अतीक अहमद के केस से 10 जजों ने खुद को कर लिया था अलग, 11वें न्यायाधीश ने की सुनवाई और मिल गयी माफिया को बेल

एक समय ऐसा था कि अतीक अहमद का खौफ था. एक समय ऐसा भी था जब लोगों के बीच अतीक नाम का डर था. एक बार 10 जजों ने अतीक के एक केस की सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया था, इसके बाद 11वें जज ने सुनवाई की थी और अतीक अहमद को बेल मिल गयी.
लखनऊ. बाहुबली अतीक अहमद को 17 साल पुराने किडनैपिंग के मामले में MP-MLA कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. वहीं बीते महीने प्रयागराज में उमेश पाल को गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस हत्याकांड का आरोप भी अतीक अहमद पर लगा है. आज पूरे देश में अतीक अहमद की चर्चा हो रही है. हम आपको अतीक अहमद की एक ऐसा किस्सा बताएंगे, जब 10 जजों ने एक केस की सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया था, इसके बाद 11वें जज ने केस की सुनवाई की थी और अतीक अहमद को बेल मिल गयी. उस समय लोगों के बीच अतीक नाम का खौफ था. लेकिन आज वह खौफ किसी में नहीं दिख रहा है.
एक जमाना था जब यूपी में माफिया डॉन अतीक अहमद की तूती बोलती थी. जब यूपी में अतीक अहमद का नाम सुनते ही हर किसी के अंदर डर पैदा हो जाता था. अतीक अहमद का दबदबा ऐसा था कि 10 जजों ने उसके एक केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. इसके बाद सुनवाई के लिए 11वें जज ने हामी भरी और अतीक अहमद को बेल दे दी. इससे आप समझ सकते है कि अतीक अहमद से कितना दहशत में लोग रहते होंगे. आज अतीक के खिलाफ नैनी जेल से लेकर कचहरी परिसर तक आक्रोश देखने को मिला. वकील इने गुस्से में थे कि उन्होंने अशरफ के सामने ‘फांसी दो’ के नारे लगाए.
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साल 2012 में अतीक अहमद के सामने अपना गढ़ बचाने का आखिरी मौका था. क्योकि 2009 के लोकसभा चुनाव हार गया था. उस समय विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद के सामने मैदान में पूजा पाल थी. लेकिन, 2012 में भी अतीक अहमद चुनाव हार गया. इसके बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, जिसमें अतीक अहमद ने फिर दोबारा अपनी हनक बनाने का पूरा प्रयास किया. फिर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सुलतानपुर से टिकट दे दिया, लेकिन जिसका पार्टी में ही विरोध शुरू हो गया. इसके बाद सीट बदलकर श्रावस्ती कर दी गयी. लेकिन इस बार भी अतीक को हार का सामना करना पड़ा. जिसके बाद अखिलेश यादव से भी उसके रिश्ते खराब हो गए.
अतीक अहमद और उसके दो सहयोगियों को बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के गवाह उमेश पाल के अपहरण के मामले में सजा मिली है. गवाही बदलवाने के लिए 17 साल पहले 28 फरवरी 2006 को अतीक और उसके गुर्गों ने उमेश पाल का अपहरण कर लिया था. उन्हें अपने दफ्तर ले जाकर टार्चर किया और फिर जबरदस्ती हलफनामा दिलवाकर गवाही बदलवा दी. अतीक के चंगुल से मुक्त होकर उमेश पाल पुलिस के पास गए और मुकदमा दर्ज करवाया. आज कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अतीक समेत बाकी दोनों आरोपियों को धारा-364ए/34, धारा-120बी, 147, 323/149, 341,342,504, 506 के सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
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