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आधे-अधूरे कैंसर संस्थान के उद्घाटन पर बिफरे योगी, कहा - स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ है यह

Updated at : 22 Apr 2017 2:26 PM (IST)
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आधे-अधूरे कैंसर संस्थान के उद्घाटन पर बिफरे योगी, कहा - स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ है यह

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी में कैंसर संस्थान के आधे-अधूरे निर्माण के बावजूद उद्घाटन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि यह चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ है. योगी ने यहां चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक कार्यक्रम में शुक्रवार की देर रात कहा कि लखनऊ के चकगंजरिया […]

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी में कैंसर संस्थान के आधे-अधूरे निर्माण के बावजूद उद्घाटन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि यह चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खिलवाड़ है. योगी ने यहां चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक कार्यक्रम में शुक्रवार की देर रात कहा कि लखनऊ के चकगंजरिया स्थित कैंसर संस्थान का आधे-अधूरे निर्माण के बावजूद उद्घाटन कर दिया गया. कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी के उपचार के लिए बिना पूरी तैयारी और व्यवस्था के उद्घाटन करना स्वास्थ्य व चिकित्सा सेवाओं के साथ खिलवाड़ जैसा है.

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मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कैंसर संस्थान द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सेवाएं जांच का विषय हैं. उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेजों व संस्थानों को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ तथा उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा से संबंद्ध करने के लिए गम्भीरता से कार्य करने के निर्देश दिये. मुख्यमंत्री ने केजीएमयू से संबद्घ रायबरेली रोड स्थित ट्रॉमा सेंटर-2 को बेहतर संचालन के लिए एसजीपीजीआई को हस्तांतरित कराये जाने के भी निर्देश दिये.

राज्य में चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों की कमी की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इस कमी को हर हाल में पूरा करना होगा. इस कमी को दूर करने के लिए कार्य योजना बनायी जाये. उन्होंने कहा कि यह हम सबके लिए चिंता का विषय है कि ग्रामीण व दूर-दराज के इलाकों और छोटे कस्बों में योग्य चिकित्सकों की कमी है.

उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का आकर्षण शहरों और सुविधाओं की तरफ रहता है, जिनसे उन्हें निजात पाना होगा. उन्हें यह सोचना चाहिए कि जिस समाज और देश ने उन्हें चिकित्सक बनाने में मदद की है, वे उस समाज को क्या दे रहे हैं. इस संदर्भ में उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद चिकित्सकों को दो या तीन साल ग्रामीण या दूर-दराज के क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान किये जाने की बात कही.

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