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सावधान! हड्डी टूटी तो जिला अस्पताल में नहीं होगा इलाज

Updated at : 07 Apr 2020 12:39 AM (IST)
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सावधान! हड्डी टूटी तो जिला अस्पताल में नहीं होगा इलाज

बलिया : किसी कारणवश हड्डी फ्रैक्चर हो जाने पर जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों का वर्तमान में शायद ही इलाज हो पाये. कारण, अस्पताल आने के बाद ऐसे मरीजों को सिर्फ पेन कीलर डायलोना इंजेक्शन देने के बाद प्लास्टर चढ़ाने के लिए बाहर भेज दिया जायेगा. जो सक्षम है वह तो इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक-कर्मचारियों […]

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बलिया : किसी कारणवश हड्डी फ्रैक्चर हो जाने पर जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों का वर्तमान में शायद ही इलाज हो पाये. कारण, अस्पताल आने के बाद ऐसे मरीजों को सिर्फ पेन कीलर डायलोना इंजेक्शन देने के बाद प्लास्टर चढ़ाने के लिए बाहर भेज दिया जायेगा. जो सक्षम है वह तो इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक-कर्मचारियों के इशारे पर संबंधित नर्सिंग होम में जाकर प्लास्टर चढ़वा कर उपचार करा ले रहे हैं, लेकिन गरीब और लाचार मरीज भटकने को विवश हैं या फिर दूसरे के पास हाथ फैलाने के लिए मजबूर. जिला अस्पताल में सोमवार कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला. दो मरीज फ्रैक्चर की समस्या लेकर बड़ी ही उम्मीद से अस्पताल में उपचार कराने आये थे, लेकिन उन्हें तब निराशा हाथ लगी जब उसे सिर्फ इंजेक्शन देकर पर्ची लिखने के साथ बाहर भेज दिया गया.

केस:1- जहां खर्च होते 270 रुपये, वहां लगे एक हजारफेफना थाना क्षेत्र के मलकपुरा निवासी शेरू पुत्र हफीज सोमवार की सुबह बाइक से बेटी के साथ कहीं जा रहा था. गड़वार रोड से सुखपुरा की तरफ आगे ही बढ़ा था कि बाइक असंतुलित हो गयी, जिससे दोनों गिर गये. बेटी को तो कुछ नहीं हुआ, लेकिन शेरू की पैर में गहरी चोटें. आनन-फानन में परिजन उसे जिला अस्पताल ले गये, जहां उसे डायलोना इंजेक्शन देने के बाद पर्ची लिखकर छोड़ दिया गया. चूंकि परिजन साथ में थे तो आनन-फानन में सबंधित नर्सिंग होम में जाकर प्लास्टर आदि चढ़वाने के साथ सटीक उपचार करा लिया. पूछने पर पीड़ित ने बताया कि अस्पताल में 270 रुपये में हो जाता, लेकिन बाहर कराये प्लास्टर, एक्स-रे तथा दवा आदि लेकर कुल एक हजार रुपये खर्च बैठ गया.

केस:2- पैसा न होने पर टूटे हाथ जाने को हुए मजबूरशहर कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर निवासी मुनटुन वर्मा सोमवार की सुबह खेत में काम कर रहे थे कि ताड़ के पेड़ से एक टहनी टूटकर उनके दाहिने में हाथ पर गिर गयी. पहले तो घरेलू उपचार कराया, जब असहनीय दर्द शुरू हुआ तो जिला अस्पताल पहुंचे. वहां इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर ने वही डायलोना लगाकर एक गोली देकर पर्ची लिख दिया. मुनटुन वर्मा कुछ पैसा लाये जिससे सिर्फ एक्सरे हुआ. एक्सरे देखने के बाद डॉक्टर ने फिर पर्ची लिखते हुए बाहर एक नर्सिंगहोम में जाकर प्लास्टर चढ़ाने की सलाह देकर छोड़ दिया. वर्जन:मेरे पास आ जाता, हम करा देते: सीएमएसलॉकडाउन के कारण ओपीडी व्यवस्था बंद है. रही बात प्लास्टर चढ़ाने की तो संबंधित मरीज सीधे हमसे आकर मिलते हम व्यवस्था करा देते.–बीपी सिंह, सीएमएस

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