Kanpur News: हैलट के मेडिकल स्टोर में ड्रग विभाग की छापेमारी, जांच के लिए लखनऊ भेजे गए सैंपल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 17 Aug 2022 1:25 PM
Kanpur News: हैलट अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर ड्रग विभाग ने छापेमारी की है. टीम ने दवाओं की जांच के बाद दो इंजेक्शन के सैंपल लैब में टेस्टिंग के लिए भेज दिए हैं. रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.
Kanpur News: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से सम्बंधित हैलट अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर ड्रग विभाग ने छापेमारी की है. यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन से भेजी गईं घटिया दवाओं की शिकायत लगातार ड्रग विभाग को मिल रही थी, जिसके बाद स्टोर में छापेमारी की गई. टीम ने दवाओं की जांच के बाद दो इंजेक्शन के सैंपल लैब में टेस्टिंग के लिए भेज दिए हैं.
ड्रग विभाग ने हैलट अस्पताल के मेडिकल स्टोर पर छापेमारी के बाद 7 हजार पैंटोप्राजोल (Pantoprazole) इंजेक्शन को मरीजों को देने पर रोक लगा दी. पैंटोप्राजोल के सभी इंजेक्शनों को टेस्ट रिपोर्ट आने तक सील कर दिया गया है. इन इंजेक्शन की सैकड़ों वायल में साल्ट सफेद की जगह पीले रंग का पाया गया, ऐसे में माना जा रहा है कि यह इंजेक्शन मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकता है.
औषधि निरीक्षक संदेश मौर्या का कहना है कि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (UPMSC) से आपूर्ति हुए पैंटोप्राजोले इंजेक्शन एक ही बैच के हैं, लेकिन रंग अलग-अलग पाए गए थे. इस इंजेक्शन का बैच नंबर S1H027 की निर्माण तिथि अगस्त 2021 है, जबकि खराब होने की तिथि जुलाई 2023 है. इस इंजेक्शन की निर्माता कंपनी हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी के किशनपुरा स्थित एरियान लाइफ साइंस है, जिसे गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिशनर का प्रमाणपत्र भी हासिल है.
इसके इंजेक्शन की जांच रिपोर्ट लखनऊ से आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा एंटीबायोटिक इंजेक्शन एमोक्सीसिलीन व पोटेशियम क्लैवुलनेट इंजेक्शन के सैंपल भी लिए गए हैं. यह इंजेक्शन भी हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी स्थित एएनजी लाइफ साइंस का है, जो फरवरी 2022 में तैयार किया गया, जिसका बैच नंबर 192039 है.
वहीं, इस पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला और एसआईसी प्रो. आरके मौर्या ने पिछले हफ्ते हैलट के दवा स्टोर का निरीक्षण कर कारपोरेशन से आए पैंटोप्राजोले इंजेक्शन को दोयम दर्जे का पाया था, जिसके बाद उन्होंने इंजेक्शन पर रोक लगाते हुए औषधि नियंत्रक विभाग को पूरे मामले से अवगत कराया था.
रिपोर्ट- आय़ुष तिवारी
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