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PM मोदी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर जमकर हुई बहस

Updated at : 19 Oct 2016 9:55 PM (IST)
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PM मोदी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर जमकर हुई बहस

इलाहाबाद : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख निर्धारित की जिसमें वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन को चुनौती दी गई है. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाये और मुकदमा नहीं चलाया […]

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इलाहाबाद : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख निर्धारित की जिसमें वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन को चुनौती दी गई है. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाये और मुकदमा नहीं चलाया जाये, क्योंकि याचिकाकर्ता के आरोप तुच्छ और महत्वहीन हैं. न्यायमूर्ति वी के शुक्ला के समक्ष दलील रखते हुए मोदी के वकील सत्यपाल जैन ने कहा कि कांग्रेस विधायक अजय राय द्वारा दायर याचिका विचारणीय नहीं है क्योंकि इसमें लगाए गए कोई भी आरोप जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत नहीं आते.

टी शर्ट और पोस्टर बांटने का आरोप

राय ने वाराणसी से मोदी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा था. चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को मोदी की तस्वीरों वाला पोस्टर और टी-शर्ट बांटे जाने के आरोपों का जवाब देते हुए जैन ने कहा कि इस तरह के कृत्यों को उम्मीदवार की तरफ से तभी कदाचार बताया जा सकता है जब यह साबित हो कि प्रचार में शामिल लोग उनकी सहमति से कार्य कर रहे थे. याचिकाकर्ता इसे यहां स्थापित करने में विफल रहे हैं. जैन ने कहा कि इसके अलावा टी-शर्ट और पोस्टरों का कथित वितरण मोदी के नामांकन पत्र दायर करने से पहले हुआ था.

कोर्ट ने सुनी पूरी दलील

आरपीए के अनुसार कि चुनाव लड़ रहा व्यक्ति उस तारीख से उम्मीदवार माना जायेगा, जब वह अपना नामांकन पत्र दायर करता है. उस तारीख से पहले निर्वाचन क्षेत्र में जो कुछ भी होता है उसे उम्मीदवार के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. जैन अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं. जैन विधि आयोग के सदस्य भी हैं. उन्होंने राय के आरोपों को खारिज कर दिया कि मोदी द्वारा दायर नामांकन पत्र में खामियां थीं. जैन ने कहा कि इस संबंध में मुख्य आपत्ति इस तथ्य के संबंध में है कि मोदी ने अपनी आय और अपनी पत्नी के अन्य विवरणों से जुड़े कॉलम में ज्ञात नहीं लिखा था.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हालांकि, इस संंबंध में उच्चतम न्यायालय का एक फैसला है, जिसके अनुसार ऐसा करना कानून के अनुसार है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा, नामांकन पत्र की चुनाव अधिकारियों ने जांच की थी और किसी ने भी मोदी द्वारा सौंपे गए विवरण पर कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही उसमें कोई गलती पाई. अंत में अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 15 नवंबर को निर्धारित कर दी. जैन ने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार कहा था कि चुनाव को हल्के में नहीं निरस्त किया जाना चाहिए क्योंकि प्रक्रिया में महज उम्मीदवार शामिल नहीं होता है बल्कि समूचा निर्वाचन क्षेत्र शामिल होता है. जैन ने कहा कि चुनाव याचिका में दम नहीं है. यह महत्वहीन और तुच्छ है. इसके अलावा यह विचारणीय नहीं है और इसलिए हम प्रार्थना करते हैं कि इसे शुरुआत में ही खारिज किया जाए और मुकदमा नहीं चलाया जाए. जैन चंडीगढ़ से लोकसभा के पूर्व सदस्य भी हैं. जैन को अदालत ने 15 नवंबर को दलीलें रखने के लिए और वक्त दिया.

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