98 किस्म के भोजन की लगी प्रदर्शनी
Updated at : 05 Nov 2016 1:20 AM (IST)
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टाटा स्टील का कृषि-वन्य खाद्य विविधता फूड फेस्टिवल ‘प्रजातीय खाद्योत्सव’ जैव विविधता को प्रोत्साहन के लिए किया गया आयोजन जनजातीय महिलाओं ने लाइव कुकिंग कर बताया रेसिपी नोवामुंडी : जैव विविधता और प्रजातीय पहचान के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए टाटा स्टील की नोवामुंडी अयस्क खदान ने शुक्रवार को बालीझरन पार्क में कृषि-वन्य खाद्य […]
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टाटा स्टील का कृषि-वन्य खाद्य विविधता फूड फेस्टिवल ‘प्रजातीय खाद्योत्सव’
जैव विविधता को प्रोत्साहन के लिए किया गया आयोजन
जनजातीय महिलाओं ने लाइव कुकिंग कर बताया रेसिपी
नोवामुंडी : जैव विविधता और प्रजातीय पहचान के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए टाटा स्टील की नोवामुंडी अयस्क खदान ने शुक्रवार को बालीझरन पार्क में कृषि-वन्य खाद्य विविधता उत्सव व प्रजातीय खाद्योत्सव मनाया. मौके पर झारखंड के विभिन्न प्रजातीय समूहों ने कृषि-खाद्य प्रदर्शित किया. पार्क में जनजातीय पेंटिंग के साथ ग्रामीण तत्व, रसोई के साजो-सामान और लघुचित्रों से सजाया गया था. उत्सव में ओड़िशा के कोरापुट स्थित एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन,
रांची के इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी व बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और रांची नामकूम की आइसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल रेजिन एंड गम ने वरीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व में धान की दुर्लभ व लुप्तप्रायः देसी किस्म (जैसे खुजी, बुटुकी, झुपरामुंडी, चिटीपिटी आदि) का संग्रह प्रस्तुत किया. इसमें भोजन के 98 किस्मों को दर्शाया गया. जनजातीय महिलाओं ने लाइव कुकिंग कर बताया कि लजीज आदिवासी खाद्य कैसे तैयार होते हैं.
उत्सव में जगन्नाथपुर की विधायक गीता कोड़ा, भुवनेश्वर के एकेडमी ऑफ लैंग्वेज ऐंड ट्राइबल कल्चर के डॉ परमानंद पटेल, डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग ऑफिसर जॉन जोसेफ बेंजामिन तिर्की, नोवामुंडी ओएमक्यू के जीएम पंकज सतीजा, एचआपरएम के चीफ संजय वीरमानी और एडमिन हेड केसी दास समेत नोवामुंडी और आसपास के लोग उपस्थित थे.
विधायक गीता कोड़ा ने कहा कि जैव विविधता के प्रोत्साहन में यह कार्यक्रम कारगर होगा. श्री पटेल ने जनजातीय संस्कृति और खाद्य प्रचलन पर प्रकाश डाला. श्री तिर्की ने बताया कि जल की कमी वाले क्षेत्रों में धान की नयी किस्मों की खेती कैसे की जाती है. जीएम पंकज सतीजा ने कहा कि उत्सव के अंतर्गत राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य-11 में योगादान देने के लिए ’स्पॉट द स्पीसीज, जैव विविधत सेमिनार ‘ग्रीन थेरेपी’, हो भाषा पर कार्यक्रम ‘दोस्तुर’ सहित प्रजातीय-वनस्पतिक परंपराओं का आयोजन किया जा रहा है.
कार्बनिक खेती से हम धान की हाइब्रिड और अन्य प्रकार के अनाज विकसित करते हैं. प्रकृति जैव विविधता बरकरार रखने के लिए देसी प्रजातियों का संरक्षण महत्वपूर्ण है. –
रैमाती घिउरिया, कोरापुट की युवा आदिवासी किसान
हमें आने वाली पीढ़ी के लिए खाद्य विविधता को परिलक्षित करना चाहिए, ताकि वे अपने जड़ को जान सकें.
– मीता महली, ओड़िशा
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