Sundergarh News: बड़गांव रामलीला यात्रा में मना राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्मोत्सव

Published by :BIPIN KUMAR YADAV
Published at :28 Mar 2026 11:36 PM (IST)
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Sundergarh News: बड़गांव रामलीला यात्रा में मना राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्मोत्सव

Sundergarh News: सुंदरगढ़ के बड़गांव में ऐतिहासिक रामलीला यात्रा में शुक्रवार शाम राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्मोत्सव मनाया गया.

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Sundergarh News: सुंदरगढ़ जिले के बड़गांव में ऐतिहासिक रामलीला यात्रा शुक्रवार शाम शुरू हुई. प्रथम दिवस पर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्मोत्सव मनाया गया. नाटक के माध्यम से बताया गया कि राक्षसों के अत्याचार से परेशान देवताओं ने भगवान ब्रह्मा को इसकी जानकारी दी. ब्रह्मा ने विष्णुलोक में भगवान विष्णु की शरण ली और देवताओं से बातचीत की. वहां भगवान विष्णु ने आश्वासन दिया कि वे अयोध्या नगरी में राजा दशरथ के घर में चार पुत्रों को जन्म देंगे और अत्याचार दूर करेंगे.

राजा दशरथ ने कराया पौतृष्टि यज्ञ

दूसरी ओर वर्षा न होने के कारण राजा लोमपद के नगर में विलाप हो रहा था. लोमपद नगर की एक वेश्या जरका ने ऋषि श्रृष्यश्रृंग को नगर में आमंत्रित किया. जब ऋषि के चरण नगर में पड़े, तो वर्षा हुई. वहां राजा दशरथ ऋषि से अनुरोध करके उन्हें पौतृष्टि यज्ञ करने के लिए अयोध्या ले आये. ऋषि यज्ञ का अन्न देकर वहां से चल गये. राजा दशरथ ने उनकी पत्नी कैकेयी, कौशल्या और सुमित्रा को यह अन्न खाने के लिए दिया. उसके बाद तीनों रानियों से राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ. इस प्रसंग को कलाकारों ने अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया. यात्रा नट-नट्टी के भाषण से शुरू हुई. नट, नटी, ब्रह्मा, विष्णु, लक्ष्मी, क्षिति, सुमित्रा, कैकेयी, श्रृष्यश्रृंग, राजा दशरथ की भूमिकाएं क्रमश: रोहित नायक, शिवम पंडा, सुरथ पाणिग्राही , ओम प्रकाश त्रिपाठी, शिवम सा, आकाश पृष्टि, शिवम पंडा, मोनू पाणिग्राही, दिव्यलोचन पृषेठ ने निभायीं. अर्जुन नायक और विभूति भूषण नायक मुख्य गायक थे. अच्युत साहू, सुधीर नायक, भिखारी चरण सा, नृप पृषेठ मुख्य पालिया थे और पंकज माझी वाद्य यंत्र वादक थे. यात्रा का उद्घाटन यात्रा संसद के अध्यक्ष दिलीप पुरोहित, समिति कार्यकर्ताओं और राम सेवकों ने रामायण पुस्तक पर माल्यार्पण करके किया.

यहां बुजुर्ग से लेकर युवा, हर कोई है कलाकार

बड़गांव कला और संस्कृति का गांव है. यहां बुजुर्ग से लेकर युवा तक, लगभग हर कोई कलाकार है. गांववाले कला, संस्कृति और परंपरा के प्रति जागरूक हैं और यह यात्रा ढाई सदियों से भी ज्यादा समय से हर साल लगातार होती आ रही है. कमाल की बात है कि वर्तमान आधुनिक सूचना व प्रौद्योगिकी का युग होने के बाद भी यहां यात्रा की पारंपरिक धारा कायम है. इस गांव के लोगों की कोशिशें सच में बेमिसाल हैं, जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र के जीवन पर आधारित अमर महाकाव्य रामायण के हर सीन और किरदार को अभिनय के जरिए जिंदा करके उसे सुंदर और जानदार बनाती हैं.

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