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पुणे पोर्श कार हादसा मामले में एक्शन, दो पुलिसकर्मी निलंबित, आरोपी के पिता समेत छह को न्यायिक हिरासत

Updated at : 24 May 2024 9:45 PM (IST)
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Pune car accident

Pune car accident | PTI

Pune car accident:पोर्श कार हादसे में नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल समेत छह लोगों को पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है. कोर्ट ने इन्हें सात जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा है. पुलिस का इस मामले में कहना है कि इस मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की गई है.

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Pune Car Accident: पुणे की एक अदालत ने आज यानी शुक्रवार को पोर्श हादसा मामले में नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल समेत छह लोगों को सात जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. बता दें, इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में अभियोजन पक्ष ने आगे की जांच के लिए पुलिस हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया था. अदालत ने अग्रवाल और शराब परोसने वाले दो प्रतिष्ठानों के मालिक और कर्मचारियों समेत अन्य को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं, इससे पहले दिन में पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा था कि ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि 19 मई को दुर्घटना के समय नाबालिग कार नहीं चला रहा था और कोई वयस्क व्यक्ति कार चला रहा था. वहीं, घटना को लेकर यरवदा पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस निरीक्षक राहुल जगदाले और सहायक पुलिस निरीक्षक, विश्वनाथ टोडकरी को निलंबित कर दिया गया है. उनपर आरोप है कि उन्होंने दुर्घटना के बारे में वायरलेस नियंत्रण कक्ष को सूचित नहीं किया था.

ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि कार कोई और चला रहा था- पुलिस आयुक्त
वहीं, पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि रविवार को पोर्श कार से हुए हादसे के समय गाड़ी नाबालिक आरोपी नहीं चला रहा था और उसके बजाय एक वयस्क कार को चला रहा था. कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आंतरिक जांच में मामला दर्ज करने में कुछ पुलिस कर्मियों की चूक की ओर इशारा किया गया है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि हमारी जांच के दौरान यह बात साफ हो गई है कि किशोर ही कार चला रहा था और हमने घटनाक्रम से संबंधित सभी जरूरी साक्ष्य जुटा लिए हैं. उन्होंने कहा कि जब किशोर घर से निकला था तो रजिस्टर में उसके कार के साथ घर से निकलने की एंट्री है.

पुलिस आयुक्त ने कहा कि तकनीकी और सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर इस बात की पुष्टि हुई है कि कार को किशोर चला रहा था. उन्होंने कहा कि चश्मदीदों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि घटना के समय कार किशोर चला रहा था. कुमार ने कहा कि ऐसा दिखाने का प्रयास किया गया कि रविवार तड़के तीन बजे के आसपास जब शहर के कल्याणी नगर इलाके में पोर्श कार से दो लोगों को टक्कर लगी थी तब कार एक वयस्क (ड्राइवर) चला रहा था, किशोर नहीं. उन्होंने कहा कि हम इन बातों की जांच कर रहे हैं और ऐसी कोशिश करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 201 (सबूत नष्ट करना) के तहत कार्रवाई करेंगे. रक्त नमूनों के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि किशोर को मामला दर्ज होने के बाद रविवार सुबह करीब नौ बजे ससून अस्पताल भेजा गया था. उन्होंने स्वीकार किया, ‘‘रक्त के नमूने लेने में देरी हुई और रात 11 बजे नमूने लिए गए लेकिन हमारे मामले में खून की रिपोर्ट प्रमुख आधार नहीं है.

कुमार ने कहा कि आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है और किशोर को अच्छी तरह पता था कि नशे की हालत में गाड़ी चलाने से इस तरह का अपराध हो सकता है और लोगों की जान जा सकती है. एहतियाती उपाय के रूप में, एक अन्य प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए अतिरिक्त रक्त नमूने लिए गए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नमूने और डीएनए रिपोर्ट दोनों एक ही व्यक्ति के हों. उन्होंने कहा कि हमें रक्त जांच की रिपोर्ट नहीं मिली हैं लेकिन प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है. कुमार ने कहा कि प्रारंभिक प्राथमिकी में धारा 304 ए (लापरवाही से मौत) लागू की गई थी, लेकिन उसी दिन इसकी जगह धारा 304 को लागू किया गया.
पुलिस आयुक्त ने कहा कि मामले को पुख्ता बनाने के लिए सभी साक्ष्य जुटाये जा रहे हैं. एसीपी स्तर के एक अधिकारी को जांच सौंपी जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सबूतों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने का कोई प्रयास किया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में पुलिस का पक्ष प्रभावी तरीके से रखने के लिए विशेष वकीलों की नियुक्ति की जाएगी.

कुछ पुलिस कर्मियों को गलत तरह से काम कराने के लिए मनाने के आरोपों के बारे में शिकायतों पर कुमार ने कहा कि पुलिस ने शुरू से ही सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए यह कहना सही नहीं है कि पुलिस पर दबाव था या पुलिस की ओर से लापरवाही हुई. लेकिन यह पता लगाने के लिए जांच जारी है कि पहली बार में धारा 304 लागू क्यों नहीं की गई. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि किशोर को थाने में पिज्जा और बर्गर खाने को दिए गए. उन्होंने कहा, ‘‘पिज्जा पार्टी होने के आरोपों में कोई सचाई नहीं है. कुछ चश्मदीदों पर दबाव होने की शिकायतों के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि अगर इस तरह की बात सामने आई तो संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. पुणे के कल्याणी नगर में रविवार तड़के कथित तौर पर पोर्श कार चला रहे नाबालिग चालक ने मोटरसाइकिल से जा रहे दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को टक्कर मार दी थी जिससे दोनों की मौत हो गयी थी.

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