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विधवा पेंशन के लिए सरकारी दफ्तर का नहीं लगाना होगा चक्कर, घर बैठे ऐसे करें आवेदन

Updated at : 10 Sep 2023 12:27 PM (IST)
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विधवा पेंशन के लिए सरकारी दफ्तर का नहीं लगाना होगा चक्कर, घर बैठे ऐसे करें आवेदन

प्रदेश में असहाय महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ ही उन्हें अपने खर्चों के लिए किसी के आगे हाथ फैलाना ना पड़े. इसके लिए सरकार विधवा पेंशन योजना चलाती है. यहां जानें घर बैठे कैसे करें आवेदन.

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योगी सरकार गरीबों के लिए कई आर्थिक योजनाएं चला रही है. ऐसी ही एक स्कीम विधवा पेंशन योजना है. जिसके तहत विधवाओं को सालाना 6 हजार रुपये यानी 500 रुपये प्रति महीने की आर्थिक मदद दी जाती है. इस योजना का उद्देश्य असहाय महिलाओं को सशक्त बनाना है, जिससे उन्हें अपने खर्चों के लिए किसी के आगे हाथ फैलाना ना पड़े. विधवा पेंशन योजना की खास बात ये है कि इसके लिए 18 साल की विधवा भी पात्र है.

अगर पात्रता की बात करें तो आवेदक प्रदेश का स्थानीय निवासी होने के साथ ही उसके परिवार की आय 2 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. इसके अलावा वह बीपीएल कार्ड धारक हो, साथ ही किसी अन्य पेंशन का लाभ ना उठा रही हो. वहीं, विधवा पेंशन योजना से जुड़े कागजातों की बात करें तो आवेदक का आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पति की मृत्यु का प्रमाण पत्र और बैंक डिटेल जैसे दस्तावेजों की जरुरत पड़ेगी.

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले यूपी सरकार के एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल की वेबसाइट https://sspy-up.gov.in/HindiPages/index_h.aspx पर जाएं. यहां आपको निराश्रित महिला पेंशन का विकल्प दिखेगा. इस पर जाने के बाद आपको ऑनलाइन आवेदन करें’ पर जाएं. अब एक फॉर्म खुलकर आएगा इसे भरने के बाद दस्तावेज अपलोड कर दें और अंत में कैप्चा कोड भरने के बाद सबमिट पर क्लिक कर दें. ऐसे में आप का आवेदन फॉर्म जमा हो जाएगा और इसकी फोटोकॉपी जरूर लें.

दूसरी संतान बेटी होने पर मिलेंगे 6 हजार रुपये, यहां करें आवेदन

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) का लाभ अब दूसरी संतान बेटी होने पर भी मिलेगा. लाभार्थियों को छह हजार रुपए दिए जाएंगे. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मिशन शक्ति के अन्तर्गत उपयोजना सामर्थ्य के माध्यम से करने का निर्णय लिया गया है. योजना के अंतर्गत आंशिक बदलाव भी हुए हैं, जिसको अब पीएमएमवीवाई वर्जन 2.0 के नाम से जाना जाएगा.

अब लाभार्थियों के प्रपत्रों का अंकन नए पोर्टल पर यूआरएल pmmvy.nic.in पर किया जाएगा. पूर्व में लाभार्थियों को पांच हजार रुपये का भुगतान तीन किश्तों में किया जाता था. उसमें पहली किश्त एक हजार गर्भ धारण के समय से पंजीकरण के बाद, दूसरी किश्त दो हजार रुपये प्रसव पूर्व जांच के बाद तथा तीसरी किस्त दो हजार रुपये बच्चे के जन्म के प्रमाण पत्र के बाद प्रदान की जाती थी. अब यह राशि दो किश्तों में दी जाएगी. गर्भधारण से शिशु के जन्म से 570 दिन के अन्दर योजना में पंजीकरण किया जाएगा.

गोशाला के गोवंशों को ले सकते हैं गोद, ऐसे करवाएं सदस्यता

अब नगर निगम, नगर पंचायत के गोशालाओं में पल रहे गोवंशों को गोद लेने वालों को घर ले जाने की बाध्यता नहीं होगी. गोद लिए जाने वाले गोवंश गोशाला में ही रहेंगे. गोद लेने वाले को हर महीने गोवंश के खानपान के लिए निर्धारित राशि देनी होगी. मध्यप्रदेश की तर्ज पर गौ ग्रास सेवा योजना गोशालाओं के लिए शुरू करने का आदेश प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने दिया है. इस योजना के तहत मासिक या वार्षिक सदस्यता शुल्क देकर गोवंश को गोद ले सकते हैं.

बता दें कि दो तरह का सदस्यता शुल्क तय किया गया है. पहला सदस्यता शुल्क मासिक 600 रुपये और वार्षिक 7200 रुपये है. दूसरा सदस्यता शुल्क 900 रुपये मासिक और 11000 रुपये वार्षिक होगा. सदस्यता शुल्क से उस गोवंश के खानपान की व्यवस्था होगी, जिसे गोद लिया जाएगा.

गोवंश गोद लेने वालों को परिचय पत्र दिया जाएगा, ताकि जब चाहें गोद लिए गए गोवंश को गोशाला में देख सकें. प्रमुख सचिव के आदेश में व्यक्ति के साथ संस्था, व्यापार मंडल, अस्पताल, होटल आदि से गोशाला में पल रहे गोवंशों के लिए भूसा, हरा चारा, गुड़ आदि की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है.

इसके लिए नगर निगम को प्रचार प्रसार करने के लिए कहा गया है. इससे पहले शासन ने गोशाला में पलने वाले गोवंशों को गोद लेकर घर में पालने का एक आदेश दिया था. इस योजना के तहत गोशाला से घर ले जाकर गोवंश पालने वालों को सरकार ने हर महीने 900 रुपये देने की घोषणा की.

इस योजना में नगर निगम की ओर से शंकरगढ़ में संचालित गोशाल से गोवंश लेने को कोई आगे नहीं आया. नगर निगम के पशुधन अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि प्रमुख सचिव का आदेश मिलने के बाद नगर निगम से इसके प्रचार की तैयारी हो रही है. इसके लिए गोशालाओं का सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकरण कराया जाएगा.

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Sandeep kumar

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By Sandeep kumar

Sandeep kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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