Rourkela News : ओम्ब्रिक पहल में मुख्य समुद्री जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान को आगे बढ़ायेगा एनआइटी राउरकेला

Published by : SUNIL KUMAR JSR Updated At : 12 Aug 2025 10:50 PM

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समारोह में ओडिशा के मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और छह प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये.

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Rourkela News : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) राउरकेला, ओडिशा समुद्री जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार गलियारे (ओम्ब्रिक) में एक रणनीतिक भागीदार बन गया है. जिसका शुभारंभ मंगलवार 12 अगस्त काे ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर में किया. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, ओडिशा सरकार के नेतृत्व में इस पहल का उद्देश्य राज्य को अत्याधुनिक समुद्री जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान, नवाचार और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है. शुभारंभ समारोह में ओडिशा के मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और छह प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये. एनआइटी राउरकेला, आइआइटी भुवनेश्वर, ब्रह्मपुर विश्वविद्यालय, फकीर मोहन विश्वविद्यालय (बालेश्वर), आइआइएसइआर ब्रह्मपुर और आइएलएस भुवनेश्वर इसमें शामिल है. एनआइटी राउरकेला का प्रतिनिधित्व करते हुए, प्रो. रोहन धीमान (एनआइटीआर के रजिस्ट्रार और परियोजना के प्रधान अन्वेषक) और प्रो सुरजीत दास (परियोजना समन्वयक और परियोजना के प्रधान अन्वेषक) ने समारोह में भाग लिया और संस्थान की ओर से गवाह के रूप में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए. देश के छह प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी करते हुए, ओम्ब्रिक जीन खोज, जैवसक्रिय यौगिकों, जैवउपचार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति का नेतृत्व करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे ओडिशा तटीय नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित होता है.एनआइटी राउरकेला उन्नत समुद्री सूक्ष्म जीव विज्ञान अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करेगा. जिसमें विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों से सूक्ष्मजीव समुदाय विश्लेषण और संवर्धन-निर्भर समुद्री जीवाणु विविधता की पहचान, जिसमें बंगाल की खाड़ी के ओडिशा तट के तटीय स्थल और मैंग्रोव वातावरण, डिजाइनर सिंथेटिक मीडिया का उपयोग करके असंवर्धित सूक्ष्मजीवों का संवर्धन,औषधीय और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए नवीन जैवसक्रिय यौगिकों के लिए समुद्री सूक्ष्मजीवी पृथक्करणों की जांच शामिल है. इस उपलब्धि पर, प्रो के उमामहेश्वर राव (निदेशक, एनआइटी राउरकेला) ने कहा कि हमें ओडिशा सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथ दूरदर्शी ओडिशा समुद्री जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार गलियारा (ओम्ब्रिक) पहल में भागीदारी करने पर गर्व है. यह ऐतिहासिक कार्यक्रम हमारे समुद्री जैव संसाधनों के मानचित्रण और निगरानी, कुशल जनशक्ति के प्रशिक्षण, और मजबूत क्षेत्रीय एवं औद्योगिक नेटवर्क के माध्यम से समुद्री जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों एवं अनुसंधान को समर्थन देने के लिए राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. शोधकर्ता समुद्री विविधता की खोज, विश्लेषण और नवीन समुद्री सूक्ष्मजीवों की खेती में योगदान दे सकते हैं. यह विज्ञान, नीति और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ने वाले सहयोगों को भी मजबूत करेगा. यह बहु-संस्थागत अनुसंधान पहल, विकासशील ओडिशा-2036 की आकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, और एनआइटी राउरकेला को इस परिवर्तनकारी यात्रा का हिस्सा बनने पर गर्व है. ओम्ब्रिक का शुभारंभ ओडिशा के अग्रणी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच एक रणनीतिक सहयोग का प्रतिनिधित्व करता है, जो अनुसंधान और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटता है और युवा नवप्रवर्तकों को ऐसे समुद्री जैव प्रौद्योगिकी उद्यम बनाने में सक्षम बनाता है जो वैश्विक मानकों का पालन करते हुए ओडिशा की ताकत को उजागर करते हैं.

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