Rourkela News: विकास के मामले में सुंदरगढ़ जिला अपने पड़ोसी जिलों संबलपुर और झारसुगुड़ा से लगातार पिछड़ता जा रहा है. संबलपुर में हालिया विकास की रफ्तार ने तो सभी को चौंका दिया है. अकेले राउरकेला में विकास की आधा दर्जन बड़ी परियोजनाएं कई सालों से लंबित पड़ी हैं. काम कबतक पूरे होंगे पता नहीं है. इसके उलट संबलपुर में बनाया गया इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आइआइएम) और झारसुगुड़ा में बना एयरपोर्ट विकास की नयी इबारत लिख रहे हैं. केवल दो सौगातों ने देश के मानचित्र में दोनों जिलों को खड़ा कर दिया है.
राउरकेला के लिए घोषित जेवियर कॉलेज महज कागजों में सिमटा
आइआइएम जब संबलपुर जिले को मिला था, तो राउरकेला के लोगों को खुश करने के लिए जेवियर कॉलेज की घोषणा की गयी थी, लेकिन यह कागजों में ही सिमटा रह गया. कोई काम इस दिशा में नहीं हुआ. जबकि यह बीजद सरकार के समय कैबिनेट का फैसला था. यह राजनीतिक मुद्दा भी बना, फिर 2024 में सरकार बदल गयी. नयी सरकार को भी अब दो साल होने जा रहे हैं, लेकिन जेवियर पर कोई बात आगे नहीं बढ़ी. इसी तरह बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम बनने के बाद राउरकेला एयरपोर्ट को विकसित कर वर्ष 2023 में शुरू किया गया. लेकिन अपनी शुरुआत से ही यह एयरपोर्ट समस्याएं झेल रहा है. राउरकेला और भुवनेश्वर के बीच विमान सेवा शुरू हुई थी, फिर कोलकाता तक सेवा का विस्तार हुआ. इसके बाद कोलकाता को हटाकर राउरकेला-भुवनेश्वर के बीच सेवा सीमित की गयी. इसके बाद विमान सेवा बंद हो गयी और कई आंदोलनों के बाद नयी सेवा पांच दिसंबर 2024 को नौ सीटर विमान के रूप में शुरू हुई. वह भी पुराने रूट राउरकेला-भुवनेश्वर के बीच. दिल्ली और कोलकाता के लिए सीधी विमान सेवा एक ख्वाब बनकर रह गयी. वहीं झारसुगुड़ा एयरपोर्ट की बात करें, तो यहां से ना केवल दिल्ली, बल्कि मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु के लिए विमान सेवा चल रही है. लगातार एयरपोर्ट का विकास हो रहा है.
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी आ रही आड़े
सुंदरगढ़ जिले के सांसद जुएल ओराम केंद्र सरकार में जनजातीय मामलों के मंत्री हैं. वहीं संबलपुर जिला के सांसद धर्मेंद्र प्रधान केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री है. जुएल ओराम तीसरी बार इस मंत्रालय को संभाल रहे हैं, जबकि धर्मेंद्र प्रधान बतौर शिक्षा मंत्री दूसरी बार केंद्रीय मंत्री बने हैं. संबलपुर में एक के बाद एक विकास के कार्य नजर आ रहे हैं, जबकि सुंदरगढ़ जिले से जुड़ी पुरानी विकास परियोजनाएं ही पूरी नहीं हो पा रही हैं. छह दशक पुराने तालचेर-बिमलगढ़ रेलमार्ग की आस में कई पीढ़ियां गुजर गयीं, लेकिन यह परियोजना पूरी नहीं हो पायी है. इसी तरह राउरकेला रेलवे स्टेशन के विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद हकीकत में कोई काम नहीं हुआ. आसपास के रेलवे स्टेशनों के मुकाबले बुनियादी सुविधाएं भी स्टेशन में नदारद हैं. इन लंबित परियोजनाओं को कब पूरा किया जायेगा, इसकी भी कोई डेडलाइन तय नहीं है.
राउरकेला को है इन परियोजनाओं के पूरा होने का इंतजार
हर बीतने वाले साल के बाद नये साल में विकास परियोजनाओं के पूरा होने की उम्मीद शहरवासी पाल रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा मिल रही है. ऐसा पिछले पांच सालों से लगातार देखा जा रहा है. यह परियोजनाएं पिछले साल के अंदर शुरू हुई हैं, जो अबतक पूरी नहीं हुई. नये साल 2026 में भी कितनी परियोजनाएं पूरी हो पायेंगी, उसे लेकर भी संशय है.
1. पानपोष हॉकी चौक के पास निर्माणाधीन राउरकेला-वन कमांड सेंटर2. राउरकेला में पुलिस कमिश्नरेट
3. कोयल नदी पर बन रहा हमीरपुर बराज4. ब्राह्मणी नदी पर बन रहा जमुनानाकी ब्रिज
5. कोयलनगर रिक्रीएशन पार्क6. छेंड में साइंस प्लेनेटोरियमजनप्रतिनिधियों पर जनता का दबाव जरूरी
बीजू जनता दल के नेता बीरेन सेनापति ने कहा कि जिन जिलों की हम तुलना कर रहे हैं, वहां पर लोग अपने जिले के विकास को लेकर बेहद गंभीर हैं. उनका अपने जनप्रतिनिधियों पर दबाव भी बना रहता है. मेरा व्यक्तिगत मानना है कि कहीं ना कहीं हमसे इस क्षेत्र में चूक हो रही है. नयी योजनाओं को छोड़िये पुरानी परियोजनाएं पूरी नहीं हो रहीं. यह सभी जिलेवासियों के सोचने का वक्त है और जनप्रतिनिधियों का भी. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष साबिर हुसैन ने कहा कि डबल इंजिन की सरकार विकास को लेकर पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है. राउरकेला और सुंदरगढ़ जिले से करोड़ों का राजस्व सरकार वसूलती है, लेकिन जब विकास की बात आती है, तो यहां की अनदेखी की जाती है. आगामी दिनों में हम इन मुद्दों को उठायेंगे और लोगों को जागरूक करेंगे, ताकि इसके खिलाफ एक जनआंदोलन खड़ा हो.
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