Rourkela News: भाजपा की डबल इंजन सरकार ने कोरापुट जिले के जयपुर विक्रमदेव स्वायत्त महाविद्यालय को विश्वविद्यालय घोषित कर दिया है. लेकिन आवश्यक बुनियादी ढांचा और सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद पानपोष स्थित राउरकेला ऑटोनोमस कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा देने में उपेक्षा की जा रही है. यह मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है.
लंबे समय से होती रही है मांग, सरकार ने नहीं दिया ध्यान
पिछली सरकार के दौरान पार्टी की संबद्धता की परवाह किये बिना विश्वविद्यालय की मांग की गयी थी. विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने चर्चा के लिए तत्कालीन विभागीय मंत्री से भी मुलाकात की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. अब सरकार बदल गयी है. नयी सरकार ने जिम्मेदारी संभाली है. आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिले के छात्रों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए शहर के विभिन्न हलकों से मांग की जा रही है कि सरकार को जयपुर के विक्रमदेव स्वायत्त महाविद्यालय की तरह राउरकेला स्वायत्त महाविद्यालय को विश्वविद्यालय घोषित करने की आवश्यकता है.
विद्यार्थियों को 200 किमी दूर संबलपुर नहीं जाना पड़ेगा
सीटू के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष विष्णु मोहंती, वरिष्ठ वकील गिरीश चंद्र महापात्र, डॉ समर मुदाली, बीजद के पूर्व जिला अध्यक्ष आनंद मोहंती, सामाजिक कार्यकर्ता रवि मोहंती, सचेतन नागरिक मंच के अध्यक्ष विमल बिसी, राउरकेला जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रवि राय और शहर के अन्य सामाजिक संगठन भी मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि देवगढ़, सुंदरगढ़, बणई अनुमंडल और राउरकेला के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की सुविधा के लिए राउरकेला स्वायत्त महाविद्यालय को विश्वविद्यालय बनाया जाना चाहिए. देवगढ़ और सुंदरगढ़ जिलों के अंतर्गत 150 से अधिक डिग्री कॉलेज हैं. विश्वविद्यालय संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए छात्रों को 200 किलोमीटर दूर संबलपुर जाना पड़ता है.
राउरकेला सरकारी स्वायत्त महाविद्यालय में हैं पर्याप्त सुविधाएं
राउरकेला सरकारी स्वायत्त महाविद्यालय के अंतर्गत कुल 27 विभाग हैं. ओडिशा राज्य मुक्त विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय की शाखाएं खोली गयी हैं. छात्रावास सहित छात्रों के आवास के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं. इसके लिए सरकार को अधिक धन निवेश नहीं करना पड़ेगा. विश्वविद्यालय बनने से पीएचडी और शोध के सभी रास्ते खुलेंगे. अधिकतम यूजीसी और केंद्रीय अनुदान उपलब्ध होंगे. शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी. जिले के विभिन्न कॉलेजों में आदिवासी और कमजोर वर्ग के 7000 से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं.
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