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निर्भया कांड : दोषियों की फांसी पर देरी से ग्रामीणों में बढ़ी मायूसी

Updated at : 17 Jan 2020 2:56 AM (IST)
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निर्भया कांड : दोषियों की फांसी पर देरी से ग्रामीणों में बढ़ी मायूसी

बलिया : निर्भया कांड के दोषियों की फांसी को लेकर बनी असमंजस की स्थिति से उसके परिजन सहित गांव के लोग मायूस हो गये हैं. कहा कि न्याय समय से मिले, तभी अच्छा होता है. देर से मिले न्याय को कोई फायदा नहीं होता. दोषी मुकेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस […]

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बलिया : निर्भया कांड के दोषियों की फांसी को लेकर बनी असमंजस की स्थिति से उसके परिजन सहित गांव के लोग मायूस हो गये हैं. कहा कि न्याय समय से मिले, तभी अच्छा होता है. देर से मिले न्याय को कोई फायदा नहीं होता. दोषी मुकेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा है कि 22 जनवरी को फांसी नहीं हो सकती.

दरअसल, मुकेश की दया याचिका लंबित है. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलील को मानते हुए कहा कि दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं हो सकती, क्योंकि उनकी दया याचिका लंबित है. दया याचिका लंबित होने के कारण डेथ वारंट पर खुद ही रोक लग गयी है. पटियाला हाउस कोर्ट ने ही सात जनवरी को चारों दोषियों को डेथ वारंट जारी किया था.
पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा, 22 जनवरी को नहीं हो सकती दोषियों को फांसी
एक आरोपी मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति के यहां लंबित होने के कारण रोक
12 दिसंबर 2012 को दिल्ली में जिले की रहने वाली निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी. सात साल से निर्भया के ग्रामीणों के साथ ही जिले के लोगों की टकटकी भी कोर्ट की गतिविधियों पर लगी हुई है. सात जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी किया, तो सबको राहत मिली. इस बीच दो दिनों से चल रही खींचतान के बाद गुरुवार को कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया, तो लोग मायूस हो गये.
गुरुवार की शाम को ही गांव के अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी हो चुकी थी. मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर पिछले इलाके में स्थित गांव के लोग सीधे दिल्ली से जुड़े हुए हैं. पल-पल की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं. कोई छोटी सी खबर भी पलक झपकते गांव के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच जा रही है.
डेथ वारंट जारी होने के बाद से ग्रामीण तिहाड़ जेल से लाइव प्रसारण की मांग कर रहे थे. ऐसे में अचानक रोक की खबर सुनते ही चेहरे उतर गये. गांव में रहने वाले निर्भया के परिजनों का कहना था कि सात साल से न्याय की आस लगाये बैठे हैं. कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन अब कानून के पेंच में वह फिर से उलझता जा रहा है. ग्रामीणों का कहना था कि सिस्टम इसी तरह से मामलों को लंबा लटकाये जा रहा है, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ रहा है.
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