मनोहरपुर में वायरल हुआ ‘मेरी मदद करो-मुझे मुक्त कराअो’

Updated at : 03 May 2017 4:25 AM (IST)
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मनोहरपुर में वायरल हुआ ‘मेरी मदद करो-मुझे मुक्त कराअो’

मनोहरपुर/चिरिया : मुझे मुक्त कराअो, मेरी मदद करो’ शीर्षक का एक मैसेज इन दिनों मनोहरपुर के कई व्हाट्स एप ग्रुप पर वायरल है. इस मैसेज के साथ एक आधार कार्ड भी पोस्ट किया जा रहा है. इसमें नाबालिग व उसके पिता का नाम चिरिया निवासी लिखा है. कार्ड में पता दिल्ली का है. स्थानीय स्तर […]

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मनोहरपुर/चिरिया : मुझे मुक्त कराअो, मेरी मदद करो’ शीर्षक का एक मैसेज इन दिनों मनोहरपुर के कई व्हाट्स एप ग्रुप पर वायरल है. इस मैसेज के साथ एक आधार कार्ड भी पोस्ट किया जा रहा है. इसमें नाबालिग व उसके पिता का नाम चिरिया निवासी लिखा है. कार्ड में पता दिल्ली का है. स्थानीय स्तर पर वायरल इस मैसेज की पड़ताल करने पर पता चला कि मदद की गुहार लगाने वाली नाबालिग चिरिया निवासी है. उसे छह वर्ष पहले दिल्ली में रोजगार दिलाने के नाम पर बेच दिया गया था.

छह वर्ष पहले मेला घूमने गयी थी : छह वर्ष पूर्व मनोहरपुर के गणेश पूजा मेले से एक दलाल ने सब्जबाग दिखा कर नाबालिग को दिल्ली ले गया. वहीं रिहायशी मकान में बतौर नौकरानी के रूप में बेच दिया. वहां लगातार शोषण का शिकार हो रही सारंडा की बाला ने सोशल नेटवर्किंग साइट से मदद की गुहार लगायी. उसके परिजनों तक उसकी खबर पहुंच गयी कि उनकी बेटी दिल्ली में है. वह अब वापस घर आना चाहती है.

मनोहरपुर : छह वर्ष पूर्व दिल्ली में बेची गयी चिरिया की बेटी ने व्हाट्सएप पर लगायी मदद की गुहार
मैसेज देख बेटी को पहचान गये माता-पिता
मैसेज वायरल होने के बाद उसकी पड़ताल की गयी. चिरिया के कचिहात्ता के इमली हाटिंग में बनी एक झोपड़ी में पीड़िता के पिता सावन कोड़ा व मां चिंतामणि कोड़ा मिले. उस मैसेज को दिखाने के बाद उन्होंने अपनी बेटी की पहचान की. सावन को एक बेटी समेत चार बच्चे हैं. दो बेटों का विवाह हो गया है. वे अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं. तीसरा अभी पढ़ाई कर रहा है. वहीं पीड़िता तीसरे नंबर पर है. पिता सावन कोड़ा चिरिया माइंस में ठेका मजदूर हैं. परिवार वालों ने बताया कि छह वर्ष पूर्व उनकी बेटी सहेलियों के साथ गणेश पूजा मेला घूमने मनोहरपुर गयी थी. दूसरे दिन सुबह तक वह घर नहीं लौटी तो, परिजनों ने उसकी सहेलियों से पूछताछ की. पता चला कि वह पायल नाग (जो दिल्ली में बचपन से रहकर बड़ी हुई) के साथ दिल्ली चली गयी. इसके बाद पायल के घरवालों से पूछा गया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. परिवारवालों ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति व पुलिस के सवाल-जवाब के डर से थाने में रिपोर्ट नहीं की गयी.
सरकार व प्रशासन मदद करे : पिता
मेरी बेटी कहां है, मुझे नहीं मालूम. उसकी तसवीर लेकर मनोहरपुर व छोटानागरा में ढूंढा, कहीं नहीं मिली. इसके साथ मेरी बेटी दिल्ली भागी थी, उसके पिता मानसिक रोगी हैं. थक हार कर बेटी के लौटने का इंतजार करते रहे. सरकार और प्रशासन मेरी बेटी को दिल्ली से वापस लाने में मदद करें.
– सावन कोड़ा, पीड़िता के पिता
परिवार में सभी लोग अलग-अलग रहते हैं. आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. बेटी को कैसे खोजते, कोई चारा नहीं था. हमारी इकलौती बेटी है, उसे वापस बुला दीजिए.
– चिंतामणि कोड़ा, माता
मामले की सूचना मिली है. इसकी सत्यता की छानबीन की जा रही है. वरीय पदाधिकारियों से आवश्यक निर्देश लेकर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
– राम प्रवेश यादव, एएसआइ, चिरिया अोपी
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