बिजली विवाद:अखिलेश ने कोयला आपूर्ति और केंद्रीय पूल से बिजली कोटा बढाने की मांग की

Published at :31 May 2014 9:30 AM (IST)
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बिजली विवाद:अखिलेश ने कोयला आपूर्ति और केंद्रीय पूल से बिजली कोटा बढाने की मांग की

लखनऊ :उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में व्याप्त बिजली संकट से निपटने के लिये केंद्र सरकार से राज्य को केंद्रीय बिजली घरों से मिलने वाली बिजली की मात्रा में एक हजार यूनिट की बढोत्तरी तथा विद्युत उत्पादन गृहों को मिलने वाले कोयले की मात्रा बढाये जाने की मांग की है. मुख्यमंत्री ने […]

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लखनऊ :उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में व्याप्त बिजली संकट से निपटने के लिये केंद्र सरकार से राज्य को केंद्रीय बिजली घरों से मिलने वाली बिजली की मात्रा में एक हजार यूनिट की बढोत्तरी तथा विद्युत उत्पादन गृहों को मिलने वाले कोयले की मात्रा बढाये जाने की मांग की है.

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय उर्जा एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल को आज लिखे पत्र में कहा है कि केंद्रीय विद्युत गृहों में उत्तर प्रदेश का आवंटित अंश 6002 मेगावाट है , जिसके सापेक्ष वर्तमान में लगभग 4200 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है. उन्होंने उर्जा मंत्री से यह मात्रा बढाकर कम से कम 5200 मेगावाट कर देने की मांग की है ,जैसी कि लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश को मिल रही थी.

अखिलेश ने कोयले की समुचित आपूर्ति नहीं होने के कारण कोयला आधारित विभिन्न बिजली घरों में उत्पादन में आयी कमी का जिक्र करते हुए कहा है कि प्रदेश के बिजली घरों को पूरी क्षमता से चलाने के लिये यथाशीघ्र कोयले की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित की जाय. गोयल को लिखे पत्र में अखिलेश ने कहा है कि कोल इण्डिया लिमिटेड से आवंटित कोयला पूरी मात्र में प्रदेश को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है जिसके कारण अनपरा ए बी तथा निजी सेक्टर की अनपरा सी परियोजना में विद्युत उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड रहा है. अत:समुचित मात्र में कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जाय.

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश ग्रिड की टोटल ट्रांसफर कैपेसिटी :टी टी सी:को सीमा को 6200 मेगावाट से घटाकर 5700 मेगावाट कर दिये जाने को भी बिजली संकट का एक बडा कारण बताते हुए इसकी सीमा बढाये जाने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि टी0टी0सी0 सीमा कम होने के कारण पश्चिमी कारिडोर से हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध होने के बावजूद वह प्रदेश में लायी नहीं जा पा रही है , अत: भीषण गर्मी की स्थिति को देखते हुए यह सीमा बढायी जानी चाहिए.

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