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राजद्रोह के आरोपित बिहार के शरजील इमाम की याचिका पर UP, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Updated at : 26 May 2020 5:52 PM (IST)
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राजद्रोह के आरोपित बिहार के शरजील इमाम की याचिका पर UP, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नयी दिल्ली / पटना : संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ अभियान चलानेवाले बिहार के जहानाबाद निवासी व जेएनयू के छात्र शरजील इमाम की याचिका पर मंगलवार को चार राज्यों उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोटिस जारी किया है. न्यूज एजेन्सी भाषा के मुताबिक, राष्ट्रद्रोह का आरोप झेल रहे शरजील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में राजद्रोह के मामलों को एक साथ कर दिया जाये. सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम की याचिका पर दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का एक और मौका दिया है. याचिका में उसके खिलाफ दर्ज सारे आपराधिक मामले दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने और एक ही एजेन्सी से जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है.

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नयी दिल्ली / पटना : संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ अभियान चलानेवाले बिहार के जहानाबाद निवासी व जेएनयू के छात्र शरजील इमाम की याचिका पर मंगलवार को चार राज्यों उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोटिस जारी किया है. न्यूज एजेन्सी भाषा के मुताबिक, राष्ट्रद्रोह का आरोप झेल रहे शरजील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में राजद्रोह के मामलों को एक साथ कर दिया जाये. सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम की याचिका पर दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का एक और मौका दिया है. याचिका में उसके खिलाफ दर्ज सारे आपराधिक मामले दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने और एक ही एजेन्सी से जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर सरकार को नोटिस जारी किये. पीठ ने मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि उसे अपना जवाब दाखिल करने के लिए वक्त चाहिए. इमाम की याचिका पर न्यायालय ने एक मई को दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. मेहता ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा अकेले जवाब दाखिल करना पर्याप्त नहीं होगा और याचिका में बनाये गये अन्य प्रतिवादी राज्यों को भी नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया जाना चाहिए.

शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दिल्ली और अलीगढ़ में दिये गये दो भाषणों के संबंध में अलग-अलग राज्यों में पांच प्राथमिकियां दर्ज हैं. दवे ने अर्नब गोस्वामी मामले में न्यायालय के फैसले का हवाला दिया और कहा कि इमाम को भी उसके खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियां निरस्त करके मामले को दिल्ली में स्थानांतरित करके इसी तरह की राहत दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में इमाम के खिलाफ देशद्रोह के आरोप में मामले दर्ज हैं. दिल्ली पुलिस ने हाल ही में उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत भी मामला दर्ज किया है. अदालत ने कहा है कि मामले में दो सप्ताह बाद आगे सुनवाई की जायेगी. इस दौरान पांच राज्यों को अपने जवाब दाखिल करने चाहिए.

शरजील इमाम पर लगा है यूएपीए, …जानें क्या है आरोप

शरजील इमाम को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ में कथित भड़काने वाले भाषणों के सिलसिले में राजद्रोह के आरोप में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद से गिफ्तार किया था. दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून (यूएपीए) लगाया है. शरजील की वकील मिशिका सिंह के मुताबिक, शरजील के खिलाफ मामले में यूएपीए की धारा-13 (गैर कानूनी गतिविधि) के तहत आरोप जोड़े गये हैं. इससे पहले, पुलिस ने शरजील के खिलाफ राजद्रोह का आरोप दर्ज किया था. दिल्ली पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर आईपीसी की धारा 124 ए और 153 ए भी लगाया है. शरजील इमाम के खिलाफ असम में आतंकरोधी कानून के तहत एक मामला दर्ज किया गया है. मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.

शरजील इमाम ने कथित तौर पर असम और शेष पूर्वोत्तर को देश से अलग करने की धमकी दी थी. गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन विधेयक यानी यूएपीए एक कड़ा कानून है. किसी को भी व्यक्तिगत तौर पर आतंकवादी घोषित किया जा सकता है. यदि (1) आतंक से जुड़े किसी भी मामले में आरोपित की सहभागिता या किसी तरह का कोई कमिटमेंट पाया जाता है, (2) आतंकवाद की तैयारी, (3) आतंकवाद को बढ़ावा देना या (4) आतंकी गतिविधियों में किसी अन्य तरह की संलिप्तता पायी जाती है.

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Kaushal Kishor

लेखक के बारे में

By Kaushal Kishor

Kaushal Kishor is a contributor at Prabhat Khabar.

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