ePaper

कभी खेत में, कभी चारपाई पर… 15 दिन में 12 मौतें! बूढ़पुर गांव में हार्टअटैक या कोई खौफनाक राज़?

Updated at : 14 Jun 2025 4:52 PM (IST)
विज्ञापन
कभी खेत में, कभी चारपाई पर… 15 दिन में 12 मौतें! बूढ़पुर गांव में हार्टअटैक या कोई खौफनाक राज़?

Up Silent death: बागपत के बूढ़पुर गांव में 15 दिनों में 12 लोगों की हार्टअटैक से मौत हो गई. मृतक खेत में काम करते, टहलते या घर में सोते वक्त मरे. गांववाले दूषित नाले और ज़हरीले पानी को जिम्मेदार मान रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग से जांच और समाधान की मांग की गई है.

विज्ञापन

Up Silent Death: बागपत जनपद के रमाला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बूढ़पुर गांव में बीते 15 दिनों के भीतर 12 लोगों की अचानक हार्टअटैक से मौत ने पूरे गांव को हिला दिया है. मौतें इतनी जल्दी-जल्दी और एक जैसे लक्षणों के साथ हुईं कि गांव के लोग इसे सामान्य नहीं मान रहे. यह गांव, जिसकी आबादी लगभग 8,000 है, अब शोक और भय के साये में जी रहा है. अधिकतर मृतकों की उम्र 50 से 55 वर्ष के बीच है और वे सभी या तो खेत में काम कर रहे थे, सुबह टहलने गए थे या फिर घर पर आराम कर रहे थे जब अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और उनकी जान चली गई.

दूषित नाला बना बीमारी का कारण? गांववालों का बड़ा आरोप

गांव के बीच से होकर गुजरने वाला एक नाला इस त्रासदी की मुख्य वजह के रूप में सामने आ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यह नाला सिर्फ बदबूदार ही नहीं बल्कि अत्यंत दूषित है, जिसमें पास की चीनी मिल का कैमिकल युक्त अपशिष्ट जल भी छोड़ा जाता है. यह पानी गांव के भूजल को भी प्रभावित कर चुका है और अब पीने का पानी भी दूषित हो चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि यही कारण है कि गांव के लोग रहस्यमय बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं और लगातार मौतें हो रही हैं.

गांव में हुई आपात बैठक, प्रशासन से की जांच की मांग

लगातार हो रही मौतों से चिंतित ग्रामीणों ने एक आपात बैठक बुलाई जिसमें गांव के वरिष्ठ नागरिकों, पूर्व प्रधान और युवाओं ने हिस्सा लिया. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तुरंत गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर लगवाने, जल की गुणवत्ता की जांच कराने और नाले की सफाई की मांग की जाएगी. ग्रामीणों ने इस संबंध में अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा है.

हर मौत की कहानी दर्दनाक, कोई खेत में तो कोई चारपाई पर मरा

  1. 1-: यशवीर उर्फ बिल्लू (52) – खेत में सिंचाई करते समय अचानक गिर पड़े. पास में कोई नहीं था, जब परिजन पहुंचे, तब तक उनकी सांस थम चुकी थी.
  2. 2-: पप्पी शर्मा (53) – रोजाना की तरह सुबह टहलने गए थे, अचानक सीने में दर्द हुआ और कुछ ही मिनटों में दम तोड़ दिया.
  3. 3-: सतीश कुमार (54) – पत्नी के साथ टहलने निकले थे. चक्कर आया, बैठे और वहीं मौत हो गई.
  4. 4-: प्रमोद (50) – खेत में काम करते वक्त सीने में दर्द हुआ, परिजन अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
  5. 5-: खिलारी (55) – नाले के पास टहल रहे थे. अचानक गिर पड़े. मौत की वजह हार्टअटैक बताई गई.
  6. 6-: बिजेंद्र पुत्र लक्ष्मण सिंह (52) – घर में बैठे थे, सीने में दर्द उठा और उन्होंने दम तोड़ दिया.
  7. 7-: विनोद (55) – रात को सोए और सुबह नहीं उठे. परिजन जब उठाने गए तो मृत मिले.
  8. 8-: रफीक (55) – खाना खाते समय सीने में दर्द हुआ, अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई.
  9. 9-: बिजेंद्र (56) – खेत से चारा ला रहे थे, तभी अचानक गिर पड़े.
  10. 10-: शफीक (62) – मजदूरी कर रहे थे, तभी अचानक सीने में दर्द उठा और मौत हो गई.
  11. 11-: सिरिया (55) – रात को खाना खाने के बाद पानी पीते समय अचानक गिर पड़े.
  12. 12-: पूर्व प्रधान राजबीर सिंह (62) – रोज की तरह सुबह नहर पटरी पर टहलने निकले थे, वहीं उनकी मौत हो गई.

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी बनी बड़ी चिंता, अब जांच की उठी मांग

गांव में हो रही मौतों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव नहीं आई, तो वह सामूहिक रूप से धरना प्रदर्शन करेंगे. गांव के बुजुर्गों और महिलाओं में खासा डर है. बच्चे भी बीमार पड़ने लगे हैं. ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि प्रशासन इस गंभीर स्थिति पर तुरंत ध्यान दे.

डॉक्टरों की राय – गर्मी और खानपान भी बड़ा कारण हो सकता है

जिला अस्पताल बागपत के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार का कहना है कि इस समय अत्यधिक गर्मी हार्ट पेशेंट्स के लिए जानलेवा साबित हो रही है. खासकर बुजुर्ग, मधुमेह और ब्लड प्रेशर के रोगी यदि पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं ले रहे और बाहर ज्यादा घूम रहे हैं तो उनके लिए खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि दूषित पानी, तला-भुना खाना, और नींद की कमी से भी हार्ट अटैक की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.

गर्मी में क्यों बढ़ जाता है हार्टअटैक का खतरा? जानिए विशेषज्ञों की राय

वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मयंक गोयल ने बताया कि गर्मियों में शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिससे खून गाढ़ा होने लगता है और ब्लॉकेज की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही शरीर में प्रोटीन की मात्रा असंतुलित हो जाती है जो धमनियों को जाम कर सकती है. इस स्थिति में जो लोग पहले से किसी हृदय रोग से पीड़ित हैं या जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए.

सीएमओ बोले – टीम भेजी जा रही है, जांच के बाद होगा खुलासा

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. तीरथलाल ने कहा कि बूढ़पुर गांव से लगातार हार्टअटैक से मौत की सूचना बेहद चिंताजनक है. उन्होंने बताया कि फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की एक टीम को गांव भेजने के निर्देश दिए गए हैं. टीम मौके पर जाकर जल की गुणवत्ता, पर्यावरणीय कारणों और मृतकों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड का विश्लेषण करेगी. जांच रिपोर्ट के बाद ही इस रहस्यमय मौतों के सिलसिले की असली वजह सामने आ पाएगी.

ऐसे करें बचाव – जानिए कैसे टाल सकते हैं हार्टअटैक का खतरा

ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज का सेवन करें

प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम जरूर करें

धूप और लू से बचने के लिए सिर ढककर बाहर निकलें

अधिक चिकनाई, तेल और तले-भुने भोजन से बचें

पर्याप्त पानी, जूस और नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ लें

तनाव, गुस्सा और अत्यधिक मानसिक दबाव से बचें

शराब और धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाएं

समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं

परिवार में यदि हृदय रोग का इतिहास हो तो ECG और इको की जांच नियमित कराएं

यह खबर सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि चेतावनी है उन सभी इलाकों के लिए जहां दूषित पानी, पर्यावरण प्रदूषण और प्रशासन की अनदेखी लोगों की जान ले रही है. समय रहते चेतना ही बचाव है.

विज्ञापन
Abhishek Singh

लेखक के बारे में

By Abhishek Singh

Abhishek Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola