गोरखपुर में सामूहिक आत्महत्या! पिता ने दो पुत्रियों के साथ किया सुसाइड, आर्थिक तंगी से जूझ रहा था परिवार

गोरखपुर में एक पिता और दो पुत्रियों का शव फंदे से लटका मिला है. एक कमरे में पंखे पर दोनों बेटियों का दुपट्टे से शव लटका मिला है. वहीं दूसरे पंखे पर पिता का शव लटका मिला है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई है. साथ ही तीनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं.
Gorakhpur News: गोरखपुर से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक पिता और दो पुत्रियों का शव फंदे से लटका मिला है. कमरे में पंखे पर दोनों बेटियों का दुपट्टे से शव लटका मिला है. वहीं दूसरे पंखे पर पिता का शव लटका मिला है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई है. साथ ही तीनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुसाइड का कारण आर्थिक तंगी बताया जा रहा है.
दरअसल, ये घटना शाहपुर थाना क्षेत्र के गीता वाटिका स्थित घोसीपुरवा की है. यहां एक घर के अंदर पिता और दो बेटियों का शव बरामद हुआ है. मृतक युवक के पिता सुबह जब एक प्राइवेट अस्पताल में सिक्योरिटी की नौकरी करने के बाद वापस लौटे तो घर के अंदर का दृश्य देख उनके होश उड़ गए. आनन-फानन में पुलिस को घटना की जानकारी दी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. फिलहाल, मामले की जांच जारी है.
दरअसल, आज मंगलवार की सुबह जब ओम प्रकाश श्रीवास्तव अपनी गार्ड की ड्यूटी पूरी करके घर पहुंचे, तो घर का दरवाजा खुला हुआ था. जब घर में दाखिल हुए तो घर के अंदर उनकी दोनों पोतियां एक कमरे में पंखे पर फंदे से लटकी हुई थीं, और दूसरे कमरे में उनका बेटा जितेंद्र श्रीवास्तव पंखे पर फंदे से लटका हुआ था. जिसकी सूचना उन्होंने बगल में रहने वाले अपने दूसरे बेटे को दी. मृतक के परिवार वालों ने बताया कि, रोज घर का दरवाजा बंद रहता था, लेकिन आज जब ओम प्रकाश श्रीवास्तव ड्यूटी करके घर पर आए तो दरवाजा खुला हुआ था.
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई. जब घर की छानबीन की तो वहां एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें मृतक ने सुसाइड नोट में तोता छोड़ने का जिक्र किया है. बताते चलें मृतक जितेंद्र और उनकी दोनों बेटियां ने घर में 4 साल पहले दो तोतों (पक्षी) को पाली था. घर में दोनों तोते कपड़े से ढके मिले, परिवार वालों ने जब तोते को बाहर निकालकर उड़ाने की कोशिश की तो तोते उड़े नहीं. दोनों तोतों का नाम पैबलों और लिली है.
मृतक जितेंद्र अपने घर में ही सिलाई का काम करते थे, एक हादसे के दौरान जितेंद्र का सन 1999 में एक पैर कट गया था. उसके बाद से कृत्रिम पैर के सहारे वह घर पर ही काम करते थे. उनकी दो बेटियां मान्या और मानवी कक्षा नौ और सात की छात्र थीं और पास में ही आवास विकास कॉलोनी में स्थित सेंट्रल एकेडमी स्कूल में पढ़ती थीं. परिवार वालों ने बताया कि, सोमवार को बाल दिवस पर दोनों ने संस्कृत कार्यक्रम में हिस्सा भी लिया था. बताया जा रहा है की कुछ साल पहले जितेंद्र और उसकी भाई ने बंटवारा हो गया था. जितेंद्र के पिता गार्ड की नौकरी करते हैं और वह अपने बड़े बेटे जितेंद्र के साथ रहते थे.
शुरुआती जांच में यह भी बात सामने आई है कि, जितेंद्र करीब 12 लाख रुपए से अधिक के कर्ज में डूबा हुआ था. वहीं इस मामले में गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर गौरव ग्रोवर ने बताया कि, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है .फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की है. घटना वाली जगह से कुछ चीजें मिली हैं. जिसकी जांच के बाद पता चल सकेगा कि घटना सुसाइड की है या हत्या की? उन्होंने बताया की परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात सामने आ रही है. फिलहाल पुलिस पहलुओं पर जांच जारी है.
रिपोर्टर– कुमार प्रदीप, गोरखपुर
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By Sohit Kumar
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