यूपी के किसानों और छोटे कारोबारियों को फायदा ही फायदा, प्रदेश के सभी 75 जिलों के उत्पाद चिन्हित

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मेहनत की हरियाली

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) उत्तर प्रदेश के किसानों और छोटे खाद्य कारोबारियों के लिए वरदान साबित हो रही है. यह योजना स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को भी बढ़ावा दे रही है.

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UP News : उत्तर प्रदेश के किसानों और छोटे खाद्य प्रसंस्करण कारोबारियों के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना यानी PMFME नई संभावनाएं खोल रही है. योजना के तहत स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय कृषि और खाद्य उत्पादों को एक खास पहचान देने के साथ उनके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है. यह योजना केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत वर्ष 2020 में शुरू की गई थी. इसका उद्देश्य गांव और जिले स्तर पर काम करने वाले छोटे खाद्य उद्यमों को मजबूत करना और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना है.

एक जिला, एक उत्पाद की तर्ज पर खाद्य उत्पादों पर फोकस

उत्तर प्रदेश की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना जहां हस्तशिल्प और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देती है, वहीं PMFME खास तौर पर खाद्य उत्पादों और कृषि उपज पर केंद्रित है. योजना के तहत प्रत्येक जिले के लिए एक ऐसे खाद्य उत्पाद को चिन्हित किया गया है, जिसकी वहां बड़े पैमाने पर खेती, उत्पादन या प्रसंस्करण होता है. इसमें फल-सब्जियों से लेकर अनाज और पारंपरिक खाद्य उत्पाद तक शामिल हैं.

यूपी के सभी 75 जिलों के उत्पाद चिन्हित

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने फरवरी 2024 में देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 713 जिलों के लिए PMFME के तहत उत्पादों की सूची जारी की थी. इसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले शामिल हैं. यूपी के अलग-अलग जिलों की पहचान वहां के प्रमुख कृषि और खाद्य उत्पादों से की गई है.

किस जिले की कौन सी खास उपज?

योजना के तहत उत्तर प्रदेश के कई जिलों को प्रमुख कृषि उत्पादों के साथ जोड़ा गया है. इनमें प्रमुख रूप से—

  • पुदीना: बाराबंकी, रामपुर, संभल और सुल्तानपुर
  • आंवला: अमेठी, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और रायबरेली
  • आम: लखनऊ, मऊ, सीतापुर और उन्नाव समेत कई जिले
  • काला नमक चावल: गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर
  • गुड़: अयोध्या, बागपत, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर और पीलीभीत समेत कई जिले

इस तरह स्थानीय उत्पादों को जिले की खास पहचान से जोड़कर उन्हें बाजार में अलग पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है.

किसानों और छोटे कारोबारियों को क्या मिलेगा?

PMFME योजना के तहत चिन्हित उत्पादों से जुड़े किसानों, FPOs, सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कई तरह की सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है. इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट, ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता तथा तकनीक को बेहतर बनाने के लिए क्रेडिट एक्सेस जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसका मकसद छोटे कारोबारियों को आधुनिक तकनीक अपनाने और अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाने में मदद करना है.

10 हजार करोड़ रुपये के बजट से शुरू हुई थी योजना

PMFME योजना को देशभर में वर्ष 2020 से 2025 तक लागू करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था. योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा किया जाता है. इस योजना के जरिए छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को संगठित करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है.

स्थानीय उत्पाद से राष्ट्रीय ब्रांड तक पहुंचाने की कोशिश

PMFME का उद्देश्य सिर्फ किसानों को आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार में पहचान दिलाना भी है. इसके तहत छोटे उत्पादकों को एक साझा पहचान के साथ जोड़ने की कोशिश की जाती है. इससे कच्चे माल की खरीद, साझा प्रोसेसिंग सुविधाओं और मार्केटिंग में बड़े स्तर का फायदा मिल सकता है. यानी किसान और छोटे उद्यमी अपने उत्पाद को सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय दूसरे राज्यों और बड़े बाजारों तक पहुंचा सकते हैं.

सहारनपुर के शहद को मिला ‘मधुमंत्र’ ब्रांड

योजना के तहत कुछ चुनिंदा उत्पादों के लिए NAFED और TRIFED जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर के ब्रांड विकसित करने की पहल भी की जा रही है. इसी कड़ी में सहारनपुर के मल्टीफ्लोरा शहद के लिए ‘मधुमंत्र’ ब्रांड का उदाहरण सामने आता है. इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पाद को संगठित ब्रांड पहचान देकर बड़े बाजार तक पहुंचाना है.

किसानों की उपज को मिल सकती है बाजार की नई पहचान

PMFME के जरिए स्थानीय कृषि उपज को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ने की कोशिश हो रही है. इससे किसानों के साथ-साथ छोटे खाद्य कारोबारियों, FPOs और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं. कुल मिलाकर, योजना का लक्ष्य खेत में पैदा होने वाली स्थानीय उपज को बेहतर प्रसंस्करण और ब्रांडिंग के जरिए बाजार में मजबूत पहचान दिलाना है.

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रवि रंजन कुमार

लेखक के बारे में

By रवि रंजन कुमार

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