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इस शख्स ने बनाया है चुनाव हारने का रिकार्ड, जमानत जब्त होने के बाद भी नहीं कम होता इनका जज्बा

Updated at : 05 Apr 2021 3:13 PM (IST)
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इस शख्स ने बनाया है चुनाव हारने का रिकार्ड, जमानत जब्त होने के बाद भी नहीं कम होता इनका जज्बा

यूपी के आगरा में एक शख्स के संघर्ष की कहानी सुनकर आपको भी अचरज होगा. करीब तीन दशक से यह शख्स चुनाव लड़ रहा है, लेकिन हर बार उसे हार का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन फिर भी इसकी हिम्मत देखिए की अब एक बार फिर उसने पंचायत चुनाव के लिए नांमाकन कर दिया है.

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  • 92 बार हार चुके हैं चुनाव

  • फिर भी कम नहीं हुआ है उत्साह

  • एक बार फिर चुनाव के लिए हैं तैयार

यूपी के आगरा में एक शख्स के संघर्ष की कहानी सुनकर आपको भी अचरज होगा. करीब तीन दशह से यह शख्स चुनाव लड़ रहा है, लेकिन हर बार उसे हार का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन फिर भी इसकी हिम्मत देखिए की अब एक बार फिर उसने पंचायत चुनाव के लिए नांमाकन कर दिया है. इस शख्स का नाम है हस्नू राम अंबेडकरी. जो इस बार 93 वीं बार चुनाव के लिए नामांकन कर रहे हैं.

हस्नू राम वैसे तो पेश से मजदूर हैं. लेकिन उनके अंदर गजब का समाज सेवा करने का जूनून है. तभी तो 75 वर्ष की उम्र की दहलीज पर पहुंचने और इतनी हार के बाद भी उनका जूनून कम नहीं हुआ है. हस्नू लोकसभा, विधानसभा, मेयर, एमएलसी और जिला पंचायत के चुनाव हर बार लड़ते रहे है. यहां तक की एक बार उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी आवेदन किया था, लेकिन उनका पर्चा ही खारिज हो गया था.

कौन है हस्नू राम अंबेडकरीः हस्नू राम अंमेडकरी पहले आगरा तहसील में अमीन के पद पर कार्य करते थे. उनका नाता बीएसपी से भी रहा है. कहा जाता है कि जब उन्होंने पार्टी से टिकट मांगा था तो पार्टी ने उनकी मांग को यह कहकर खारिज कर दिया था कि तुम्हें तो तुम्हारी पत्नी भी वोट नहीं देगी. यह बात हस्नु को इतनी चुभी की उसी समय से उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया. हार पर हार होती रही लेकिन हस्नू ने चुनाव लड़ना नहीं छोड़ा.

92 बार लड़ चुके हैं चुनावः हस्नू राम अंबेडकरी अब तक 92 बार चुनाव लड़ चुके हैं. यह उनका 93वां चुनाव है. उन्होंने पहली बार 1984 में चुनाव लड़ा था. तब से लगातार वो चुनाव लड़ रहे हैं. 1988 में अंबेडकरी ने राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने की सोची थी. इसके लिए उन्होंने आवेदन भी किया था, लेकिन उनका पर्चा ही खारिज हो गया था. हर बार चुनाव में उनकी जमानत जब्त हो जाती है, लेकिन चुनाव लड़ने का जज्बा उनमें और जोर शोर से पैदा हो जाता है.

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Posted by: Pritish Sahay

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