Gorakhpur News: नेपाल की देवशिलाओं से बनेगी राम-सीता की प्रतिमा, कल गोरखपुर पहुंचेंगे सदियों पुराने पत्थर

Gorakhpur News: गोरखपुर में नेपाल की काली गंडकी नदी से 6 करोड़ वर्ष पुरानी शालिग्राम की दो देवशिलाओं का भव्य स्वागत होगा. जिसकी अगुवाई गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ करेंगे.
Gorakhpur News: राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाली रामलला की नई मूर्ति के लिए नेपाल से 6 करोड़ वर्ष पुरानी शालिग्राम की दो देवशिलाएं कल गोरखपुर पहुंच जाएंगी. यहां इनका भव्य स्वागत होगा. इन दोनों देवशिलाओं से भगवान राम की बाल स्वरूप व माता सीता के विग्रह का निर्माण किया जाएगा. निर्माण का निर्णय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने लिया है. मूर्ति निर्माण के दौरान शीला की कटाई-छटाई से निकलने वाले कड़ों का विग्रह निर्माण में ही प्रयोग होगा.
नेपाल से अयोध्या पहुंचने से पहले गोरखपुर में देवशिलाओं का स्वागत होगा. जिसकी अगुवाई गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ करेंगे. 31 जनवरी को मुख्यमंत्री की अगुवाई में नेपाल के काली गंडकी नदी से 6 करोड़ वर्ष पुरानी शालिग्राम की दो देवशिलाओं का भव्य स्वागत होगा.
देवशिला का रात्रि विश्राम गोरखनाथ मंदिर में होगा. 1 फरवरी की सुबह विधि विधान से रथ अयोध्या के लिए प्रस्थान करेगा. गोरखनाथ मंदिर प्रबंधन ने मुख्यमंत्री योगी के निर्देशन में देवशिला के स्वागत की तैयारी शुरू कर दी है. देवशिला रथ के साथ आने वाले लोगों के विश्राम की व्यवस्था मंदिर परिसर स्थित हिंदू सेवा आश्रम में की गई है, और रथ मंदिर परिषद में खड़ा किया जाएगा.
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रचारक दुर्गेश त्रिपाठी ने बताया कि गोरखपुर शहर में रथ का प्रवेश 31 जनवरी को दोपहर बाद होने की संभावना है. प्रवेश द्वार जगदीशपुर में बनाया गया है. जहां भव्य स्वागत करने की तैयारी की गई है. जगदीशपुर से लेकर गोरखनाथ मंदिर तक पुष्प वर्षा की जाएगी. रथ के साथ 100 लोग मौजूद रहेंगे. उन्होंने बताया कि इनमें जानकी मंदिर जनकपुर के संत महात्मा और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र पंकज भी मौजूद होंगे.
नेपाल की काली गंडकी से निकाली गई, देवशिला यात्रा आज भारत नेपाल की जटही सीमा से मधुबनी में प्रवेश करेगी. यह यात्रा उन स्थलों से गुजरेगी, जहां कभी प्रभु श्री राम और माता जानकी की कदम पड़े थे. रविवार को जनकपुरधाम आस्था और भक्ति में डूबा रहा.
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सुबह से देर शाम तक मंदिर परिसर में देव शीला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही. जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास वैष्णव के निर्देशन में दोनों देवशिलाओं की परंपरागत तरीके से पूजा अर्चना की गई. 26 जनवरी को नेपाल से चली देवशिलाएं मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, कुशीनगर, गोरखपुर, संत कबीर नगर और बस्ती होते हुए 1 फरवरी को अयोध्या पहुंचेगी.
रिपोर्ट –कुमार प्रदीप, गोरखपुर
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