85 वर्षीय बुजुर्ग की कानूनी जीत, 46 साल बाद मिला न्याय, दरोगा से इंस्पेक्टर बनने की चली कानूनी लड़ाई

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85 वर्षीय बुजुर्ग की कानूनी जीत

UP News: 85 वर्षीय राम अवतार सिंह यादव ने 46 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उन्हें न्याय मिला. अदालत ने उनकी पदोन्नति से जुड़े सभी लाभ देने का आदेश दिया है. यह मामला विभागीय लापरवाही और पारदर्शी प्रक्रिया के अभाव को दर्शाता है.

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UP News: प्रयागराज कोर्ट द्वारा दस्तावेजों की जांच के दौरान अदालत ने पुराने विभागीय रिकॉर्ड और पदोन्नति प्रक्रिया से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की गहराई से जांच की. इसी गहन जांच प्रक्रिया में विभाग द्वारा आवश्यक रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश नहीं किए जाने का मामला उजागर हुआ. इसके साथ ही याचिकाकर्ता को प्रतिकूल प्रविष्टियों की पूर्व जानकारी दिए जाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलने का बड़ा मुद्दा सामने आया. विभागीय लापरवाही और पारदर्शी प्रक्रिया के अभाव को अदालत ने काफी गंभीरता से लिया.

पदोन्नति का लाभ और अदालत का सख्त आदेश

मामले की पूरी सुनवाई संपन्न होने के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि राम अवतार सिंह यादव को 16 मार्च 1980 से इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति का पूरा लाभ प्रदान किया जाए. अदालत ने सरकार को उनकी सेवानिवृत्ति तक के वेतन और अन्य सभी अनुमन्य सेवा लाभों की सही गणना करने का आदेश दिया. इसके अनुरूप ही सेवानिवृत्तिगत लाभ तय कर त्वरित भुगतान करने का सख्त आदेश देते हुए चार सप्ताह की समयसीमा तय की है.

नियुक्ति से लेकर सेवा इतिहास और पहली अड़चन

राम अवतार सिंह यादव पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे और बाद में विभिन्न स्थानों पर थानाध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे. वर्ष 1973 से लेकर 1996 के दौरान विभागीय रिकॉर्ड में अलग-अलग वर्षों की प्रतिकूल और दंडात्मक प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया था. याचिकाकर्ता वर्ष 1999 में थानाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुए. इसके लंबे समय बाद 6 अप्रैल 2010 को डीजीपी कार्यालय द्वारा उनके पदोन्नति के कानूनी दावे को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया गया.

कानूनी लड़ाई के झटके और अंतिम अदालती फैसला

इसके बाद 30 नवंबर 2012 को राज्य लोक सेवा अधिकरण ने उनकी याचिका खारिज कर दी और 10 जून 2013 को समीक्षा याचिका भी खारिज हो गई.. फिर 16 फरवरी 2015 को हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका और 11 दिसंबर 2025 को बहाली अर्जी पैरवी के अभाव में खारिज हुई. अंततः मई से जुलाई 2026 के बीच 85 वर्षीय राम अवतार सिंह यादव ने हाईकोर्ट में लगातार प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त 2026 में न्याय मिला.

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शशांक शेखर मिश्रा

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By शशांक शेखर मिश्रा

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