UP Election: किसान आंदोलन की तपिश के बीच किसान चौपाल के बहाने BJP भांप रही किसानों का मन, यह है पूरी रणनीति

UP Election 2022: भाजपा किसान आंदोलन की तपिश के बीच किसान चौपाल के बहाने किसानों का मन भांपने की कोशिश कर रही है. इसके लिए भाजपा की तरफ से नई रणनीति तैयार की गई है. किसान चौपाल 31 अक्टूबर तक चलेगा.
UP Election 2022: पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ किसान आंदोलन अब उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में जोर पकड़ चुका है. जल्द ही इस आंदोलन की तपिश उत्तर प्रदेश समेत पूर्वांचल में भी महसूस होने की प्रबल संभावना के बीच भाजपा किसान चौपाल के मध्यम से उत्तर प्रदेश के किसानों का मन भांपने में लगी हुई है.
विजयादशमी को शुरू हुए इस किसान चौपाल अभियान के तहत भाजपा अपने सम्पूर्ण संगठनात्मक ढांचे एवं चुनावी संयंत्रों के साथ अपने नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचने की योजना को अमली जामा पहनायेगी. केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों के साथ राज्य के किसानों तक पहुंचने के लिए भाजपा द्वारा पार्टी तंत्र के माध्यम से 58195 ग्राम पंचायतों में किसान चौपालों का आयोजन किया जा रहा है.
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पार्टी सूत्रों यह स्पष्ट किया गया है कि भाजपा नेतृत्व ने अपने सभी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत प्रमुखों और भाजपा किसान मोर्चा के सदस्यों को 58,195 ग्राम पंचायतों तक न केवल मोदी-योगी सरकारों की उपलब्धियों के साथ पहुंचने का निर्देश दिया है, बल्कि उनके विरोधी दलों द्वारा द्वारा फैलाई गई कथित ‘अफवाहों’ को भी दूर करने का निर्देश दिया है. पार्टी के सभी पदाधिकारी बताये गए सुनिश्चित स्थानों की ग्राम पंचायतों में चौपाल के माध्यम से पार्टी और किसानों के बीच संवाद स्थापित करेंगे. कुछ विशेष इलाकों में किसानों के साथ गांव में ही रात्रि प्रवास एवं अन्य संगठनात्मक कार्यक्रमों के होने की भी योजना है.
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इस बाबत प्रभात खबर से हुई बातचीत में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश भर की सभी 58195 ग्राम सभाओं में किसान चौपाल का आयोजन करवाया जा रहा है. इसका शुभारम्भ विजयदशमी के दिन हुआ है एवं इसका समापन 31 अक्टूबर को स्वामी विवेकानद जी की जयंती के दिन होना सुनिश्चित हुआ है. सभी नेतागण एवं कार्यकर्ता अपने अपने क्षेत्रों में किसानों से संवाद करके सरकार द्वारा किये गए कार्यों का विवरण देंगे एवं नए कानून के बारे में भी बताएंगे.
पार्टी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने बताया कि किसान चौपाल के माध्यम से किसानों को किसान लोन माफी, गन्ने की सरकारी समर्थन मूल्य की वृद्धि, उपकरणों एवं फर्टिलाइजर इत्यादि के लिये दी जा रही सब्सिडी, बिजली के बिलों की सरचार्ज माफी के अतिरिक्त अन्य लाभकारी योजनाओं का विवरण दिया जाएगा. इसके अतिरिक्त हम किसानों को नए कानून के फायदे बतायेंगे एवं विपक्षियों द्वारा फैलाये गए भ्रम को दूर करेंगे.
इस बाबत समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने बताया कि भाजपा का यह किसान चौपाल कार्यक्रम महज एक चुनावी ढकोसला है. भाजपा किसान विरोधी दल है. इन लोगों ने कभी किसानों का हित नहीं किया. अपने करीबियों को लाभ देने के लिये किसानों से बात किये बगैर नए कानून पास करवा दिए. ऐसे में इनका यह राजनीतिक स्टंट किसानों का गुस्सा नहीं ख़तम कर पाएगा. किसान समझदार हैं और इनकी सच्चाई जान चुके हैं . उन्हें पता है कि बीते साढ़े चार सालों न तो उनकी आय दोगुनी हुई और न ही गन्ना किसानों को लाभ मिला है. ऐसे में अपने धन-बल और सरकारी तंत्र का उपयोग करके भले ही यह कार्यक्रम हो जाय, लेकिन इसका निष्कर्ष इनके खिलाफ ही जाएगा.
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गौरतलब है कि किसान आंदोलन के बढ़ जाने के बाद भाजपा को किसानों के वोटों के खिसकने का डर सता रहा है. ऐसे में इस किसान चौपाल के माध्यम से भाजपा को प्रदेश के किसानों के साथ ग्रामीण इलाकों के वोटरों का मन भांपने का मौका मिलेगा, जिसके बाद चुनावों के मद्देनज़र निर्णय लिये जा सकेंगें.
रिपोर्ट- उत्पल पाठक
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By Prabhat Khabar News Desk
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