Etah Fake Encounter: 5 पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास, 4 को पांच-पांच साल की जेल, 13 साल चली सुनवाई...
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 Dec 2022 4:52 PM
वर्ष 2009 में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद 13 साल चली सुनवाई में 202 लोगों की गवाही के बाद साबित हुआ कि सिपाही राजेंद्र ने राजाराम से अपने घर की रसोई में काम कराया था. राजाराम ने मजदूरी के रुपये मांग लिए थे. सिपाही ने मना किया तो राजाराम अड़ गया था. इसी पर सिपाही ने साजिश रच ली.
Lucknow: प्रदेश के जनपद एटा में 16 साल पहले फर्नीचर कारीगर राजाराम की हत्या कर मुठभेड़ का रूप देने के मामले में गाजियाबाद की सीबीआई अदालत ने बुधवार को सजा का ऐलान किया. कोर्ट ने दोषी पांच पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास और 33-33 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. वहीं चार पुलिसकर्मियों को पांच-पांच साल जेल व 11-11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा का ऐलान किया गया. एक आरोपी पुलिसकर्मी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है.
कोर्ट के फैसले के मुताबिक जिन दोषी पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास और 33-33 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है, उनमें पवन सिंह, पाल सिंह ठनवा, सरनाम सिंह, राजेंद्र प्रसाद और मोहकम सिंह है. वहीं बलदेव सिंह, अजय कुमार, अवधेश रावत और सुमेर सिंह को 5- 5 वर्ष कारावास और 11-11 हजार अर्थदण्ड की दिया गया है.
वर्ष 2009 में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद 13 साल चली सुनवाई में 202 लोगों की गवाही के बाद साबित हुआ कि सिपाही राजेंद्र ने राजाराम से अपने घर की रसोई में काम कराया था. राजाराम ने मजदूरी के रुपये मांग लिए थे. सिपाही ने मना किया तो राजाराम अड़ गया था. इसी पर सिपाही ने साजिश रच ली. राजाराम पर एक भी केस दर्ज न होने के बावजूद सिढ़पुरा थाने की पुलिस ने उसे लुटेरा बताया. उसका शव परिवारवालों को देने के बजाय खुद ही अज्ञात में दाह संस्कार कर दिया था.
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक अनुराग मोदी ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट में दर्ज परिवाद में राजाराम की पत्नी संतोष कुमारी ने बताया था कि उसके पति को थाना सिढ़पुरा जिला एटा के पुलिसकर्मी पवन सिंह, पालसिंह ठेनुवा, अजंट सिंह, सरनाम सिंह और राजेन्द्र प्रसाद ने 18 अगस्त 2006 को दोपहर तीन बजे उठा लिया था. उस समय वह पति राजाराम, जेठ शिव प्रकाश, देवर अशोक के साथ अपनी बीमार बहन राजेश्वरी देवी को पहलोई गांव में देखने जा रही थी.
संतोष कुमारी के मुताबिक उसने पति को पुलिस से छुड़ाने का प्रयास किया. लेकिन, पुलिसकर्मियों ने कहा कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं, अगले दिन छोड़ देंगे. 28 अगस्त 2006 को थाना सिढ़पुरा की पुलिस ने एक लुटेरे की मुठभेड़ में मौत बताई. उसके शव को अज्ञात में जला देने के बाद बताया कि वह राजाराम था. संतोष ने बताया कि वे पहले केस दर्ज कराने के लिए थाने गए तो पुलिस ने भगा दिया.
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जिला अदालत में प्रार्थना पत्र दिया तो अर्जी खारिज हो गई. इसके बाद वे लोग हाईकोर्ट गए. हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. 2007 में जांच शुरु कर सीबीआई ने 2009 में सिढ़पुरा के तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार सिंह सहित दस पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया. सुनवाई के दौरान आरोपी दरोगा अजंट सिंह की मृत्यू हो गई. नौ पुलिसकर्मी हत्या और साक्ष्य मिटाने के दोषी सिद्ध हुए.
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