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रा‍ष्ट्रीय लोक अदालत: धनबाद में 85 हजार 803 वादों का निबटारा, 1.1 अरब रुपए की रिकॉर्ड रिकवरी

Updated at : 09 Mar 2024 9:45 PM (IST)
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रा‍ष्ट्रीय लोक अदालत: धनबाद में 85 हजार 803 वादों का निबटारा, 1.1 अरब रुपए की रिकॉर्ड रिकवरी

धनबाद सिविल कोर्ट

धनबाद सिविल कोर्ट में शनिवार को रा‍ष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसमें 85 हजार 803 वादों का निबटारा हुआ. 1.1 अरब रुपए की रिकवरी हुई.

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धनबाद: नालसा के निर्देश पर वर्ष 2024 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन शनिवार को धनबाद के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश सह डालसा के चेयरमैन राम शर्मा ने किया. इस दौरान 85 हजार 803 वादों का निबटारा किया गया. वहीं कुल एक अरब 10 करोड़ 31 लाख 53 हजार 405 रुपए की रिकॉर्ड रिकवरी की गयी है. श्री शर्मा ने कहा कि नेशनल लोक अदालत संविधान की परिकल्पना को पूरी करने के दिशा में एक कदम है. नवंबर 2013 से पूरे देश में नेशनल लोक अदालत का आयोजन हर तीन माह पर किया जा रहा है. हमारा संविधान हर लोगों को सामाजिक, आर्थिक व सस्ता सुलभ न्याय की गारंटी देता है.

आम लोगों के हित के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
जिला व सत्र न्यायाधीश कुलदीप ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम आदमी के हित के लिये लगाये जाते हैं. बिना प्रशासनिक सहयोग के हम समाज तक न्याय नहीं पहुंचा सकते. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला ने कहा कि लोक अदालत में महीनों कोर्ट का चक्कर लगाने और पैसे की बर्बादी से बचा जा सकता है. इससे लोगों को मानसिक शांति भी मिलती है. साथ ही प्रेम और सौहार्द आपस में फिर से बन जाता है. लोगों में प्रेम, शाति, समृद्धि और समरसता बनी रहे, यही इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य है.

इससे होती है समय व पैसे की बचत
अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार निताशा बारला ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से व्यापक पैमाने पर मुकदमों का निष्पादन किया जा रहा है. इसमें समय की बचत के साथ-साथ लोगों को कानूनी पचड़ों से मुक्ति भी मिल रही है. मुकदमों के निबटारे के लिए प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश के आदेश पर 15 बेंच का गठन किया गया था है. अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार निताशा बारला व मुख्य न्यायाधीश दंडाधिकारी आरती माला ने बताया कि नेशनल लोक अदालत में शुरूआत के केवल दो घंटे में ही 19 हजार 960 विवादों का निबटारा कर दिया गया था. बैंक लोन रिकवरी के 416, मोटरयान दुर्घटना के 34, बिजली एक्ट से संबंधित 474 ,एन आई एक्ट से संबंधित 220, दीवानी मुकदमों से संबंधित 62, आपराधिक मुकदमे 389 व अन्य विभिन्न तरह के 80 हजार 753 विवादों का निबटारा किया गया.

ये न्यायाधीश थे मौजूद
न्यायिक पदाधिकारियों में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय टी हसन, अतिरिक्त कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश एसएन मिश्रा, लेबर जज प्रेमलता त्रिपाठी, जिला व सत्र न्यायाधीश सुजीत कुमार सिंह, आरके मिश्रा, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला, अपर मुख्य दंडाधिकारी राजीव त्रिपाठी, सिविल जज राकेश रोशन, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी पूनम कुमारी, रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी अंकित कुमार सिंह, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी प्रगेश निगम, प्रतिमा उरांव, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष पीयूष कुमार, सर्टिफिकेट ऑफिसर फागुनी राम, दिनेश सिंह, कंज्यूमर फोरम की सदस्य शिप्रा समेत डालसा के पैनल अधिवक्ता जया कुमारी, संदीप कुमार, पंचानन सिंह, रंजन कुमार सिंह, चरणजीत प्रमाणिक, अभिजीत कुमार साधु, नीरज कुमार सिंह, तारकनाथ चौबे, अरविंद कुमार सिंह, जमशेद काजी, महेंद्र गोप, बैंक के पदाधिकारी सीनियर मैनेजर नीरज प्रकाश ,अभिषेक कुमार, गौतम, रविकांत, प्रणव कुमार मिश्रा, इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारी व विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे.

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