज को चाहिए 10 करोड़ रुपये, सीएम योगी से पिता की उम्मीदें

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स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी, यानी SMA, नामक बीमारी है

UP News: गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र से एक मार्मिक अपील आई है. एक साढ़े चार माह के बच्चे को स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) नामक दुर्लभ बीमारी है. इसके इलाज के लिए 10 करोड़ रुपये के इंजेक्शन की जरूरत है, जिसके लिए परिवार लोगों से मदद की गुहार लगा रहा है.

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UP News: गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र निवासी आलोक कुमार सिंह अपने साढ़े चार माह के बेटे के इलाज के लिए सहयोग की अपील कर रहे हैं. परिवार के मुताबिक बच्चा स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी, यानी SMA, नामक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है. पिता का कहना है कि बच्चे के उपचार में एक इंजेक्शन की आवश्यकता है, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है. धनराशि न जुट पाने से परिवार चिंतित है और स्तर पर सहायता की उम्मीद लगाए है.

90 हजार लोगों से सहयोग की अपील

शुक्रवार को आलोक कुमार सिंह मदद की गुहार लेकर गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब पहुंचे. उनका कहना है कि वह बांसगांव के सांसद, विधायक, मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के मंत्रियों से मिल चुके हैं, मगर अभी तक अपेक्षित मदद नहीं मिली. पिता ने लोगों से अपील की कि करीब 90 हजार लोग एक-एक हजार रुपये दें तो इलाज की रकम जुटाई जा सकती है. उन्होंने समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से इस कठिन समय में परिवार का साथ देने का आग्रह किया.

SMA में मांसपेशियां क्यों होती हैं कमजोर

SMA एक आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी और ब्रेनस्टेम से संबंधित मोटर न्यूरॉन धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होते हैं. इससे मांसपेशियों में कमजोरी, शारीरिक विकास में देरी और चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. शिशुओं में इसके गंभीर रूप में सिर संभालने, दूध निगलने और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. बीमारी की गंभीरता और लक्षणों का समय अलग-अलग हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञ द्वारा जांच और निगरानी आवश्यक मानी जाती है.

जल्द पहचान और विशेषज्ञ की देखरेख जरूरी

चिकित्सकों के अनुसार SMA की पहचान के लिए आनुवंशिक जांच महत्वपूर्ण होती है और उपचार योजना बच्चे की स्थिति के आधार पर तय की जाती है. निदान, विशेषज्ञ की निगरानी, पोषण तथा श्वसन संबंधी देखभाल रोगी की जरूरतों में अहम भूमिका निभा सकते हैं. लक्षित उपचारों से बीमारी की प्रगति पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर जब उपचार जल्द शुरू हो. परिवार ने कहा कि उन्हें सहायता और सरकारी सहयोग से बच्चे के उपचार की उम्मीद बनी हुई है.

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नटवर कुमार

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