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Bhubaneswar News: जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा का पालन करे इस्कॉन, वरना कानूनी कार्रवाई को होंगे विवश : गजपति महाराज

Updated at : 05 Nov 2024 11:26 PM (IST)
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Bhubaneswar News: जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा का पालन करे इस्कॉन, वरना कानूनी कार्रवाई को होंगे विवश : गजपति महाराज

Bhubaneswar News: पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने असामयिक रथयात्रा आयोजित करने पर इस्कॉन को चेतावनी दी है. कहा कि इसके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई का सहारा लेंगे.

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Bhubaneswar News: भगवान जगन्नाथ के आद्य सेवक तथा पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अगर इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉनशियस्नेस (इस्कॉन) भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को पारंपरिक रूप से निर्धारित तिथियों के बाहर आयोजित करता है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. निर्धारित समय से इतर रथयात्रा का मुद्दा हाल ही में तब सामने आया, जब अमेरिका में इस्कॉन की ह्यूस्टन इकाई ने नवंबर में त्योहार मनाने का फैसला किया, जो पुरी के मंदिर की सामान्य परंपरा से हटकर है. पुरी में रथयात्रा तय तिथि पर जुलाई में निकाली गयी थी. इधर, इस्कॉन की ओर से नौ नवंबर को अमेरिका के लीजियन पार्क में श्री जगन्नाथ रथयात्रा आयोजित की जानी है. गजपति महाराज के आपत्ति जताने के बावजूद यह कार्यक्रम इस्कॉन की वेबसाइट पर सूचीबद्ध है. गजपति महाराज, जो श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने इस्कॉन की गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि संस्था के वैश्विक केंद्र रथयात्रा और स्नान यात्रा की तिथियों का शास्त्रों और परंपरा के अनुसार पालन करें. एक प्रेस वार्ता में गजपति महाराज ने कहा कि इन तिथियों से कोई भी विचलन विश्व भर में करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की भावनाओं को आहत करता है. उन्होंने कहा कि हालांकि इस्कॉन ने तीन नवंबर को प्रस्तावित स्नान यात्रा को रद्द कर दिया है, लेकिन नौ नवंबर को ह्यूस्टन में रथयात्रा के संबंध में कोई घोषणा नहीं की गयी है.

केवल स्नान यात्रा और रथयात्रा के अवसर पर मंदिर के बाहर आते हैं भगवान जगन्नाथ

गजपति महाराज ने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार भगवान जगन्नाथ केवल स्नान यात्रा और रथयात्रा के अवसर पर ही मंदिर से बाहर आते हैं. इस्कॉन वैष्णव धर्म का प्रचार कर सकता है, लेकिन परंपराओं में खलल नहीं डालना चाहिए. गजपति महाराज ने बताया कि इस्कॉन 1967 से असमय रथयात्रा का आयोजन कर रहा है, सबसे पहली बार सैन फ्रांसिस्को में यह उत्सव हुआ था. अक्तूबर, 2007 में लुधियाना और दिसंबर, 2007 में दिल्ली में भी ऐसे आयोजन किये गये थे. सतत संवाद और प्रयासों के बाद जुलाई, 2021 के बाद भारत में ऐसे असमय रथयात्रा का आयोजन बंद हो गया है, लेकिन विदेशों में यह प्रथा जारी है.

हम इस मुद्दे का सौहार्द्रपूर्ण समाधान चाहते हैं

महाराज दिव्यसिंह देव ने बताया कि बताया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन इस्कॉन के वरिष्ठ सदस्यों और स्वामियों के संपर्क में है. हालांकि, इस्कॉन के तब तक अपनी योजनाओं में बदलाव करने की संभावना नहीं है, जब तक कि मार्च में होने वाली उनकी गवर्निंग बॉडी की बैठक में इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जाता. उन्होंने कहा कि हम शांतिप्रिय और धैर्यवान लोग हैं. हम इस मुद्दे का सौहार्द्रपूर्ण समाधान चाहते हैं. उन्होंने कहा कि अब बहुत हो चुका है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस्कॉन श्रीमंदिर की परंपराओं का पालन नहीं करता है, तो कानूनी कार्रवाई अंतिम उपाय के रूप में की जायेगी. उन्होंने कहा कि हम तर्क और शास्त्र के माध्यम से समझौता करने में विश्वास करते हैं.

ओडिशा के कानून मंत्री ने भी गजपति महाराज का किया समर्थन

इधर, ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने गजपति महाराज के बयान का पूरा समर्थन किया और कहा कि इस्कॉन को भगवान जगन्नाथ के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और नौ नवंबर को अपनी असामयिक रथयात्रा रोक देनी चाहिए. पुरी का जगन्नाथ मंदिर राज्य सरकार के कानून विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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