Babri Masjid Demolition Case: सीबीआई ने हाईकोर्ट में दायर की आपत्ति, 26 सितंबर को अगली सुनवाई

Palghar: Wreackage of the Mercedes car in which businessman and former Tata Sons Chairman Cyrus Mistry was travelling when it met with an accident in Palghar, Sunday, Sept. 4, 2022. Mistry, 54, died in the accident. (PTI Photo)(PTI09_04_2022_000223A)
कारसेवकों द्वारा छह दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया था गौरतलब है कि विशेष सीबीआई अदालत ने 30 सितम्बर 2020 को फैसला सुनाते हुए मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया था.
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी सहित सभी 32 आरोपियों को बरी करने की विशेष सीबीआई अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली आपराधिक अपील पर आपत्ति दर्ज कराई.
26 सितंबर को मामले पर अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रेणु अग्रवाल की पीठ ने हाजी महबूब अहमद और सैयद अखलाक अहमद की अपील पर अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तारीख तय की. पीठ के सामने जब मामला आया तब सीबीआई के अधिवक्ता शिव पी शुक्ला एवं सरकारी अधिवक्ता विमल कुमार श्रीवास्तव ने अपील पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता मामले के प्रभावित नहीं थे, इसलिए, उन्हें आरोपी व्यक्तियों को बरी किए जाने के खिलाफ वर्तमान अपील दायर करने का कोई अधिकार नहीं था. इससे पहले, याचिकाकर्ताओं ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी, जिसे न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-372 के तहत विचारणीय नहीं माना.
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विशेष सीबीआई अदालत ने 30 सितम्बर 2020 को लालकृष्ण आडवाणी समेत 32 को किया बरी
कारसेवकों द्वारा छह दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया था गौरतलब है कि विशेष सीबीआई अदालत ने 30 सितम्बर 2020 को फैसला सुनाते हुए मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, लोकसभा सदस्यों साक्षी महाराज, लल्लू सिंह व बृजभूषण शरण सिंह समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया था.
अपीलकर्ताओं ने सभी 32 आरोपियों को दंडित करने का अनुरोध किया
विशेष अदालत ने समाचार पत्र की कतरनों, वीडियो क्लिप को सबूत के तौर पर मानने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उनके मूल दस्तावेज पेश नहीं किए गए थे, जबकि पूरा मामला इन्हीं दस्तावेजी साक्ष्यों पर टिका था. निचली अदालत के न्यायाधीश ने यह भी कहा कि सीबीआई इस बात का कोई सबूत पेश नहीं कर सकी कि आरोपी की कारसेवकों के साथ मनमुटाव था, जिन्होंने ढांचे को तोड़ा। निचली अदालत के निष्कर्षों को चुनौती देते हुए अपीलकर्ताओं ने दलील दी कि निचली अदालत ने आरोपी व्यक्तियों को दोषी नहीं ठहराने में गलती की, जबकि पर्याप्त सबूत रिकॉर्ड में थे. याचिका में, अपीलकर्ताओं ने 30 सितंबर, 2002 के फैसले को रद्द करने और सभी 32 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें दंडित करने का अनुरोध किया है.
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