UP News : उत्तर प्रदेश किस मामले में बना देश का नंबर वन राज्य? सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश बढ़ रहा है आगे

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 13 Oct 2025 9:19 AM

विज्ञापन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

UP News : वित्तीय अनुशासन में उत्तर प्रदेश देश में नंबर वन बन गया है. सीएम योगी के नेतृत्व में राज्य फाइनेंशियल रोल मॉडल बना है.

विज्ञापन

UP News :  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता के क्षेत्र में देशभर में एक नई मिसाल कायम की है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नवीनतम रिपोर्ट (2022-23) में उत्तर प्रदेश को पूंजीगत व्यय और निवेश के मामले में देश का अग्रणी राज्य बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में प्रदेश ने ₹1,03,237 करोड़ का पूंजीगत व्यय किया— जो देश के सभी 28 राज्यों में सर्वाधिक है। यह राज्य की शुद्ध लोक ऋण प्राप्तियों का 210.68% है, यानी सरकार ने जितना ऋण लिया, उससे अधिक राशि विकास और पूंजी निर्माण में लगाई.

योगी सरकार की नीति से मजबूत हुई वित्तीय सेहत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में राज्य ने न केवल राजस्व व्यय पर नियंत्रण रखा है, बल्कि निवेश और पूंजीगत खर्च में नया इतिहास रचा है. वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और विकासमुखी दृष्टिकोण ने उत्तर प्रदेश को देश का “फाइनेंशियल रोल मॉडल स्टेट” बना दिया है. सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की राजस्व प्राप्तियां उसके राजस्व व्यय से अधिक रही हैं, जिससे यूपी राजस्व बचत की स्थिति में है. यह स्थिति बताती है कि सरकार अपनी आय से अधिक खर्च नहीं कर रही और संसाधनों का उपयोग संतुलित ढंग से कर रही है.

निवेश पर खर्च में आगे यूपी, कई औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ा

उत्तर प्रदेश ने अपने कुल व्यय का 9.39% निवेश पर खर्च किया — जो महाराष्ट्र (3.81%), गुजरात (3.64%) और बिहार (1.65%) जैसे औद्योगिक राज्यों से कहीं अधिक है. इसके साथ ही, 2013-14 से 2022-23 के बीच केंद्र से प्राप्त करों में भी उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक हिस्सा मिला है, जो राज्य की बढ़ती आर्थिक सक्रियता को दर्शाता है.

वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर नियंत्रण से बढ़ी दक्षता

राज्य ने वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसी अनिवार्य मदों पर भी अनुशासन बनाए रखा है. सीएजी रिपोर्ट के अनुसार — कुल राजस्व व्यय का 42.57% इन मदों पर खर्च हुआ, जो हरियाणा (55.27%) और तमिलनाडु (50.97%) से कम है. वेतन पर कुल व्यय का 12.43%, पेंशन पर 12.15%, और ब्याज भुगतान पर 8.90% खर्च किया गया. वहीं सब्सिडी पर व्यय मात्र 4.40% रहा, जबकि पंजाब ने अपने कुल व्यय का 17% सब्सिडी पर खर्च किया. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अपने राजस्व को जनकल्याणकारी और विकासपरक योजनाओं पर केंद्रित कर रहा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों पर संतुलित व्यय

राज्य ने वृहद निर्माण कार्यों पर कुल व्यय का 11.89% खर्च किया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के प्रति सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है. सहायता अनुदान (सामान्य एवं वेतन) पर 22.85%, जबकि सहायता अनुदान (पूंजी सृजन) पर 2.27% व्यय किया गया — जो वित्तीय संतुलन और जवाबदेही दोनों को दर्शाता है.

एफआरबीएम मानकों पर खरा उतरा यूपी

वित्तीय वर्ष 2022-23 में उत्तर प्रदेश ने एफआरबीएम एक्ट (Fiscal Responsibility and Budget Management) के सभी मानकों का पालन किया. राज्य की कुल देयता जीएसडीपी का 29.32% रही और कुल प्रत्याभूतियां मात्र 7.56%. ये आंकड़े प्रदेश की वित्तीय स्थिरता और जिम्मेदार आर्थिक प्रबंधन का प्रमाण हैं.

‘विकास के साथ अनुशासन’, योगी सरकार की वित्तीय नीति का सूत्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वित्तीय नीति का मूल मंत्र “विकास के साथ अनुशासन” है. इसी सोच के तहत यूपी ने न केवल राजस्व व्यय को नियंत्रित रखा, बल्कि पूंजीगत व्यय के जरिए रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे को सशक्त किया. सीएजी रिपोर्ट से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अब वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक विकास दोनों का संतुलन साधने वाला मॉडल राज्य बन चुका है.

विज्ञापन
Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola