जगन्नाथपुर : आयुर्वेदिक अस्पताल के महिला छात्रावास के लिए नहीं मिल रही जमीन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 May 2024 11:58 PM
जमीन अधिग्रहण के लिए भू-अर्जन विभाग के पास एक करोड़ से रुपये पड़े हैं, ग्रामीण शहरी क्षेत्र के अनुसार कीमत के साथ नौकरी की भी मांग कर रहे हैं, वर्ष 2003 में तत्कालीन सीएम के प्रयास से शुरू हुआ था निर्माण कार्य
चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर में 100 बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल के महिला छात्रावास के लिए आयुष विभाग को जमीन नहीं मिल रही है. इस मद में जिला भू-अर्जन कार्यालय में एक करोड़ से ज्यादा राशि आवंटित है. ग्रामीण सरकारी दर पर जमीन देने से इनकार कर रहे हैं. ऐसे में मामला खटाई में पड़ता जा रहा है. हालांकि, विभाग जमीन अधिग्रहण का प्रयास कर रहा है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, काफी समझाने- बुझाने के बाद ग्रामीण शहरी क्षेत्र की दर से जमीन देना चाह रहे हैं. परिवार के सदस्य को नौकरी की मांग कर रहे हैं. फिलहाल कॉलेज और ब्वॉयज हॉस्टल तैयार है. अस्पताल भवन निर्माणाधीन है.
2003 में शुरू हुआ था निर्माण
जानकारी के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रयास से वर्ष 2003 में जगन्नाथपुर आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ था. इसके लिए केंद्र सरकार ने 10 करोड की राशि दी. निर्माण शुरू होने के बाद सात वर्षों तक कार्य बंद रहा. राशि सहित कई पेंच फंस गये थे. मौजूदा समय में निर्माण करीब 70% पूर्ण हो चुका है. यहां महिला छात्रावास के साथ कॉलेज भवन, अस्पताल भवन, फार्मेसी भवन, औषधि गार्डन का निर्माण किया जाना है.
ओपीडी शुरू करने को भेजे गये डॉक्टर नहीं कर रहे ड्यूटी
जिला आयुष पदाधिकारी डॉ नंद किशोर चौधरी के अनुसार, अस्पताल में एक भी स्टाफ की बहाली नहीं हुई है. इसी वर्ष 11 मार्च को एक डॉक्टर, कंपाउंडर और चतुर्थ कर्मी को भेजा गया है, ताकि ओपीडी खोला जा सके. उक्त चिकित्सक ठीक से ड्यूटी नहीं कर पा रहे हैं. इसकी जानकारी उपायुक्त और विभाग को दी गयी है. मैंने निरीक्षण के क्रम में पाया कि 12 मार्च से 22 मार्च तक अनुपस्थित थे. आवश्यक कार्यवाही के लिए विभाग को लिखा था.राजनीति की भेंट चढ़ती रही है योजना
गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने आयुर्वेदिक कॉलेज निर्माण की स्वीकृति दी थी. दुर्भाग्यवश यह मामला राजनीति की भेंट चढ़ गया. पिछले वर्ष में श्री कोड़ा के कहने पर जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकु ने 19 मई 2020 को विभागीय मंत्री बन्ना गुप्ता से मिलकर उक्त भवन पूरा कराने मांग की. भवन को डीएमएफटी फंड से पूर्ण कराने के लिये एनओसी की मांग की. मंत्री ने विभागीय सचिव को शीघ्र कार्रवाई करने का आदेश दिया. विभागीय सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने उपायुक्त को 10 दिसंबर 2020 से इस संबंध में मंतव्य मांगा था.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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