अखिलेश ने कहा - गठबंधन प्रयोग था, कमी का पता चला

Updated at : 05 Jun 2019 5:48 PM (IST)
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अखिलेश ने कहा - गठबंधन प्रयोग था, कमी का पता चला

लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गठबंधन टूटने से संभवतः सीख लेते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि यह एक प्रयोग था, कई बार सफलता नहीं मिलती लेकिन कमी का पता चल जाता है. अखिलेश ने यहां संवाददाताओं से कहा, तो यह ठीक है कि ट्रायल होता है, […]

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लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गठबंधन टूटने से संभवतः सीख लेते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि यह एक प्रयोग था, कई बार सफलता नहीं मिलती लेकिन कमी का पता चल जाता है.

अखिलेश ने यहां संवाददाताओं से कहा, तो यह ठीक है कि ट्रायल होता है, कई बार कामयाब नहीं होते हैं, लेकिन कम से कम आपको कमी पता चल जाती है. उन्होंने कहा, मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि आदरणीय मायावती के लिए जो मैंने पहले दिन कहा था, पहले प्रेस कांफ्रेंस में कि मेरा सम्मान उनका सम्मान होगा. आज भी मैं वही बात कहता हूं. अखिलेश ने कहा, और जहां तक सवाल गठबंधन का है, अकेले लड़ने का है क्योंकि अब राजनीति में रास्ता खुला है और अगर उपचुनाव में अकेले अकेले लड़ रहे हैं तो मैं पार्टी के सभी नेताओं से सलाह-मशविरा करके आगे की रणनीति की दिशा में काम करूंगा.

गठबंधन को मंगलवार उस समय झटका लगा, जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी विधानसभा उपचुनाव अकेले लड़ेगी. इसके बाद अखिलेश ने भी कहा कि सपा भी अकेले दम पर चुनाव लड़ने को तैयार है. अखिलेश ने गाजीपुर में संवाददाताओं से कहा कि गठबंधन टूटने की स्थिति में हम उपचुनाव में सभी 11 सीटों पर लड़ेंगे. मायावती ने हालांकि कहा कि वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगी कि सपा-बसपा गठबंधन बना रहे. लखनऊ ईदगाह पहुंचे अखिलेश यादव ने लोगों को ईद की मुबारकबाद दी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन को लेकर जब अखिलेश से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, मैं जन्मदिन को बहुत गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि आपकी उम्र केएक साल कम हो गयी.

मंगलवार को बसपा प्रमुख ने हालांकि भविष्य में सपा के साथ फिर से गठबंधन के विकल्प को खुला रखते हुए कहा था, अभी हमारा कोई ब्रेकअप नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, अगर वे (अखिलेश) किसी कारणवश इस काम में सफल नहीं हो पाते हैं, तो फिर हम लोगों का अकेले ही चलना ज्यादा बेहतर होगा. इसीलिए वर्तमान स्थिति में हमने उत्तर प्रदेश में कुछ सीटों पर होने वाले उपचुनाव को फिलहाल अकेले ही लड़ने का फैसला किया है. उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से भाजपा के नौ विधायकों और सपा, बसपा के एक-एक विधायक के सांसद बनने के बाद रिक्त हुई 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संभावित हैं. पिछले दस साल में यह पहला मौका होगा जब बसपा उपचुनाव लड़ेगी.

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