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बुंदेलखंड बाढ़ त्रासदी: भूख से जूझते लोग, राहत सिर्फ दिखावे तक!

Updated at : 05 Aug 2025 6:06 PM (IST)
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बुंदेलखंड बाढ़ त्रासदी: भूख से जूझते लोग, राहत सिर्फ दिखावे तक!

UP Flood News: बुंदेलखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की हकीकत सामने आई है. पीड़ितों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा, दूध-फल अब तक नहीं पहुंचे. कई जगह मवेशी भूख से बेहाल हैं. भूसा लूटने की नौबत आ गई. प्रशासन सिर्फ फोटो खिंचवाकर दिखावे में जुटा है.

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UP Flood News: बुंदेलखंड के बाढ़ग्रस्त इलाकों में प्रशासन के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं. बांदा, हमीरपुर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है. दूध और फल जैसे जरूरी चीजें अब तक सिर्फ कागजों में हैं. कई स्थानों पर लंच पैकेट लेने के लिए लोगों को 10–15 किलोमीटर दूर मुख्यालय तक जाना पड़ रहा है.

“पूड़ी चाहिए तो तहसील आओ”, लेखपालों का बेहिस बयान

बांदा जिले के लेखपाल पीड़ितों को साफ तौर पर कह रहे हैं कि यदि राहत सामग्री चाहिए तो तहसील तक लाइन लगाकर आइए, जहां फोटो खींचकर किट दी जाएगी. इस व्यवस्था से गरीबों की हालत और खराब हो रही है. राहत सिर्फ उन्हीं तक पहुंच रही है जिनकी फोटो अपलोड की जा रही है.

भूख से बिलबिलाए मवेशी, हमीरपुर में लूट लिया भूसा

हमीरपुर में पशुओं की भूख भी विकराल रूप ले चुकी है. पशुपालन विभाग द्वारा चौरादेवी मंदिर परिसर में लाए गए भूसे को ग्रामीणों ने लूट लिया. वायरल वीडियो में पशुपालक भूसा भरते दिख रहे हैं, वहीं अधिकारी मना करते सुने जा सकते हैं.

पैलानी में राम प्यारी बोलीं – “कुछ लोगों ने दिया आटा-चावल, प्रशासन नदारद”

बांदा की पैलानी तहसील के नारदादेव गांव की रहने वाली राम प्यारी ने बताया कि कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें आटा और चावल दिया है, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई मदद नहीं मिली. आमारा गांव के प्रधान अशोक ने भी प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए.

सरजू बोले – “आटा भी नहीं मिल रहा, प्रशासन गायब”

पैलानी के सिंधन गांव के सरजू का कहना है कि हालात इतने खराब हैं कि उन्हें आटा तक नहीं मिल रहा. उन्होंने बताया कि प्रशासन सिर्फ कैमरे के सामने सक्रिय दिख रहा है, जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा.

राशन किट और मेन्यू का दावा, जमीनी हकीकत अलग

प्रशासन के अनुसार राहत राशन किट में 10 किलो आटा, चावल, आलू, मसाले, तेल, नमक और दैनिक जरूरत का अन्य सामान है. राहत शिविरों में नाश्ते में दलिया, पोहा, चना और मौसमी फल, जबकि दोपहर व रात के खाने में दाल, सब्जी, रोटी या पूड़ी का इंतजाम बताया गया है. लेकिन कई जगहों पर ये सिर्फ दावे बनकर रह गए हैं.

जिलाधिकारी का बयान – “शिकायत करें, होगी तुरंत कार्रवाई”

बांदा की जिलाधिकारी जे. रीभा ने कहा है कि चाहे राहत शिविर हों या खुले में रहने वाले लोग, सभी जरूरतमंदों को राशन व लंच पैकेट दिए जाने चाहिए. किसी भी शिकायत पर टोल फ्री नंबर पर सूचना देकर त्वरित कार्रवाई कराई जा सकती है.

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Abhishek Singh

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By Abhishek Singh

Abhishek Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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