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Kashi Tamil Sangamam 2025 : काशी और तमिल परंपराओं के प्राचीन संबंधों के केंद्र में हैं भगवान शिव

Updated at : 04 Dec 2025 11:56 AM (IST)
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CM Yogi in Kashi Tamil Sangamam

सीएम योगी

Kashi Tamil Sangamam 2025 : यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और सुदृढ़ कर रहा है.

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Kashi Tamil Sangamam 2025 : काशी में आयोजित काशी तमिल संगमम् 2025 के शुभारंभ समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह आयोजन “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को मजबूत और जीवंत कर रहा है. उन्होंने इसे भारत के उज्ज्वल भविष्य के नए द्वार खोलने वाला सांस्कृतिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक सेतु बताया. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काशी और तमिल परंपरा के प्राचीन संबंधों के केंद्र में भगवान शिव हैं और आदि शंकराचार्य ने इन संबंधों को चारों दिशाओं में स्थापित अपने पवित्र पीठों के माध्यम से और सुदृढ़ किया.

UP के वोकेशनल एजुकेशन में शामिल होंगी दक्षिण भारतीयभाषाएं

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने वोकेशनल एजुकेशन में तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलुगू, मराठी और बंगाली भाषाओं को जोड़ा है. छात्र अपनी पसंद की भाषा चुन सकेंगे और उसका पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि यूपी से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामेश्वरम, मदुरै और कन्याकुमारी जाते हैं। इसलिए पर्यटन विभाग विशेष यात्रा पैकेज तैयार करेगा, जिनसे तीर्थयात्रियों को रियायती दरों पर दक्षिण भारत के पवित्र स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे.

‘वणक्कम काशी’ से किया अतिथियों का स्वागत

योजना के चौथे संस्करण के शुभारंभ में मुख्यमंत्री योगी ने “वणक्कम काशी” और “हर-हर महादेव” के उद्घोष से अतिथियों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि काशी–तमिल संगमम् उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक, शैक्षिक, आर्थिक और आध्यात्मिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है. इस वर्ष की थीम “तमिल सीखें” प्रेरक है और ज्ञान व संस्कृति के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगी.

तेनकासी–काशी कार रैली बना आकर्षण

मुख्यमंत्री ने इस वर्ष तेनकासी से शुरू हुई दो हजार किलोमीटर लंबी कार रैली को आयोजन का प्रमुख आकर्षण बताया. उन्होंने इसे पांड्य राजवंश के महान शासक आदिवीर पराक्रम पांडियन और प्राचीन यात्रा मार्गों की ऐतिहासिक स्मृति बताया.

ज्ञान, साधना और सांस्कृतिक एकता को नई ऊँचाई

योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में यह अभियान ज्ञान, साधना और भारतीय सभ्यता को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है. उन्होंने संस्कृत श्लोक “अयोध्या मथुरा माया…” का उल्लेख कर भारत के सात पवित्र नगरों की महिमा बताई. महर्षि अगस्त्य के आदित्य हृदय स्तोत्र, आदि गुरु शंकराचार्य, संत तिरुवल्लुवर और अन्य महान संतों के योगदान का संदर्भ भी उन्होंने दिया. उन्होंने बताया कि चेट्टियार समाज पिछले दो सौ वर्षों से काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए पूजन सामग्री उपलब्ध कराता रहा है, और अब काशी व रामेश्वरम के बीच पवित्र जल विनिमय की परंपरा प्रतिमास आगे बढ़ रही है.

काशी में तमिल परंपरा की जीवंत उपस्थिति

मुख्यमंत्री ने काशी के केदार घाट, हनुमान घाट और हरिश्चंद्र घाट का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्थलों पर तमिल संस्कृति आज भी जीवंत है. बीएचयू–आईआईटी मद्रास की संयुक्त शैक्षिक पहल को उन्होंने राष्ट्रीय एकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि आगंतुकों का प्रयागराज और अयोध्या का प्रवास भी निर्धारित है, जहाँ उन्हें श्रीराम जन्मभूमि परिसर में महर्षि अगस्त्य की भव्य प्रतिमा और दक्षिण भारतीय संतों की मूर्तियों के दर्शन का अवसर मिलेगा.

काशी तमिल संगमम् : सांस्कृतिक एकता का अद्वितीय उत्सव

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का संदेश उपराष्ट्रपति ने वर्चुअल संदेश में संगमम् को “दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा और प्राचीन जीवित नगर का मिलन” बताया. उन्होंने ‘आइए तमिल सीखें’ थीम की सराहना की और 50 तमिल शिक्षकों द्वारा वाराणसी के 50 विद्यालयों में 1,500 छात्रों को प्रशिक्षण देने की पहल की प्रशंसा की. तेनकासी से काशी तक की प्रतीकात्मक अगत्यर यात्रा को उन्होंने सांस्कृतिक संबंधों के पुनर्स्मरण का महत्वपूर्ण प्रयास बताया.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का वक्तव्य

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि काशी–तमिल संगमम् अब एक जन-आंदोलन बन चुका है. उन्होंने दक्षिण भारत के मंदिरों में काशी विश्वनाथ की उपस्थिति को दोनों क्षेत्रों की सांस्कृतिक एकता का प्रमाण बताया. उन्होंने कहा कि एआई टूल्स के माध्यम से भाषाई संवाद अब और सहज हुआ है, और बीएचयू–आईआईटी मद्रास का आदान–प्रदान मॉडल राष्ट्रीय एकता को मजबूत कर रहा है.

मुख्य कार्यक्रम का दृश्य

शुभारंभ समारोह में शंखनाद और स्वस्ति वाचन से अतिथियों का स्वागत किया गया.

सीएम योगी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वेदमूर्ति देवव्रत रेखे और बालाजी बालू हरिदॉस को सम्मानित किया.

तमिल व्याकरण ग्रंथ तुलकापियम के 13 भाषाओं में अनुवादित संस्करण का विमोचन भी मुख्यमंत्री ने किया.

अतिथियों ने तमिल लोकनृत्य, कालभैरवाष्टक पर आधारित प्रस्तुति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया.

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन

पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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