Self-employment in UP: योगी सरकार में स्वरोजगार को नई उड़ान, युवा-महिलाएं बना रहीं औद्योगिक क्रांति की नई आधारशिला
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 18 Nov 2025 12:51 PM
सीएम योगी
Self-employment in UP: आज यूपी का युवा उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार कर रहा है. महिलाएं अपने हुनर से परिवारों की तकदीर बदल रही हैं और पारंपरिक उद्योग आधुनिक तकनीक के साथ पुनर्जीवित होकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे रहे हैं.
Self-employment in UP: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्योगों की तस्वीर तेजी से बदल रही है. डबल इंजन सरकार ने पारंपरिक कलाओं और ग्रामीण आधारित उद्योगों को पुनर्जीवित कर युवाओं को कौशल, वित्तीय सहायता और बाज़ार तक पहुंच देकर नई औद्योगिक क्रांति की नींव रखी है. मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CM-YUVA) ने हजारों युवाओं को न सिर्फ स्वावलंबन की राह दिखाई है, बल्कि प्रदेश में नए उद्योग आधारित रोजगार अवसर भी जन्म दिए हैं। सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.70 लाख युवाओं को लाभान्वित करने और हर वर्ष 1 लाख से अधिक नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का है.
युवा उद्यमिता को गति दे रही है CM-YUVA योजना
सीएम युवा योजना के तहत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को 5 लाख रुपये तक 100% ब्याज-मुक्त तथा बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही परियोजना लागत का 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जा रहा है. इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि—
*न्यूनतम 8वीं पास और कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवा पात्र
*ऋण स्वीकृति प्रक्रिया पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल
*उद्योग स्थापित होने के साथ अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर
सरकार के अनुसार हजारों युवा अब स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योग शुरू कर अपने परिवारों के साथ-साथ आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार सृजित कर रहे हैं.
पारंपरिक कलाओं को नई संजीवनी: शजर उद्योग बना बड़ा उदाहरण
ओडीओपी (ODOP) योजना योगी सरकार की सबसे सफल पहलों में एक बनकर उभरी है. कई परंपरागत कलाएं, जो समाप्ति की कगार पर थीं, आज वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं.
शजर उद्योग इसका सबसे बड़ा प्रमाण है
*शजर एक कीमती पत्थर है जो देशभर में सिर्फ यूपी की केन नदी की रेत में मिलता है.
*पहले यह कारीगरी कुछ परिवारों तक सीमित थी, पर सरकार ने इसे ओडीओपी से जोड़कर नए बाजार दिए.
*जीआई टैग मिलने से इस उद्योग को वैश्विक पहचान मिली.
*कारीगरों की संख्या कई गुना बढ़ी और उनकी आय में बड़ा सुधार हुआ.
विश्वकर्मा श्रम सम्मान, टूलकिट वितरण और डिजिटल प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों ने कारीगरों को
कौशल, आधुनिक उपकरण और विपणन क्षमताओं से जोड़ा है.
महिला स्वावलंबन बनी नई आर्थिक ताकत
ओडीओपी और महिला स्वयं सहायता समूहों ने मिलकर प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक स्थिति
में क्रांतिकारी बदलाव किया है.
*हजारों महिलाएं अपने घरों में स्वरोजगार स्थापित कर रही हैं.
*उनके उत्पाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहे हैं.
*अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपी की कारीगरी की मांग बढ़ी है.
*घरों की आय में वृद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा में सुधार.
महिला स्वावलंबन, परंपरागत कारीगरी और आधुनिक मार्केटिंग का यह संगम उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक पहचान बनता जा रहा है. उद्योग आधारित विकास मॉडल बना उदाहरण योगी सरकार का तिहरा फोकस—कौशल, पूंजी और बाजार—ने यह सिद्ध किया है कि सरकार की ठोस नीतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जमीन से उठाकर वैश्विक मंच पर स्थापित कर सकती हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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