दुबिल माइंस में स्थानीय रोजगार और मुआवजे की मांग तेज, ग्राम सभा ने आंदोलन की दी चेतावनी

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 22 May 2026 5:57 PM

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पश्चिमी सिंहभूम के दुबिल गांव में आयोजित ग्राम सभा में शामिल लोग. फोटो: प्रभात खबर

West Singhbhum News: पश्चिमी सिंहभूम के दुबिल गांव में ग्राम सभा आयोजित कर ग्रामीणों ने दुबिल माइंस में स्थानीय युवाओं को रोजगार, प्रभावित जमीन का मुआवजा और पेयजल सुविधा की मांग उठाई. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गुवा से संदीप गुप्ता की रिपोर्ट

West Singhbhum News: पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा प्रखंड अंतर्गत छोटानागरा पंचायत के दुबिल गांव में शुक्रवार सुबह ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण ग्राम सभा आयोजित की गई. गांव स्थित दुलाल गुमटी के पास सुबह आठ बजे शुरू हुई इस बैठक की अध्यक्षता ग्राम मुंडा रामलाल चाम्पिया ने की. ग्राम सभा में गांव के विकास, स्थानीय रोजगार, मुआवजा और पेयजल संकट जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई. ग्रामीणों ने एकजुट होकर क्षेत्र की समस्याओं को उठाया और कंपनी प्रबंधन तथा प्रशासन से समाधान की मांग की.

स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग

ग्राम सभा में पारित पहले प्रस्ताव में ग्रामीणों ने मांग की कि दुबिल माइंस में रोजगार देने के दौरान सबसे पहले स्थानीय युवक-युवतियों को प्राथमिकता दी जाए. ग्रामीणों का कहना था कि खनन कार्य गांव की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है, इसलिए यहां के लोगों का रोजगार पर पहला अधिकार बनता है. ग्रामीणों ने कहा कि बाहरी लोगों को नौकरी देने से स्थानीय युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है. गांव के पढ़े-लिखे और बेरोजगार युवक रोजगार के अभाव में पलायन करने को मजबूर हैं. यदि माइंस प्रबंधन स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देगा तो गांव की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सकेगा.

200 युवक-युवतियों को नौकरी देने का प्रस्ताव

बैठक के दौरान दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए ग्रामीणों ने दुबिल माइंस में गांव के कम से कम 200 युवक-युवतियों को रोजगार देने की मांग की. ग्रामीणों का कहना था कि माइंस से कंपनी को लगातार आर्थिक लाभ हो रहा है, लेकिन गांव के लोगों को उसका उचित फायदा नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो गांव की बेरोजगारी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है. साथ ही लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर होगा. ग्राम सभा में उपस्थित महिलाओं ने भी रोजगार के मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की और कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से बच्चों की पढ़ाई और जीवनयापन प्रभावित हो रहा है.

प्रभावित जमीन का उचित मुआवजा देने की मांग

ग्राम सभा में तीसरे प्रस्ताव के तहत माइंस से प्रभावित बंजर और क्षतिग्रस्त जमीन का उचित मुआवजा देने की मांग उठाई गई. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों के कारण कई खेत और जमीनें अनुपयोगी हो चुकी हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक उचित मुआवजा नहीं दिया गया है. ग्रामीणों का कहना था कि लगातार खनन कार्य से पर्यावरण और खेती दोनों प्रभावित हो रहे हैं. धूल और प्रदूषण के कारण खेती योग्य जमीन की उपज क्षमता कम हो रही है. ऐसे में प्रभावित परिवारों को न्यायसंगत मुआवजा मिलना जरूरी है.

पेयजल संकट को लेकर भी जताई चिंता

बैठक में गांव के पेयजल संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. ग्रामीणों ने मांग की कि दुबिल गांव के सात चापाकलों में सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार लगाई जाए ताकि गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो सके. ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के मौसम में गांव में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है. महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक पानी लाने के लिए जाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना था कि यदि सोलर जलमीनार की व्यवस्था की जाती है तो गांव की बड़ी आबादी को राहत मिलेगी.

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मांगें नहीं मानी गईं तो होगा आंदोलन

ग्राम सभा के अंत में ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित कंपनी प्रबंधन से मांग की कि ग्राम सभा में पारित प्रस्तावों पर जल्द सकारात्मक पहल की जाए. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आने वाले दिनों में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा. ग्रामीणों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. ऐसे में यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो गांव के लोग एकजुट होकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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